समाज और यथार्थ

जंगल की आग – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना के माध्यम से कवि जंगल में आग से होने वाली जन हानि , पर्यावरण एवं पशु हानि की ओर संकेत दे रहा है |
जंगल की आग – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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नवीन कल्पना करो- गोपालसिंह नेपाली

समाज और यथार्थ

नवीन कल्पना करो तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो। तुम कल्पना करो। अब घिस गईं समाज की तमाम नीतियाँ,अब घिस गईं मनुष्य की अतीत रीतियाँ,हैं दे रहीं चुनौतियाँ तुम्हें कुरीतियाँ,निज राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए-तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो। तुम कल्पना करो जंजीर टूटती कभी न अश्रु-धार से,दुख-दर्द दूर भागते नहीं दुलार

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कोरा कागज़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में कवि असमंजस की स्थिति में है | उसे विषय ही नहीं सूझ रहा जिस पर वह अपने विचारों को अपनी कलम के माध्यम से साकार कर सके |
कोरा कागज़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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बेख़याल – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में एक “विक्षिप्त व्यक्ति” को चरित्र के रूप में पेश किया गया है जिन्हें हम पागल कह मरने के लिए छोड़ देते हैं | उसके पागल होने की वजह शायद हम जानना नहीं चाहते |
बेख़याल – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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मुश्किल राहें प्यार की -आर्यन सिंह यादव

समाज और यथार्थ

जब हिन्दी के जाने माने रचनाकार एवं टेलीविजन कलाकार आर्यन को किसी लड़की से एकतरफा प्यार हुआ मगर उस लड़की को मालूम नहीं था तब उन तक कविता के माध्यम से संदेश भेजने के लिए आर्यन सिंह कृष्णवंशी ने छोटी कविता लिखी-

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यह कैसा लोकतंत्र – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस कविता में मानव के अनैतिक व्यवहार का वर्णन मिलता है जिसने उसे मानव से दानव की श्रेणी में ला खड़ा किया है |
यह कैसा लोकतंत्र – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार “अंजुम”

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किस राह – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में वर्तमान सामाजिक परिवेश में मानव की स्थिति को दर्शाया गया है वह स्वयं को असहाय सा महसूस कर रहा है |
किस राह – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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वह अनाथ बालक- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में कवि एक ऐसे बालक को अपनी कविता का पात्र बना रहा है जो अभावों में जीता है साथ ही स्वयं को प्रेरित करता रहता है |
वह अनाथ बालक- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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कवि पंख हुए विस्तृत – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में कवि नए – नए विषयों से स्वयं को अभिभूत महसूस कर रहा है साथ ही समाज में फ़ैल रहे असामाजिक विचारों पर कटाक्ष कर रहा है |
कवि पंख हुए विस्तृत – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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हिंदी संग्रह कविता-नये समाज के लिए

समाज और यथार्थ

नये समाज के लिए नये समाज के लिए नया विधान चाहिए।असंख्य शीश जब कटेस्वदेश-शीश तन सका,अपार रक्त-स्वेद से,नवीन पंथ बन सका।नवीन पंथ पर चलो, न जीर्ण मंद चाल से,नयी दिशा, नये कदम, नया प्रयास चाहिए।विकास की घड़ी में अब,नयी-नयी कलें चलें,वणिक स्वनामधन्य हों,नयी-नयी, मिलें चलें।मगर प्रथम स्वदेश में, सुखी वणिक-समाज से,सुखी मजूर चाहिए, सुखी किसान

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शुभ दीवाली आई है- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस कविता के माध्यम से दीवाली जैसे पावन त्यौहार की गरिमा का वर्णन किया गया है |
शुभ दीवाली आई है- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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करो जो बात फूलों की – कविता

समाज और यथार्थ

इस रचना के माध्यम से जीवन में फूलों के साथ काँटों के साथ जीने के लिए प्रेरित किया गया है और किसी भी स्थिति में न घबराने के लिए और संघर्ष के लिए प्रेरित किया गया है |
करो जो बात फूलों की – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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