प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति की सुंदरता, ऋतुओं के परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सृष्टि के विविध रूपों को दर्शाने वाली कविताएँ इस वर्ग में संकलित हैं।

ये प्लास्टिक अमर है(ye plastic amar hai)

प्रकृति और पर्यावरण,

ये प्लास्टिक अमर है(ye plastic amar hai) ये प्लास्टिक अमर है धरा के लिये जहर है। बन रहा है अब खतरा ,प्रकृति पर ये कहर है। करता है जल प्रदुषितजल रसायन उत्सर्जितहोता है बड़ा जहरीलाअब उत्पादन हो वर्जित जब पेट्रोलियम खपता हैतब जाकर यह बनता है।कभी नहीं यह सड़ता हैभूमि को बंजर करता है । […]

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मनीभाई की भावनाएं

प्रकृति और पर्यावरण

मनीभाई की भावनाएं ●●●●●●●●●●●●हर जगह चुनौतियाँ हैं, क्यूँ ना चुनौतियों से वास्ता करें।ये तो गलत है कि खानाबदोश की तरह हम रास्ता करें।विरोध करें ,कभी विरोध सहें; ये सांसारिक नियति है ।मतभेद होने से रूठके चले जाना ,नहीं कवि प्रकृति है। मनीभाई

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रेंगा प्रतियोगिता : सुख व दुःख जीवन के दो रूप

प्रकृति और पर्यावरण

रेंगा प्रतियोगिता दिनांक : 13 मई 2017 सुख व दुःखजीवन के दो रूपछाँह व धूप □ प्रदीप कुमार दाश दीपकदोनों रहते साथकर्मों के अनुरूप □ मधु सिंघीसच्चे हों कर्मसब तो तेरे हाथफिर क्यों चुप □ मनीलाल पटेलप्रकृति के नियमदुःख के बाद सुख □ गीता पुरोहितहवा ने कहापतझड़ का दुखसहते रहो □ देवेन्द्रनारायण दासइसी ताने बाने

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कोरोना को नहीं बुलाओ

प्रकृति और पर्यावरण

कोरोना को नहीं बुलाओ पटाखों का मोह छोड़कर दीवाली में दीप जलाओ।प्रदूषण फिर से फैलाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। हरसाल दिवाली आयेगी हम सबको यह हर्षायेगी।खुशियों पर पैबंद लगाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। बच्चे, बुजुर्ग और जवान हमारे घर की सभी है शान।डर स्वास्थ्य का फैलाकर कोरोना को नहीं बुलाओ।। मानव जाति पर बन आई

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 3

प्रकृति और पर्यावरण

हाइकु अर्द्धशतक १०१/ विकासशीलजगत का नियमहरेक पल १०२/अनुकूलनअस्तित्व का बचावकर पहल १०३/वातावरणकरता प्रभावितचल संभल १०४/ बच्चों के संगमिल जाती खुशियाँअपरम्पार।   १०५/ जीवन कमसमय फिसलताख्वाब हजार। १०६/ सूक्ष्म शरीरमन की चंचलताचांद के पार। १०७/ सर्वसमतानेकी बदी की छायाहरेक द्वार। १०८/ शहर शोरहो जुदा तू कर लेमौन विहार। १०९/ स्वर्ण बिछौना बिछाये धरा पररवि की रश्मि। ११०/

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Jai Sri Ram kavitabahar

मेरे श्रीराम प्रकृति पूजा / राजकुमार मसखरे

प्रकृति और पर्यावरण

राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। मेरे श्रीराम प्रकृति पूजा / राजकुमार मसखरे ~~~~~~~~~~~~~~~~~ओ मेरे प्रभु वनवासी रामआज पधारे अयोध्या धाम,चौदह वर्ष तक

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प्रकृति का इंसाफ- मोहम्मद अलीम

प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति का इंसाफ 1.उदयाचल से अस्ताचल तक,कैसी ये वीरानी है |उत्तर से दक्षिण तक देखो ,मानव माथ पर परेशानी है || 2. पूरब से चली दनुज पुरवाई ,मानव मानव का नाशक बनकर |खड़ा है द्वारे एक विषाणुसृष्टि में नर पिशाचक बनकर || 3.चीन वुहान का एक विषाणु ,संक्रामक संक्रमण फैलाया है |विश्व स्वास्थ्य संगठन में

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manibhai Navratna

सायली -मनीभाई’नवरत्न’

प्रकृति और पर्यावरण

सायली -मनीभाई’नवरत्न’ चलचित्रसारा आकाशविविध रूप लियेमैं निहारताअपलक।•••••••••••••••••••••••समयबेलगाम साबीत रहा बेपरवाहछोटी होतीजिंदगी।•••••••••••••••••••••••मजदूरजग निर्माताकलयुग का विश्वकर्माकैसा देवता?अभागा।•••••••••••••••••••••••मानवप्रकृति रक्षकभक्षक बन रहालालची बनविडंबना।•••••••••••••••••••••••✒️ मनीभाई’नवरत्न’•••••••••••••••••••••••

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manibhai Navratna

मनीभाई नवरत्न के सेदोका

प्रकृति और पर्यावरण

मनीभाई नवरत्न के सेदोका सेदोका – पंछी की दिशा पंछी की दिशाबता रही है सदाहोने को महानिशा। लौट आओ रेघर से जाने वालोंमंजिल बुला रही।  🖊मनीभाई नवरत्न समुद्री हवा समुद्री हवाएक होके बूंदों सेबारिश की तीरों सेबरस रहीमदमस्त गिरि कोधीरे से घिस रही।  🖊मनीभाई नवरत्न जूते बिखरे हुएकई अकेले जूतेहमसफ़र ढूँढे।पुछता नहींकोई हाल उनकीसाथी न हो

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कोरोना पर कविता “खट्टी-मीटी “

प्रकृति और पर्यावरण

कोरोना पर कविता छीन लिया तूनें रोजी रोटी , सुख-चैन भी छीन लिया ! छीन लिया आँखों की नींद ,भोजन-भजन भी छीन लिया !! बम से भी खतरनाक है तू , तोप तलवार में ऐसा क्षमता नहीं ! कौनसी शक्ति तुझमें है रे ,तेरा रफ्तार  क्यों थमता नहीं !! बेबस हुआ डाक्टर इंनजिनियर, तंत्र- यंत्र

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