कविता बहार

मिल्खा सिंह राठौड़ पर कविता

हिंदी कविता

मिल्खा सिंह राठौड़ पर कविता उड़न सिक्ख मिल्खा सिंह जी, इक राजपूत राठौड़ भए।दौड़ दौड़ कर दुनियां में, दिल से दिल को जोड़ गए।। वो उस भारत में जन्मे थे, जो आज पाक का हिस्सा है।कहूं विभाजन की क्या मैं, जो इक काला किस्सा है।।सिंह साक्षी थे उसके, जहां मारे कई करोड़ गए… अपने प्रियजन […]

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धर्म पर कविता- रेखराम साहू

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धर्म पर कविता- रेखराम साहू धर्म जीवन का सहज आधार मानो,धारता है यह सकल संसार मानो। लक्ष्य जीवन का रहे शिव सत्य सुंदर,धर्म का इस सूत्र को ही सार मानो। देह,मन,का आत्म से संबंध सम्यक्,धर्म को उनका उचित व्यवहार मानो। दंभ मत हो,दीन के उपकार में भी,दें अगर सम्मान तो आभार मानो। भूख का भगवान

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मणिकर्णिका-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

मणिकर्णिका-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर कविता अंग्रेजों को याद दिला दी, जिसने उनकी नानी।मर्दानी, हिंदुस्तानी थी, वो झांसी की रानी।। अट्ठारह सौ अट्ठाइस में, उन्नीस नवंबर दिन था।वाराणसी हुई वारे न्यारे, हर सपना मुमकिन था।।नन्हीं कोंपल आज खिली थी, लिखने नई कहानी… “मोरोपंत” घर बेटी जन्मी, मात “भगीरथी बाई”।“मणिकर्णिका” नामकरण, “मनु” लाड कहलाई।।घुड़सवारी, रणक्रीडा, कौशल,

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जीवन एक संगीत है-आभा सिंह

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जीवन एक संगीत है-आभा सिंह जीवन एक संगीत है इसको गुनगुनाइए लाखों उलझनें हो मगर हँसकर सुलझाइए कमल कीचड़ में भी रहकर अपनी सुन्दरता ना खोतागुलाब काँटों में भी रहकर मुस्कुराना ना भूलतादामन से काँटे चुन-चुनकर जीवन को सफल बनाइएजीवन एक संगीत है इसको गुनगुनाइए !! अंगारों से भरी राहों से गुज़रकर उँचाइयों पर पहुंचिएअंधेरों

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मुखौटा पर कविता

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मुखौटा पर कविता हां!मैं मुखौटा।मेरी ओट मेंमुंह जो होता।अंदर से रोकरबाहर हंसाता भी हूं।कभी कभीहोली के हुड़दंग में,बच्चों कोडराता भी हूं।मैंछुपा लेता हूं।मुखड़े की मक्कारियां।आंखों की होश्यारियां।और दिल की उद्गारियां।।दो मुंहे सांपों काएक चेहरामेरा ही तो है।मैं हीसामने वालीनजरों के लिएधोखा हूं।और खुद सामने वाले की नज़रो सेबचने का मौका हूं।हां..हां मैं ही मुखौटा हूं।।

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संगीत और जीवन आपस में हैं जुड़ें

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संगीत और जीवन आपस में हैं जुड़ें कभी सुनो धड़कन की आवाज।कभी सांसों में ,वो बजता साजजीवन संगीत की मधुर आवाज। कभी अधरों पर आई हंसी हो।कभी बोली मैं आई मिठास हो।सब जीवन संगीत का मधुर राग। कभी शिशु की मधुर किलकारियों में।कभी आंखों से बहते अश्कों धारों में।जीवन संगीत के सारे स्वर मिल जाते।सभी

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खिले जो फूल बहारों के चमन हुआ रोशन – अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

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इस कविता में जिन्दगी के खुशनुमा पहलुओं को महसूस करने का प्रयास किया गया है |
खिले जो फूल बहारों के , चमन हुआ रोशन – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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बुजुर्गों के सम्मान पर कविता

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बुजुर्गों के सम्मान पर कविता बुजुर्ग, परिवार-आधार-स्तंभ, इनका करो सम्मान, करो सेवा सहृदय से, इनका मत करो अपमान। करो सत्कार बुजुर्गों पर ,रोको इन पर अत्याचार, बड़ा खुशनसीब है वो जिसे मिला, बुजुर्गों का प्यार। परोपकार का हमको देते ये ज्ञान, बुजुर्गों का हमेशा करो सम्मान। अब बुजुर्ग हो गया कमजोर और लाचार, बहुत खुशनसीब

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जीवन में संगीत ही आधार है

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जीवन में संगीत ही आधार है संगीत से ही जुडा़ जीवन,जीवन में संगीत ही आधार है । मां की लोरी में पाया संगीत की झंकार है।पापा के गीतों में पाया खुशियां अपार है । बारिश की कल कल बूंदो मेंआती संगीत की बयार है ।कलियों की खिलने मेंभंवरे करते संगीतमय मनुहार है । कोयल का

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रक्तदान दिवस

रक्तदान महादान / अमिता गुप्ता

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विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है।  रक्तदान महादान /अमिता गुप्ता (विश्व रक्तदाता दिवस) रक्तदान है महादाननिष्प्राण को दे जीवनदान,इससे होता जनकल्याणमानव तू बना अपनी पहचान। रक्तदान साबित होता,निस्सहाय को वरदान,रक्त की एक एक बूंदटूटती

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Jai Sri Ram kavitabahar

रामनिवास बने अतिसुंदर / तोषण कुमार चुरेन्द्र ‘दिनकर’

समाज और यथार्थ

राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। रामनिवास बने अतिसुंदर / तोषण कुमार चुरेन्द्र ‘दिनकर’ राम का राज आएगा फिर से कि,धीरज धार बनाए

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जाग्रत हो हे भारतवासी

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जाग्रत हो हे भारतवासी जहाँ कभी पुष्प वाटिका हुआ करती थी, वहाँ आज लाशों का अंबार लगा हुआ है , जो जमीन कभी सोने की चिड़िया होती थी ,वहाँ आज लाशों का विछावन बिछा है , जो कभी विश्व का भाग्य विधाता हुआ करता था ,वो आज भिखारी बना घुमाता है , जहाँ कभी मंदिरो

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