हिंदी कविता

राजकिशोर धिरही के गजल

हिंदी कविता

राजकिशोर धिरही के गजल कमाई पाप की हो वो खजाना छोड़ दो अब सेमिलाकर दूध में पानी कमाना छोड़ दो अब से भरोसा जिंदगी का ख़ौफ़ में आकर रहें कब तकमुहब्बत है तुम्हीं से बस सताना छोड़ दो अब से गली में चाँद निकले देखने की कुछ इजाजत होनियम जो जान लेती हो बनाना छोड़

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प्यासा पंछी पर कविता-प्रेमचन्द साव

प्रकृति और पर्यावरण

प्यासा पंछी पर कविता मन है उदास भटकता फिरे ।जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।मन को ना कोई बांध सके। तो खुले आकाश की खोज करे ।मन की उड़ान खुशियों की पुकार करे ।जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे । फूलों में भौंरे जैसे गुंजन करे ।मन की इच्छा वैसे ही हिलोरे करे ।जैसे प्यासा पंछी

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शंकर पर कविता

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प्रस्तुत कविता शंकर पर कविता आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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beti

बेटियों पर कविता

समाज और यथार्थ

बेटियों पर कविता बेटियों से ही घर में आती खुशियाँ अपार।बेटियों के बिन अधुरा घर संसार।।गृहस्थ कार्यों में वह हाथ बटायें।सभी काज को मंगल कर जाये।।बिन बेटियों के जीवन न आगे बढ़ पाये।अपनों के साथ मिलकर रहना हमें सिखलाये।।घर में खुशी और मन में उमंग लिए।अपनी दुखों को छुपाकर संग संग जिये।।जन्म हुई बेटी की,घर

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जीत का विश्वास पर कविता

हिंदी कविता

जीत का विश्वास पर कविता संघर्ष से भरा जीवन,अग्रसर सतत होना।काँटो पर भी चलकर,हँसकर पल बिताना। मुश्किल समझे दुनिया,उसको जोश दिखा जाना।हर लक्ष्य को प्राप्त कर,राहों पर चलते जाना। चिंता मन से हटाकर,आशा की किरण जगाना।उत्साह भर ले मन में ,जीत का विश्वास दिलाना।~~~~~~~~~~~~~~~~डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”पीपरभावना (छत्तीसगढ़)मो. 8120587822

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शिक्षक पर कविता

समाज और यथार्थ

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

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माँ शारदे पर कविता

हिंदी कविता

माँ शारदे पर कविता सृजनता का आधार दे।मुझको ऐसा ज्ञान दे । अंधकार को दूर मिटा के।ज्ञान का प्रकाश दे । नमन् करूँ मै माँ शारदे को ।मुझको नित ही ज्ञान मिले ।ज्ञान,विद्या,संगीत, कला । अधिष्ठात्री देवी का वर मिले।वीणा,पुस्तक,माला धारिणी ।नित्य मैं करुँ चरण वंदना ।बर्ह्मलोक विराजे,हंसवाहिनी श्वेतपद्मासना । नित्य करूँ मैं नमन तुमको।विद्या,बुद्धि,वक

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श्रमिक-विकास की बुनियाद पर कविता

हिंदी कविता

श्रमिक-विकास की बुनियाद पर कविता सूरज की पहली किरण से काम पर लग जाता हूँ।ढलते सूरज की किरणों संग वापस घर को आता हूँ।अपने घर परिवार के लिए,शरीर की चिंता छोड़ मैं।हवा,पानी,धूप,छांह को हँसकर सह जाता हूँ।।1।। नव निर्माण,नव विहान की शुरुआत हूँ मैं।देश के विकास की पहली ईंट बुनियाद हूँ मैं।सोचता हूँ गढ़ रहा

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mahatma gandhi

गांधी जी के सपनों पर कविता

समाज और यथार्थ

गांधी जी के सपनों पर कविता गांधीजी के सपनों का है ये भारत,उन्नत होकर विकसित होता ये भारत।ग्रामीण परिवेश में जागरूकता बढ़ाया,स्वदेशी अपनाकर अभियान चलाया।। आर्थिक सामाजिक न्याय बताकर,गाँव के विकास को समझाया।व्यापकता की दृष्टि फैलाकर,जाति,धर्म,भाषा के भेदभाव को मिटाया।। नर-नारी को समानता दिलाकर,जीवन जीने का ढंग बताया।आमजनों को शिक्षा देकर,मानव चेतना को जागृत कराया।।

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वाह रे कोरोना से हालत पर कविता

हिंदी कविता

कोरोना से हालत पर कविता वाह रे , कोरोना ! तूने तो गजब कर डाला ,छोटी सोच और अहंकार को ,तूने चूर-चूर कर डाला ।।वाह रे , कोरोना ! …… पैसो से खरीदने चले थे दुनिया ,ऐसे नामचीन पड़े है होम आईसोलोशन में ,तूने तो पैसो को भी , धूल-धूल कर डाला ।।वाह रे ,

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नित्य करूँ मैं वंदना

हिंदी कविता

नित्य करूँ मैं वंदना नित्य करूँ मैं वंदना,गुरुवर को कर जोर।पाऊँ चरणों में जगह ,होकर भाव विभोर।। मात-पिता भगवान हैं,करना वंदन रोज।इन देवों को छोड़कर,करते हो क्या खोज? जिनके आशीर्वाद से ,हुआ सफल हर काम।करता हूँ नित वंदना,मात-पिता के नाम।। धरती माँ की वंदना,यह ही जग में सार।सबको समान जानकर,करती हैं उपकार।। प्रेम भाव से

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मौत की खबर पर कविता

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मौत की खबर पर कविता यूं ही मै गरल पीता रहा,चारदीवारी में गुनता रहा।नजर बंद हो अपने घर में,मौत खबर सब सुनता रहा। अपनों से अपने भी दूर हैं,काँधा भी नहीं मजबूर हैं।दूना कर गए ओ जगत को,अस्थियां उनके चुनता रहा।नजर बंद हो अपने घर में,मौत खबर सब सुनता रहा। छीनी किसने उनकी साँसें,उजड़ गई

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