हिंदी कविता

यह रासायनिक अस्तित्व

मन और भावनाएँ

यह रासायनिक अस्तित्व एक शब्दकान से टकराता है—औरपूरा शरीरउथल-पुथल में आ जाता है। एक शब्द,औरतापमान बढ़ जाता है।हृदय तेज़ हो जाता है।श्वास बदल जाती है। यह क्या है? यदिरासायनिक प्रतिक्रिया नहीं,तोऔर क्या है? यह देहरसायनों का ढेर है। इसमेंरासायनिक विचार उठते हैं।रासायनिक भाव बहते हैं।रासायनिक इच्छाएँआकर्षित करती हैं।रासायनिक भयसिकोड़ते हैं।रासायनिक महत्वाकांक्षाएँदौड़ाती हैं।रासायनिक प्रेमआसक्ति बन जाता

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डूबे हो या खोए हुए?

हिंदी कविता

डूबना या खो जाना (अतुकांत कविता) जब सार्थक में डूबते हो,तो फालतू बातेंदरवाज़े पर दस्तक देती हैं,पर भीतर कोई नहीं मिलता—वे लौट जाती हैं,अपमानित, उपेक्षित। सार्थक डूबानमन को इतना भर देता हैकि रिक्तता को जगह नहीं मिलती।ध्यान इतना गहरा होता हैकि तुच्छ आकर्षणकेवल मच्छर-सी भनभनाहट बनकर रह जाते हैं। पर सावधान!हर डूबना साधना नहीं होता।कुछ

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ऊष्मा में टूटता प्रेम

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

ऊष्मा में टूटता प्रेम जो प्रेमरसायन की देन हैवह ताप माँगता है,निकटता का दबाव,परिस्थिति की अनुकूलता। थोड़ी-सी गर्मी,थोड़ा-सा आकर्षण,और दो अस्तित्वबंधन में बँध जाते हैं—जैसे हाइड्रोजनऑक्सीजन से मिलकरपानी बन जाए। देखने मेंदोनों विलीन हो गए,कुछ नया जन्मा।पर सत्य यह नहीं। वे गए नहीं,बस छिप गए।परिस्थिति बदली,बंधन टूटा,और दोनोंफिर अपने-अपने नाम सेखड़े हो गए। ऐसा ही

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न जुनून, न दबाव — बस प्रेम

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

न जुनून, न दबाव — बस प्रेम न जुनून की चिंगारी,न दबाव की बेड़ी,काम वहाँ से जन्म लेता हैजहाँ प्रेम चुपचाप बैठा होता है।हम कहते हैं—“पैशन फॉलो करो,”मानो जुनून कोई देवता हो,और विवेक उसका पुजारी।कोई बाज़ार के आगे झुकता है,कोई परिवार के डर से,और कोई अपने जुनून के नाम पर—तीनों अलग दिखते हैं,पर भीतर से

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कल्पना से परे प्रेम

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

कल्पना से परे प्रेम प्रेमकिसी को पकड़ने का नाम नहीं,प्रेम हैपकड़ने की जरूरत सेमुक्त हो जाना। जब सारी उम्मीदेंटूटकर गिर जाती हैं,जब यह साफ दिखने लगता हैकिअचेत मनुष्यों के बीचप्रेम संभव ही नहीं—तभीप्रेम की पहली संभावनाजन्म लेती है। यह समझ आना किजिसे हम प्रेम कहते रहे,वह प्रेम था ही नहीं—यहीजागरण की शुरुआत है। बहुत समय

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उद्यमिता : पेशा नहीं, पुकार

हिंदी कविता

उद्यमिता : पेशा नहीं, पुकार पूछना चाहिए—जीवन क्या है?और किस बात सेवह जीने योग्य बनता है?या फिर उद्यमितासिर्फ़ तनख़्वाह से बड़ेअंकों का खेल है? तो तुम शुरुआत करना चाहते हो—ठीक है।पर पहलेखुद से झूठ बोलना बंद करो।बताओ,तुम वास्तव में क्या चाहते होऔर क्यों? अगर यह सफ़रसिर्फ़ अपनी छवि फुलाने के लिए है,मूल्यांकन के गुब्बारे उड़ाने

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“जैसे हो, वैसे ही रहो?”

मन और भावनाएँ

“जैसे हो, वैसे ही रहो?” गलत के साथ रहने सेअकेला होनाकहीं बेहतर है। पूछो अपने मन से—जो तुम्हारे साथ है,वह तुम्हेंबल दे रहा हैयाधीरे-धीरेकमज़ोर बना रहा है? क्या वहतुम्हें मुक्त करता है,यादेखभाल के नाम परपिंजरे मेंढाल देता है? जो सीमाएँ खींचे,जो उड़ान से डरे,जो कहे—मैं तुम्हारी भलाई चाहता हूँऔर तुम्हेंछोटा बनाए रखे—वह न मित्र है,न

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पवित्र स्वार्थ

हिंदी कविता

पवित्र स्वार्थ सही के पक्ष मेंडटे रहना आसान नहीं होता—ख़ासकर तबजब अपना ही मनअपने ख़िलाफ़ विद्रोह कर दे। हम भीतर जो अव्यवस्था ढोते हैंवह आज की नहीं है।वह हमारे जन्म से पुरानी है,हमारी सोच से गहरी,हमारी परवरिश से भी पहले की।डर, लालच, ईर्ष्या, आसक्ति—ये निजी कमज़ोरियाँ नहीं,विकास की विरासत हैं,हर जीव को मिली हुईअंधेरी विरासत।

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जिसे तुम प्रेम करते हो, वही बन जाते हो

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

जिसे तुम प्रेम करते हो, वही बन जाते हो यदिकीचड़ से प्रेम किया,तोकेंचुआ बनोगे। यदिआकाश से प्रेम किया,तोपंख उगेंगे। झूठा प्रेमढलान है—उस परफिसलने के लिएकुछ करना नहीं पड़ता।इसीलिए कहते हैं—प्रेम में गिरना। गिरनाहमेशाआसान होता है। परसच्चा प्रेमचढ़ाई है। उसके लिएहोश चाहिए,संकल्प चाहिए। वहतुम्हेंजकड़ेगा नहींजब तकतुमस्वयंझुको नहीं। वहशासन नहीं करेगाजब तकतुमस्वेच्छा सेसमर्पण न करो। यही विडंबना

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एक विशाल रसोई — जिसका नाम जीवन है

हिंदी कविता

एक विशाल रसोई — जिसका नाम जीवन है छोटी-छोटी बातें—कैसे जीवन की विशालताखा जाती हैं।आँख में पड़ाधूल का कणसूरज को भीढक देता है। पकाना,पकाना,पकाना।साफ़ करना,साफ़ करना,साफ़ करना।धोना,धोना,धोना।क्या सचमुचइसी के लिएतुम पैदा हुई थीं? तीन बच्चे—एक को जूते चाहिए,एक को अंडरवियर,पति को थर्मल।क्या यहीतुम्हारे अस्तित्व कामहान उद्देश्य है? छोटे के लिए चप्पल,बड़े के लिए बनियान,घर के

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स्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम

प्रेम और रिश्ते, समाज और यथार्थ, हिंदी कविता

स्क्रिप्ट के बाहर घटता प्रेम प्रेमस्वाभाविक नहीं है।स्वाभाविक हैजंगल—सीमा खींचना,कब्ज़ा करना,हार्मोन का शोर। यहीजंगल-प्रेम है—जो सहज आता है,औरआसानी सेहिंसक हो जाता है। सच्चा प्रेमवहाँ शुरू होता हैजहाँजंगल पार किया जाए,जहाँसमाज की सिखाई हुईपरिभाषाएँभुला दी जाएँ। जितना स्पष्टतुमअपनी कंडीशनिंग देखते हो,उतना ही कमदूसरों सेचौंकते हो। हमव्यक्ति नहीं हैं,हमस्क्रिप्ट हैं—प्रशिक्षित,प्रोग्राम किए हुए,पूर्वानुमेय। परक्योंकिहम अपनी हीस्क्रिप्ट नहीं देखते,इसलिएजीवनहमें

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टाई में बँधा जंगल

मन और भावनाएँ

टाई में बँधा जंगल शिक्षा क्या है?रोटी कमाने की तरकीबयाऐसा जीवन गढ़ने की कलाजो जीने योग्य हो? एक बात मेंजानवर हमसे बेहतर रहे—उन्हेंअपने होने का बोझ नहीं ढोना पड़ता।न आत्मचेतना का जाल,न आत्मविनाश की योजनाएँ।वे सीधे हैं,सरल हैं,और अपने जंगल मेंईमानदार हैं। मनुष्य भीएक जानवर ही जन्म लेता है,पर उसे मिलाएक खतरनाक उपहार—ऊपर उठने की

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