धरा पर कविता (दोहा)
हिंदी कविताधरा पर कविता आज धरा में प्रेम ही, मानवता का सार।। जिनके मन में प्रेम हो, करता नित उपकार।।१।। प्रेम मिले तो दुष्ट भी, बने धरा में संत।। इसकी महिमा क्या कहूंँ, पावन अतुल अनंत।।२।। *अपनी जननी हैं धरा,* प्रेम करे बरसात।। सब कुछ सहकर दें हमें, सुख की सब सौगात।।३।। तरु तरुवर भी प्रेम […]
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