कविता बहार

जल के बिना मरना हर पल है – प्रियांशी मिश्रा

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जल या पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना है – H2O। यह सारे प्राणियों के जीवन का आधार है। आमतौर पर जल शब्द का प्रयोग द्रव अवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है पर यह ठोस अवस्था (बर्फ) और गैसीय अवस्था (भाप या […]

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जयी बनो – जयशंकर प्रसाद

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कविता बहार में आप का सवागत है आज हम जयशंकर प्रसाद की एक कविता जाई बनो इसके बारे में यह पढेंगे ,आसा है यह कविता आप आत्यन्त पसंद आयेगी जयी बनो – जयशंकर प्रसाद हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारतीस्वयं प्रभा समुज्वला स्वतंत्रता पुकारती। अमर्त्य वीर पुत्र हो दृढ़ प्रतिज्ञ सोच लो,प्रशस्त पुण्य पंथ

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प्रयाण गीत – गोपालप्रसाद व्यास

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प्रयाण संगीत (march) एक प्रकार का संगीत है जो प्रायः सैनिक वाद्य (मिलिटरी बैण्ड) में प्रयुक्त होती है। प्रयाण-गीत गाए जा!- गोपालप्रसाद व्यास प्रयाण-गीत गाए जा ! स्वर में स्वर मिलाए जा।यह ज़िन्दगी का राग है, जवान जोश खाए जा!प्रयाण-गीत गाए जा! तू कौम का सपूत है, स्वतन्त्रता का दूत है,निशान अपने देश का उठाए जा, उठाए जा!

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हर हर महादेव पर कविता

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हर हर महादेव पर कविता – शंकर या महादेव सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हर हर महादेव पर कविता हर-हर

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पृथ्वीराज चौहान पर कविता(दोहा छंद) -बाबूलाल शर्मा विज्ञ

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पृथ्वीराज चौहान पर कविता(दोहा छंद) -बाबूलाल शर्मा विज्ञ अजयमेरु गढ़ बींठली, साँभर पति चौहान।सोमेश्वर के अंश से, जन्मा पूत महान।। ग्यारह सौ उनचास मे, जन्मा शिशु शुभकाम। कर्पूरी के गर्भ से, राय पिथौरा नाम।। अल्प आयु में बन गए, अजयमेरु महाराज।माँ के संगत कर रहे, सभी राज के काज।। तब दिल्ली सम्राट थे, नाना पाल

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गाय पर कविता (दोहा) – मदन सिंह शेखावत

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गाय एक महत्त्वपूर्ण पालतू पशु है जो संसार में प्रायः सर्वत्र पाई जाती है। इससे उत्तम किस्म का दूध प्राप्त होता है। हिन्दू, गाय को ‘माता’ कहते हैं। इसके बछड़े बड़े होकर गाड़ी खींचते हैं एवं खेतों की जुताई करते हैं। भारत में वैदिक काल से ही गाय का महत्व रहा है। विकिपीडिया गाय पर कविता

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स्वदेश पर कविता – गोपाल सिंह नेपाली

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स्वदेशी का अर्थ है- ‘अपने देश का’ अथवा ‘अपने देश में निर्मित’। ओ स्वदेश की जवानियो, चलो उठो-उठो इतिहास की निशानियों, चलो उठो-उठोओ खून की खामियो, चलो उठो-उठोहम जन्म लें स्वतंत्र ही, स्वतंत्र ही मरें,तुम अर्चना करो, अमोघ अर्चना करो अधिकार लो, सदा न भीख माँगते रहोसंग्राम से जनम-जनम न भागते रहो।छाई घटा, चली हिलोर,

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प्रेरणा दायक कविता – हम स्वदेश के सपूत

प्रेरणा और सकारात्मकता, हिंदी कविता

कविता बहार के प्रेरणा दायक कविता में से एक कविता – हम स्वदेश के सपूत हम स्वदेश के सपूत आज पग बढ़ा चले। हाथ में अंगार, है हर चरण पहाड़ है।हम बढ़े जिधर उधर आँधियाँ ही बढ़ चलें।हम स्वदेश के सपूत आज पग बढ़ा चलें। मातृभूमि तू न डर, धीर धर विश्वास धर।शत्रु शीश बीनती

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दूर संचार करेगा विकास का योग -अशोक शर्मा

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इसे सुनेंविश्व दूरसंचार दिवस १७ मई को मनाया जाता है। यह दिन 17 मई 1865 को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना की स्मृति में विश्व दूरसंचार दिवस के रूप में जाना जाता था। वर्ष1973 में मैलेगा-टोर्रीमोलिनोन्स में एक सम्मेलन के दौरान इसे घोषित किया गया। दूरसंचार पर कविता समय पुराने अतीत काल में,दूर दराज के हाल चाल में,चिट्ठी आती खुशियां लाती,बहुत

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देखें कौन सुमन शैया तज कंटक पथ अपनाता है?

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देखें कौन सुमन शैया तज, कंटक पथ अपनाता है? देश-प्रेम का मूल्य प्राण है, देखें कौन चुकाता है?देखें कौन सुमन शैया तज, कंटक पथ अपनाता है? सकल मोह ममता को तजकर, माता जिसको प्यारी हो।दुश्मन की छाती छेदन को, जिसकी तेज़ कटारी हो।मातृभूमि के लिए राज्य तज, जो बन चुका भिखारी हो।अपने तन,मन,धन-जीवन का स्वयं

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कोरोना से बचना है -शिवांशी यादव

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कोरोना से बचना है -शिवांशी यादव कोरोना से बचना है, हमें सुरक्षित ही रहना है|सबसे दूरी बनाए रखना है, अभी घर से नहीं निकलना है| अपने लिए नहीं तो,अपनों के लिए सोचिए।जब भी घर से निकलिएमास्क लगा के ही रहिए। फल-सब्जियों को अच्छे से धोना है, गुनगुना पानी, रोज काढ़ा पीना है|अगर कोरोना को हराना

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