हिंदी कविता

कमजोरो पर कविता

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कमजोरो पर कविता कमजोर पर सभी हिमत दिखाते हैंलोग पत्थर से क्यों नही टकराते हैएक पीछे एक चलते हैंक्यों नही कुछ अलग कर दिखाते हैकुछ बढ़िया कर जाते हैंमहान बनने के लक्षण सभी में नही पते हैक्यों लोग;कमजोर पर हिमत दिखाते हैं साल निकल गएकि ताक नहीआज सभी सेवकऔर सेवा करना चाहते हैपता नही क्या […]

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शह-मात पर कविता-विनोद सिल्ला

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शह-मात पर कविता जाने क्योंशह-मात खाते-खातेशह-मात देते-देतेकर लेते हैं लोगजीवन पूरामुझे लगासब के सबहोते हैं पैदाशह-मात के लिएनहीं हैकुछ भी अछूताशह-मात सेलगता हैशह-मात ही हैपरमो-धर्मशह-मात हैकण-कण में व्याप्तशह-मात ही हैअजर-अमर

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अब नहीं रुकूंगी पर कविता

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अब नहीं रुकूंगी पर कविता अब नहीं रुकूंगी,नित आगे बढूंगीमैंने खोल दिए हैं ,पावों की अनचाहे बेड़ियां।जो मुझसे टकराए ,मैं धूल चटाऊंगीहाथों में डालूंगी ,उसके अब हथकड़ियां।।(१)अब धुल नहीं मैं ,ना चरणों की दासी।अब तो शूल बनूंगीअन्याय से डरूँगी नहीं जरा सी।क्रांति की ज्वाला हूँ मैं,समझ ना रंगीनी फुलझड़ियाँ ।।मैंने खोल दिए हैं ,पावों की

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आजाद देश की दशा पर कविता

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आजाद देश की दशा पर कविता भाई भाई में देखो कितनी लड़ाई हैहर चौराहे पर बैठा देखो कसाई हैपर्दे में आज भी रहती है बहू बेटियांकहते हैं लोग हमारा देश आजाद है। बेटियों के घर पर बेटा घर जमाई हैंन जाने लोगों ने कैसी रीत बनाई हैरस्मो रिवाज में बांधकर बेटियों कोकहते है लोग हमारा

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mera bharat mahan

स्वदेशी पर कविता

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स्वदेशी पर कविता इंग्लिस्तानी छोड़ सभ्यता,अपनाओ देशीहिंदुस्तानी रहन-सहन हो,छोड़ो परदेशी। वही खून फिर से दौड़े जो,भगतसिंह में था,नहीं देश से बढ़कर दूजा, भाव हृदय में था,प्रबल भावना देशभक्ति की,नेताजी जैसी,इंग्लिस्तानी छोड़ सभ्यता,अपनाओ देशीहिंदुस्तानी रहन-सहन हो,छोड़ो परदेशी। वही रूप सौंदर्य वही हो,सोच वही जागे,प्राणों से प्यारी भारत की,धरती ही लागे,रानी लक्ष्मी रानी दुर्गा सुंदर थी कैसी,इंग्लिस्तानी

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देशप्रेम पर कविता-कन्हैया साहू अमित

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देशप्रेम पर कविता देशप्रेम रग-रग बहे, भारत की जयकार कर। रहो जहाँ में भी कहीं, देशभक्ति व्यवहार कर। मातृभूमि मिट्टी नहीं, जन्मभूमि गृहग्राम यह।स्वर्ग लोक से भी बड़ा, परम पुनित निजधाम यह।जन्म लिया सौभाग्य से, अंतिम तन संस्कार कर।-1रहो जहाँ में भी कहीं, देशभक्ति व्यवहार कर। वीरभूमि पैदा हुआ, निर्भयता पहचान है। धरती निजहित त्याग

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प्रेम उत्तम मार्ग है पर कविता

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प्रेम उत्तम मार्ग है पर कविता अन्नय प्रेम है तुझसे रीतेरे स्वर लहरी की मधुर तान।तुम प्रेम की अविरल धारा होमुख पे तेरी है मिठी मुस्कान ।मेरे मन में बसी है तेरी छवितुम्हें देख के मेरा होय विहान।मैं व्यथित, विकल हूँ तेरे लिएहे प्रिय तुम्हीं हो मेरे प्राण ।शीतल सुरभित मंद पवन भीदेख-देख तुम्हें शरमाई

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बिहार बरबीघा (पुनेसरा) के कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित कविता तुम और चाँद जो निश्छल प्रेम पर कविता को को दर्शाता है ।।

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निश्छल प्रेम पर कविता चाँद तू आजा फिर से पास मेरेबिन तेरे जिन्दगी अधूरी है ।खोकर तुम्हें आज मैंने जाना हैमेरे लिए तू कितनी जरूरी है ।। रूठी हो अगर तो मैं मनाता हूँमाफ कर अब मैं कसम खाता हूँगलती ना होगी अब से वादा हैतेरे कदमों में सर झुकाता हूँ । इश्क है तुमसे

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राधा और मीरा पर लेख

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रक्षा बन्धन एक महत्वपूर्ण पर्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह ‘रक्षासूत्र’ मात्र धागे का एक टुकड़ा नहीं होता है, बल्कि इसकी महिमा अपरम्पार होती है। कहा जाता है कि एक बार युधिष्ठिर ने सांसारिक संकटों से मुक्ति के लिये भगवान कृष्ण से उपाय पूछा तो कृष्ण

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रूढ़ीवाद पर कविता

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रूढ़ीवाद पर कविता उन्होंने डाली जयमालाएक-दूसरे के गले मेंहो गए एक-दूसरे केसदा के लिएप्रगतिशील लोगों नेबजाई तालियांहो गए शामिलउनकी खुशी मेंरूढ़ीवादियों नेमुंह बिचकाएनाक चढ़ाईकरते रहे कानाफूसीकरते रहे निंदाअन्तर्जातीय प्रेम-विवाह कीदेते रहे दुहाईपरम्पराओं कीदेखते ही देखतेढह गया किलासड़ी-गलीव्यवस्था का

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कदम-कदम पर कविता

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कदम-कदम पर कविता यहां हैप्रतिस्पर्धाइंसानों मेंएक-दूसरे से।आगे निकलने कीचाहे किसी केसिर पर या गले पररखना पड़े पैर,कोई परहेज़-गुरेज नहीं ।किसी को कुचलने मेंनहीं चाहता कोईसबको साथ लेकरआगे बढ़ना।होती है टांग-खिंचाईरोका जाता हैै।आगे बढ़ने सेडाले जाते हैं अवरोध।लगाया जाता है,एड़ी-चोटी का जोर।एक-दूसरे के खिलाफकदम-कदम पर।।

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विरह पर कविता

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विरह पर कविता प्रेम में पागल चाँद से चकोर प्यार करे ।उम्र भर देखे शशि को उसका हीं दीदार करे । हिज्र एक पल का भी सहा जाये ना उनसे ।आंसुओं के मोती से इश्क का इजहार करे। हर घड़ी हर पल आँखों में चंदा की चंद्रकला ।चाँद को मन में बसाकर बेशुमार प्यार करे।।

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