केवरा यदु मीरा के दोहे
हिंदी कविताकेवरा यदु मीरा के दोहे (1) चंदन माथे पर चंदन लगा, कैसा ढ़ोंग रचाय ।मंदिर मठ के नाम पर, वह व्यापार चलाय ।। (2)अग्निपथ सैनिक चलते अग्निपथ, लिये तिरंगा हाथ ।पीछे फिर हटते नहीं, कटे भले ही माथ ।। (3)दीपक बेटा कुल दीपक बना, बेटी का अपमान ।भ्रूण कोख में मारते, होगा कब सम्मान ।। […]
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