हिंदी कविता

डर कमजोरी नहीं, संदेश है

हिंदी कविता

डर कमजोरी नहीं, संदेश है डर दुश्मन नहीं है।वह यूँ ही नहीं आता।वह एक संदेश लेकर आता है—यहाँ कुछ अधूरा है। वह बाहर की ओर इशारा नहीं करता,वह भीतर की दरार दिखाता है।जहाँ तुम सत्य में जड़े नहीं हो,जहाँ तुम उधार के सहारों पर खड़े हो। डर कहता है—यहाँ तुम अभी वास्तविक नहीं हो। अगर

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ज़िंदगी ही आईना

समाज और यथार्थ

ज़िंदगी ही आईना हम भागते रहते हैं,इतनी तेज़ी सेकि अपनी ही परछाईंपीछे छूट जाती है। शोर में जीते हुएहमने चुप्पी सेआँख मिलाना छोड़ दिया।क्योंकि चुप्पीसवाल पूछती है। रुको—और देखो,तुम असल में कर क्या रहे हो?किस डर ने तुम्हेंइतना व्यस्त बना रखा है? क्यों अकेलेपन कीहल्की-सी आहटतुम्हें बेचैन कर देती है?क्यों भविष्यउम्मीद और डर के बीचझूलता

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काँपते हाथों से (With Trembling Hands)

हिंदी कविता

काँपते हाथों से (With Trembling Hands) निर्भयताभय का अभाव नहीं है।निर्भयता है—भय के होते हुए भीसही करना। तुम पूछते हो—क्या काँपते हाथसही कर्म कर सकते हैं?हाँ।और उसी मेंएक गहरा आनंद छिपा है। गलत रास्ताअक्सर सहज लगता है।वह तुम्हारी आदतों के साथबहता है।कोई विरोध नहीं,कोई कीमत नहीं। पर सत्य?वह चुनौती देता है।उसकी ओर कदम रखते हीभीतर

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नींद में चलता जीवन

हिंदी कविता

नींद में चलता जीवन कक्षा छठी मेंतुमसे कहा गया—पढ़ो,ताकि घर वालों कोपड़ोस में गर्व मिल सके। इनाम रखे गए—खिलौने,मुस्कानें,तुलनाएँ। फिर कक्षा दस आई—अंकों का डर,भविष्य का शोर। कक्षा बारह—और गहरी थकान,और बड़ा भय। तुम झुके,तुम दौड़े,तुमने रटा—पर कभी नहीं पूछाकि क्यों। अब कहानी बदली नहीं,बस संख्या बदल गई।अंक से तनख़्वाह,तनख़्वाह से पद,पद से प्रोफ़ाइल। लिंक्डइन

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दूर हटने का साहस

हिंदी कविता

दूर हटने का साहस साहस हर चुनौती परतलवार खींच लेना नहीं है।साहस हैयह जान लेनाकौन-सी लड़ाई तुम्हारी हैऔर कौन-सी नहीं। जो लड़ाई तुम्हें परिभाषित करती है,उससे पीछे मत हटो।जहाँ प्रश्न आत्मा का हो,वहाँ समझौता मत करो। पर हर उकसावे परप्रतिक्रिया देनासाहस नहीं है।हर जगह शक्ति दिखानाअपरिपक्वता है। सच्चा शत्रु बाहर नहीं,अंदर है—डर, आदतें,आसक्तियाँ,अहंकार। अधिकतर समस्याएँछलावा

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एकांत ही पहला गुरु है

हिंदी कविता

एकांत ही पहला गुरु है अकेलापनदुश्मन नहीं,पहला गुरु है—पर हमउससे लड़ते रहते हैं। हम अकेले नहीं होते,हम अकेले जन्म लेते हैं।जन्म के साथ हीअलगाव का बीजहममें बो दिया जाता है। शिशु रोता हैभूख से नहीं,दर्द से नहीं—सिर्फ इसलिएकि कोई पास नहीं है।माँ की उपस्थितिदूध से पहलेशांति बन जाती है। यही आदतबड़ी होकरअहंकार बन जाती है—एक

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दूसरा जन्म

मन और भावनाएँ

दूसरा जन्म मनुष्यजन्म से नहीं बनता।मनुष्यबनना पड़ता है। गर्भ से निकलनापर्याप्त नहीं,देह मिल जानामानव होना नहीं है। मानवताकोई जैविक उपहार नहीं,यहएक संभावना है—जिसेजगाना पड़ता है। जन्म के साथहम शुद्ध नहीं आते,हम साथ लाते हैं—अज्ञान,लोभ,वासना,भय,ईर्ष्या। हम इनसे ऊपर नहीं,इन्हीं के भीतरपैदा होते हैं। यदि कुछ नहीं बदला,यदि भीतरक्रांति नहीं हुई,तो जीवनकेवलदेह की पटकथा बन जाता है—भूख

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डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति

हिंदी कविता

डेडलाइन से अनुशासन, अनुशासन से मुक्ति जिस दिनतुम सच में परिपक्व हो जाओगे,डेडलाइनखुद गिर जाएगी।काम होगा—क्योंकि होना है। पर जब तकवह दिन नहीं आया,डेडलाइन सेनफ़रत मत करो।उसे अपनाओ। डेडलाइनदंड नहीं है—आईना है।वह बताती है:अभी भीतरस्पष्टता पूरी नहीं है। ईमानदारी से कहो—“अगर प्रेम होता,तो आदेश की ज़रूरत नहीं पड़ती।” डेडलाइन इसलिए हैक्योंकिबिना उसकेहम टालते हैं,भागते हैं,सोते

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जीवन की सच्ची संगति :अकेलापन

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अकेलापनअकेले होने का नाम नहीं,यह तो भीतर की भीड़ है—जहाँ लोग नहीं,अपने ही विचारकंधे से कंधा मिलाकरखड़े रहते हैं। वह व्यक्ति अकेला हैजो अपने साथठीक नहीं है। उसके भीतरतुलनाएँ हैं,इच्छाएँ हैं,शिकायतें हैं,यादों का शोर है। दुनिया भले सामने हो,पर वहअपने ही दिमाग मेंघिरा हुआ है। अकेलापनखाली मेज़ नहीं,एक भरा हुआ रेस्तराँ है—जहाँ हर थालीबासी है,हर

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पिंजरा बाहर नहीं था

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पिंजरा बाहर नहीं था तुम पक्षी हो।उड़ना तुम्हारा स्वभाव है।उड़ना सीखना नहीं पड़ता—सिर्फ़मुक्त होना पड़ता है। फिर भीहम अजीब हैं। हमदरवाज़ा खोलने के बजायपिंजरे के भीतरपंख फड़फड़ाने काअभ्यास कराते हैं।और उसेआध्यात्मिक साधनाकह देते हैं। यह किसे धोखा देना है? पक्षी कोकिसी प्रशिक्षण कीज़रूरत नहीं।उसे चाहिए—आकाश।खुली जगह। ठीक वैसे हीतुम्हेंकुछ हासिल नहीं करना है।तुम्हेंसिर्फ़जो झूठ हैउसे

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रोज़ की जीत

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रोज़ की जीत महान होनाअतिमानव होना नहीं है।महान होनाअपनी सीमा सेएक क़दम आगे जाना है। जीनायुद्ध में होना है—हर दिन,हर पल। अंतिम विजय परमत अटको।अगर वह आई,तो वहउपहार होगी—लक्ष्य नहीं। असल मायने रखते हैंआज के युद्ध—छोटे,शांत,अदृश्य। रात को सोओयोद्धा बनकर।सुबह उठोयुद्ध जानते हुए। बिना लड़ेकभी मत थको।ईमानदार संघर्ष कीथकान—यही जीत है। दुनिया की तालियाँज़रूरी नहीं।अपनी

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पहले उद्देश्य, बाद में व्यक्ति

हिंदी कविता

पहले उद्देश्य, बाद में व्यक्ति सबसे ज़रूरी प्रेमकिसी और के लिए नहीं,अपने भीतर कीमहानता के लिए होता है—निर्मम, अडिग,समझौतों से मुक्त। आज के समय मेंतुम्हें जीने के लिएकिसी व्यक्ति कीअनिवार्यता नहीं है।अर्थव्यवस्था तुम्हें पाल लेती है,व्यवस्थाएँ तुम्हें बचा लेती हैं,अस्पताल तुम्हें ठीक कर देते हैं,ऐप्स तुम्हारे लिएराशन तक ले आते हैं। तुम कमा सकते हो।तुम

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