हिंदी कविता

उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो

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उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो जिस काम कोतुम्हेंखुद के लिएकरना था,उसे टाल दिया—और अबकिसी और सेउसी कमी कीभरपाई चाहते हो। स्पष्टता,समृद्धि,और जीवन मेंअर्थ लाने कीमूल जिम्मेदारीकेवलतुम्हारी है। कोई औरइसके लिएजन्मा नहीं है। हाँ,कोई चाहे तोसहयोग दे सकता है—स्वेच्छा से।परयह उसका कर्तव्य नहीं। औरयदि वहतुम्हारी अपेक्षाएँन उठाए,तोतुम्हेंठगा हुआमहसूस करने काकोई अधिकार नहीं। सच सरल है—तुम्हारा जीवन,तुम्हारी

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सही कर्म का आनंद

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सही कर्म का आनंद सही विकल्प चुनो,सही निर्णय लो,सही युद्ध लड़ो—अबजीत-हारमहत्वहीन है। क्योंकिजहाँ तुम्हें खड़ा होना था,तुमवहीं खड़े हो। विजयबाहर की ट्रॉफी नहीं,वहभीतर की स्पष्टता है—अपने सबसे सचेतस्वरूप सेमेल। जब निर्णय स्वच्छ हो,जब चयनअंदर से न्यायपूर्ण हो,तो परिणामकेंद्र में नहीं रहता। महत्व बस इतना है—तुमनेपीठ नहीं फेरी। पूरी ताक़त सेजो क्षण माँगे,उसे दो।कुछ बचाकर मत

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कीमती या सिर्फ़ कमज़ोर?

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Valuable or Merely Vulnerable?(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) असुरक्षाकिसी रिश्ते केमूल्य का प्रमाण नहीं,वह सिर्फउसके अस्वस्थ होने कासंकेत है। जब तुमकिसी कोभींचकर पकड़ना चाहते हो,डरते होकि कहीं वह छूट न जाए—वहीं सेअसुरक्षा शुरू होती है। रिश्ताअगर इच्छा पर टिका है,तो वह हिलता रहेगा,क्योंकिइच्छास्वभाव से हीडरपोक होती है। अपने आप से पूछो—क्या तुमकिसी सेलाभ के लिए

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भीतर का प्राचीन युद्ध

हिंदी कविता

भीतर का प्राचीन युद्ध तुम अकेले जन्मे नहीं हो।तुम देह सेजुड़े हुए आए हो—जैसे दो अस्तित्वएक ही गांठ में बँधे हों। आना साथ हुआ,पररास्ता हमेशासाथ नहीं चल सकता। चेतनामुक्ति चाहती है।देहदोहराव मेंसुरक्षा खोजती है। चेतनाउड़ना चाहती है।देहफिर उसी गुफा मेंलौट जाना चाहती है। और फिर भीदोनों कोसाथ रहना है। चेतना बिना देहअभिव्यक्ति नहीं पा सकती।देह

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असंभव ही निमंत्रण है

हिंदी कविता

असंभव ही निमंत्रण है जब करने योग्य मेंपूरा डूबे हो,तोनिराशा के लिएजगह कहाँ बचती है? अगर हर रेशाइस क्षण की माँग मेंलगा है,तोदुख रचने कासमय किसे है? स्थिति जितनीभारी होती है,उतनी हीनाटकीयता कीगुंजाइशघट जाती है। जब शत्रुदो हज़ार गुना हों,तो क्याकोने में बैठकररोने कीफुर्सत मिलती है? कुचली हुई परिस्थितिशोक का निमंत्रण नहीं—वहकर्म का आदेश है।

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इच्छा निवेश करती है, प्यार पोषण करता है।

हिंदी कविता

Desire Invests, Love Nurtures(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अगर कोईतुम्हारे जीवन मेंइसलिए हैकि वहतुम्हारी ज़रूरतें पूरी करे,तो वहाँ प्रेम नहीं—बसआसक्ति है,निर्भरता है,जकड़न है,और धीरे-धीरेपीड़ा है। ज़रूरत पर टिका रिश्ताअहिंसक नहीं हो सकता,वहएक सूक्ष्म हिंसा है—जहाँ देना नहीं,पाना मुख्य लक्ष्य होता है। अधिकतर लोगप्रेम कोइच्छा कासभ्य नाम दे देते हैं।और इच्छाहमेशा निवेश करती है—लाभ के लिए।

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तैयार होने से पहले कूदो

मन और भावनाएँ

तैयार होने से पहले कूदो ताक़तकोई जमा पूँजी नहीं है।वहप्रतिक्रिया है। अधिकांश लोगएक अजीब विश्वास मेंघुटते रहते हैं—कि हम कमज़ोर हैं,असमर्थ हैं,शायद बेकार भी। हम बहुत सी बातों मेंसंदेह करते हैं,पर एक बात मेंअद्भुत रूप सेनिश्चित होते हैं—मेरे पासइतनी शक्ति नहीं है। और इस विश्वास के पक्ष मेंहमारे पासतर्क हैं,स्मृतियाँ हैं,अनुभवों काएक पहाड़ है—जो इसधीमे

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लड़ने योग्य युद्ध

हिंदी कविता

लड़ने योग्य युद्ध सच मानो—ज़िंदगी का बड़ा हिस्साहमनेफालतू लड़ाइयों मेंगँवा दिया। ऐसी चीज़ों परजिन्हें हारने काकोई अर्थ नहीं था,और जीतने काकोई मूल्य नहीं। इसलिएन साहस जगा,न संकल्प,न भीतर कीकोई शक्ति। फिरअचानकएक असली युद्ध सामने आता है—भारी,अर्थपूर्ण,डराने वाला। यहीअनुग्रह है। अनुग्रहआराम बनकर नहीं आता,वहचुनौती बनकर आता है। पुराना तुमकमज़ोर है,भागना चाहता है—“क्यों मुसीबत मोल लूँ?”“क्यों यह

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आधा और आधा एक चौथाई होता है

मन और भावनाएँ

Half and Half Is a Quarter(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अकेलेपन से जन्मे रिश्तेपूरा नहीं करते—वेआधेपन कोसिर्फदूसरे आधे सेढक देते हैं। अधिकतर रिश्तेसम्पूर्णता से नहीं,कमी से शुरू होते हैं। मैं तुम्हें चाहिए,तुम मुझे चाहिए—यह मिलन नहीं,यह समझौता है। मैं तुम्हारी चाह पूरी करूँगा,तुम मेरी।लेन-देन कीइस चुप डील कोहमप्रेम कह देते हैं। और जिस दिनकोईकाम का

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अधूरे वादों का ढेर

हिंदी कविता

अधूरे वादों का ढेर मन मेंजो कुछ भी आता है,एक वादा लेकर आता है। वादा यही होता है—मैं तुम्हें शांति दूँगा। यदि यह वादा न हो,तोवह वस्तु,वह विचार,वह व्यक्तिमन के द्वार तकपहुंच ही नहीं पाता। मन का नियमबहुत स्पष्ट है—जो शांति काआश्वासन नहीं देता,वह भीतरठहर नहीं सकता। इसलिएमन में जो भी है,वहशांति के वादे के

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जीवन के योग्य कर्म

हिंदी कविता

जीवन के योग्य कर्म किसी काम के लिए जियोजिसके लिएमरने का साहसरख सको। यहीतुम्हारा पेशा हो। क्योंकिकामसिर्फ़ रोज़ी नहीं,वहतुम्हारे जीवन कासबसे बड़ा हिस्सा है। जागते समय काअधिकांश भागतुमउसी मेंखपा दोगे। तो पूछो—इस एक जीवन केइतने समय के साथक्या करनासार्थक है? अधिकांश लोगगलत कारणों सेकाम चुन लेते हैं—सुरक्षा,परंपरा,दबाव,संयोग। फिरऊब,कड़वाहट,चिड़चिड़ापनउनका स्वभावबन जाता है। काम की गुणवत्तातनख़्वाह से

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प्यार जो आपको आज़ाद करता है

मन और भावनाएँ

Love That Sets You Free(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) अगर किसी रिश्ते कोपरखना हो,अगर संगति कीगुणवत्ता जाननी हो—तोया तोसच की बात शुरू करो,याफालतू शोरबंद कर दो। खुद से पूछो—क्या यह प्रेम है?तो देखो,उस व्यक्ति की संगतितुम्हारे भीतरक्या जगाती है— उथल-पुथलयाशांति? क्या वहअपनी मौजूदगीमनवाना चाहता है,यातुम्हेंअपने पैरों परखड़ा करना चाहता है? क्या उसके पास रहकरअसुरक्षाऔर अधिकार-बोधबढ़ता

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