रत्न चतुर्दश-डॉ एन के सेठी
हिंदी कवितारत्न चतुर्दश मंदराचल को बना मथनी, रस्सी शेष को।देवदनुज सबने मिल करके,मथा नदीश को।।किया अथक प्रयास सभी ने,रहे वहां डटे।करलिया प्राप्त मधुरामृत जब,सभी तभी हटे।। रत्न चतुर्दश निकले उससे, जो परिणाम था।सर्वप्रथम था विष हलाहल, जो ना आम था।।तब पान किया शिव ने उसका,तारा सृष्टि […]
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