कविता बहार

वाणी वंदना : माँ वाणी अभिनंदन तेरा

हिंदी कविता

वाणी वंदना : माँ वाणी अभिनंदन तेरा माँ वाणी, अभिनंदन तेरा, करती हिय से, वंदन तेरा, दिव्य रूप आँखों में भर लूं, तन हो जाये चंदन मेरा | माँ वाणी, अभिनंदन तेरा |  जीवन अपना, अनुशासित हो, परिलक्षित हो, परिभाषित हो, इस पर न हो, तम का डेरा | माँ वाणी, अभिनंदन तेरा |  हम

वाणी वंदना : माँ वाणी अभिनंदन तेरा Read More »

जय गणपति जय पार्वती सुत- गणेश स्तुति

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

जय गणपति जय पार्वती सुत- गणेश स्तुति Read More »

लौट आओ बसंत

हिंदी कविता

लौट आओ बसंत न खिले फूल न मंडराई तितलियाँन बौराए आम न मंडराए भौंरेन दिखे सरसों पर पीले फूलआख़िर बसंत आया कब..? पूछने पर कहते हैं–आकर चला गया बसंत !मेरे मन में रह जाते हैं कुछ सवालकब आया और कब चला गया बसंत ?कितने दिन तक रहा बसंत ?दिखने में कैसा था वह बसंत ?

लौट आओ बसंत Read More »

भीष्म पितामह जयन्ती पर हिंदी कविता

हिंदी कविता

भीष्म महाराजा शान्तनु के पुत्र थे महाराज शांतनु की पटरानी और नदी गंगा की कोख से उत्पन्न हुए थे | उनका मूल नाम देवव्रत था। |हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को भीष्म पितामाह की जयंती मनाई जाती है भीष्म की विवशता कौरव और पांडव के पितामह,सत्य न्याय के पारखी !चिरकुमार भीष्म

भीष्म पितामह जयन्ती पर हिंदी कविता Read More »

गुरूपूर्णिमा विशेष दोहे

हिंदी कविता

गुरूपूर्णिमा विशेष दोहे करूँ नमन गुरुदेव को,जिनसे मिलता ज्ञान।सिर पर आशीर्वाद का,सदा दीजिए दान।।१।।*****हरि गुरु भेद न मानिए,दोनों एक समान।कुछ गुरु हैं घंटाल भी,कर लेना पहचान।।२।।*****प्रथम गुरू माता सुनो,दूजे जो दें ज्ञान।तीजे दीक्षा देत जो,जग गुरु सीख सुजान।।३।।*****ज्ञान गुरू देकर करें,शिष्यों का कल्याण।गुरु सेवा से शिष्य भी,होते ब्रम्ह समान।।४।।*****गुरू परीक्षा लेत हैं,शिष्य न जो घबराय।श्रद्धा

गुरूपूर्णिमा विशेष दोहे Read More »

पृथ्वी दिवस: धरती हमारी माँ

हिंदी कविता

पृथ्वी दिवस: धरती हमारी माँ हमको दुलारती हैधरती हमारी माँ।आँचल पसारती हैधरती हमारी माँ। बचपन मे मिट्टी खायीफिर हम बड़े हुए।जब पाँव इसने थामातब हम खड़े हुए।ममता ही वारती हैधरती हमारी माँ।हमको दुलारती हैधरती हमारी माँ। तितली के पीछे भागेकलियाँ चुने भी हम।गोदी में इसकी खेले,दौड़े,गिरे भी हम।भूलें सुधारती हैधरती हमारी माँ।हमको दुलारती हैधरती हमारी

पृथ्वी दिवस: धरती हमारी माँ Read More »

स्वामी विवेकानंद

युवा वर्ग आगे बढ़ें

समाज और यथार्थ

युवा वर्ग आगे बढ़ें छन्द – मनहरण घनाक्षरी युवा वर्ग आगे बढ़ें,उन्नति की सीढ़ी चढ़ें,नूतन समाज गढ़ें,एकता बनाइये। नूतन विचार लिए,कर्तव्यों का भार लिए,श्रम अंगीकार किए,कदम बढ़ाइए। आँधियाँ हैं सीमा पार,काँधे पे है देश भार,राष्ट्र का करें उद्धार,वक्त पहचानिए। बहकावे में न आयें,शिक्षा श्रम अपनायें,राष्ट्र संपत्ति बचायें,आग न लगाइए। ✍सुश्री गीता उपाध्याय रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

युवा वर्ग आगे बढ़ें Read More »

Scroll to Top