सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता
समय और जीवन दर्शन, हिंदी कवितासच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता संस्कारों में जकड़ामनप्रेम कोजान ही नहीं सकता। “मैं तुम्हेंहमेशा प्रेम करूँगा”—अक्सरइसका अर्थ होता है:जब तकतुम मुझेसुख देते रहो। जिसेहम प्रेम कहते हैं,वहअक्सरशर्तों कागठ्ठर होता है—औरवहउसी समय तकज़िंदा रहता हैजब तकपरिस्थितियाँअनुकूल रहती हैं। सुनकरचुभता है न? सदियों सेतारे गवाह रहे हैं—हाथों में हाथ,आँखों में सपने,आवाज़,शरीर,रंग,आकृति सेमोहितलोगों नेअनंतता कीकसम खाई। औरफिरइतना
सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता Read More »
