हिंदी कविता

आओ खेल खेलें- दीपा कुशवाहा

हिंदी कविता

“आओ खेल खेलें” एक कदम बढ़ाओ जोश दिखाओछुपे अपने प्रतिभाओं को होश में लाओजिम्मेदारियों की चादर में ढक गईअपनी खेल जिज्ञासा को जगाओमजबूती की ढाल पकड़कर तुमनई उम्मीदों को सजाओभूले बिसरे दोस्तों को बुलाओजिंदगी में थोड़ा आनंद लाओपरिवार के साथ मिलकर भीचलो थोड़ा खेल को सजाओंविलय होते बीमारियों से अनमोल जीवन को बचाओबचपन को याद […]

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आओ खेलें खेल- वर्तिका दुबे

मन और भावनाएँ

आओ खेलें खेल- वर्तिका दुबे आओ खेले खेल भइया आओ खेले खेल। खेल खेल में हो जाता है संस्कृतियों का मेल। खेल में होता दिमाग चुस्त शरीर स्वस्थ निरोगी। जीवन में आए संयम अनुशासन मन बन जाए योगी। आओ खेलें खेल – – – – – – – – अपनी दिनचर्या में हम खेलों को

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काश मेरा भी भाई होता !! रक्षाबंधन पर कविता

मन और भावनाएँ

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ ।। रक्षाबंधन पर बहन के तरफ से भाई के लिए प्रेम भावना प्रकट किया है ।।

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आओ खेल खेलें-रिंकीकाशी नरेश यादव

हिंदी कविता

आओ खेल खेलें आओ जीवन के सतरंगी खेल खेले, अपनी कला को प्रदर्शित करें । चलो खुद मे एक विश्वास लाए, आओ हम एक खेल खेले । है नहीं हारने की चाहत ,ओैर नहीं है जीतने की उम्मीद ।बस खेल में डूब जाने का मन,आओ खेल खेले एक ऐसा । अस्तव्यस्त है बिन खेल जिंदगी

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shri Krishna

आओ मेरे श्याम -बिसेन कुमार यादव ‘बिसु’

हिंदी कविता

आओ मेरे श्याम -बिसेन कुमार यादव ‘बिसु’ जन्माष्टमी महोत्सव पर कविता गोपियों के संग रास रचैया तुम हो मेरे किशन कन्हैया।तेरे आराधक तुम्हें बुला रही है,चले आओ मेरे साॅंवरिया।। मीरा के प्रभु गिरधर नागर।राधा के तुम हो मुरलीधर।। मेरे लिए तो तुम श्रीराम हो।और तुम ही मेरे घनश्याम हो।। इस प्यासी नयन की प्यास बुझाने

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चलो चले खेल खेलें

हिंदी कविता

खेल खेलना हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है । खेल खेलने से हमारा स्वस्थ भी ठीक रहता है और शरीर में भी फूर्ती रहती है ।

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आओ खेलें खेल -संजय कुमार गुप्ता

हिंदी कविता

आओ खेलें खेल जीवन के इस दौड़ में,चल थोड़ा शामिल हो जाएं।उत्साह और उमंग से,चल ऐसा अभ्यास करें।स्फूर्ति और चपलता से,नित जीत का नया स्वाद चखें।तोड़ डालें पूर्वानुमानों को,इतना हम सब आगे बढ़ें।उठो, जागो और मत रुको,जब तक की लक्ष्य ना पा जाओ।आदर्श वाक्य जो अपनाया विश्व ने,और तेज, और ऊंचा और ताकतवर का,सदा चलो

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सदा छला जन का विश्वास

हिंदी कविता

सदा छला जन का विश्वास विश्वास गीत (१६,१५) सत्ताधीशों की आतिश से,जलता निर्धन का आवास।राज महल के षडयंत्रों ने,सदा छला जन का विश्वास। युग बीते बहु सदियाँ बीती,चलता रहा समय का चक्र।तहखानों में धन भर जाता,ग्रह होते निर्बल हित वक्र।दबे भूलते मिले दफीने,फलती मचली मिटती आस।राज महल के षडयंत्रों ने,सदा छला जन का विश्वास। सत्ता

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आओ खेल खेलें- 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस. ————— आओ खेल खेलें—————– खेल है मानव जीवन का अभिन्न अंग,खेल से छाई जीवन में खुशहाली का रंग।खेल है अनमोल उपहार यह सब को बोलें,जीवन के उद्धार के लिए, आओ खेल खेलें। कोई खेले हॉकी क्रिकेट तो कोई कबड्डी,शरीर हो जाए स्वस्थ और मजबूत- हड्डी।आलसी – जीवन और खेल दोनों

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