प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति की सुंदरता, ऋतुओं के परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सृष्टि के विविध रूपों को दर्शाने वाली कविताएँ इस वर्ग में संकलित हैं।

बदरी – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

प्रकृति और पर्यावरण

इस रचना में बादलों की महिमा का वर्णन मिलता है |
बदरी – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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चल रहा हूँ उस पथ पर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

प्रकृति और पर्यावरण

इस रचना के माध्यम से कवि जीवन को उस दिशा में ले जाना चाहता है जहां उसे उसकी मंजिल मिल सके |
चल रहा हूँ उस पथ पर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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कवि बैरागी की कविता: आशीषों का आँचल

प्रकृति और पर्यावरण

कवि बैरागी की कविता: आशीषों का आँचल कवि बैरागी की कविता: आशीषों का आँचल आशीषों का आँचल भरकर, प्यारे बच्चो लाई हूँ।युग जननी मैं भारत माता, द्वार तुम्हारे आई हूँ। तुम ही मेरे भावी रक्षक, तुम ही मेरी आशा हो।तुम ही मेरे भाग्यविधाता, तुम ही प्राण पिपासा हो। मर्यादा का, त्याग-शील का, पाठ मिला रघुराई

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ऋतुओं का राजा होता ऋतुराज बसंत

प्रकृति और पर्यावरण

ऋतुओं का राजा होता ऋतुराज बसंत ऋतुओं का राजा इस दुनिया में तीन मौसम है सर्दी गर्मी और बरसात।इनमें आते ऋतुएं छह ,चलो करते हैं हम इनकी बात।सभी ऋतुओं का राजा होता , ऋतुराज बसंत।चारों ओर हरियाली फैलाता, चित्त को देता आनंद।।फरवरी कभी मार्च से होता है तुम्हारा आगमन।खेतों में सरसों के फूल , झूमते

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Happy Republic day

भारत गर्वित आज पर्व गणतंत्र हमारा

प्रकृति और पर्यावरण

भारत गर्वित आज पर्व गणतंत्र हमारा धरा हरित नभ श्वेत, सूर्य केसरिया बाना।सज्जित शुभ परिवेश,लगे है सुभग सुहाना।।धरे तिरंगा वेश, प्रकृति सुख स्वर्ग लजाती।पावन भारत देश, सुखद संस्कृति जन भाती।। भारत गर्वित आज,पर्व गणतंत्र हमारा।फहरा ध्वज आकाश,तिरंगा सबसे प्यारा।।केसरिया है उच्च,त्याग की याद दिलाता।आजादी का मूल्य,सदा सबको समझाता।। सिर केसरिया पाग,वीर की शोभा होती।सब कुछ

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स्वामी विवेकानंद

युवाओं के प्रेरणास्रोत- स्वामी विवेकानंद

प्रकृति और पर्यावरण

युवाओं के प्रेरणास्रोत दिव्य सोच साधना से अपनी,पावन ज्ञान का दीप जलाया।सोए लोगों की आत्मा को,स्वामी जी ने पहली बार जगाया।भगवा हिंदुत्व का संदेश सुनाकर,भारत को विश्वगुरु बनाया।तंद्रा में सोई दुनिया के लोगों को,विश्वश्रेष्ठ विवेकपुंज ने जगाया। 11 सितंबर1893 को शिकागो में हिंदुत्व का ध्वज फहराया।संभव की सीमा से परे,असंभव को भी कर दिखलाया।समता,ममता से

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अंकुर-रामनाथ साहू ” ननकी “

प्रकृति और पर्यावरण

अंकुर अंकुर आया बीज में , लेता नव आकार ।एक वृक्ष की पूर्णता , देखे सब संसार ।।देखे सब संसार , समाहित ऊर्जा भारी ।अर्ध खुले हैं नैन , प्रकृति अनुकूलन सारी ।।कह ननकी कवि तुच्छ , प्रगट होने को आतुर ।नई सृष्टि आभास , बीज को देता अंकुर । अंकुर होते हैं खुशी ,

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हरियाली अमावस्या आज

प्रकृति और पर्यावरण

श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। देश के कई भागों विशेषकर उत्तर भारत में इसे एक धार्मिक पर्व के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाया जाता है।

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