खुद से प्यार
हिंदी कविताखुद से प्यार सचकोई मुलायम तकिया नहीं होता,वह काँटा है—जो भीतर धँसकरहमें जगाता है। दुनिया को बोलने दो।वे मेरे कपड़ों पर बोलेंगे,मेरी त्वचा पर,मेरी आवाज़ पर।ये सतह की बातें हैं—हवा की तरह आती-जाती। पर जहाँ मेरी असली कीमत रहती है,वहाँ किसी का प्रवेश नहीं।न भीड़ का,न अपनों का।वह जगह पवित्र है,और उसकी रखवालीमुझे खुद करनी
