समाज और यथार्थ

स्वामी विवेकानंद

युवा वर्ग आगे बढ़ें

समाज और यथार्थ

युवा वर्ग आगे बढ़ें छन्द – मनहरण घनाक्षरी युवा वर्ग आगे बढ़ें,उन्नति की सीढ़ी चढ़ें,नूतन समाज गढ़ें,एकता बनाइये। नूतन विचार लिए,कर्तव्यों का भार लिए,श्रम अंगीकार किए,कदम बढ़ाइए। आँधियाँ हैं सीमा पार,काँधे पे है देश भार,राष्ट्र का करें उद्धार,वक्त पहचानिए। बहकावे में न आयें,शिक्षा श्रम अपनायें,राष्ट्र संपत्ति बचायें,आग न लगाइए। ✍सुश्री गीता उपाध्याय रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

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Happy Republic day

आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ /डॉ.अमित कुमार दवे

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आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ /डॉ.अमित कुमार दवे आओ जन-गण-मन को ऊपर उठाएँ,नित नवीन विचारों की शृंखला बनाएँ।हर चेहरे को फिर… वैसा ही महकाएँ,आओ मिलकर गणतंत्र सफल बनाएँ।।1।। त्याग-संयम-सहयोग सदा हो सहचरऐसी संस्कारित आदर्श पीढ़ी बनाएँ।सदा सामर्थ्य जो निज कांधों में बसाएँआओ! मिलकर गणराज भारत बनाएँ।।2।। प्राचीन राष्ट्रगौरव फिर अर्वाचीन करवाएँ,जीवन्त संस्कृति अब जग में

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फिर कहते हो ये खराब थी

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फिर कहते हो ये खराब थी मोबाइल दिया, आया बनाया, खाना खिलाया होटल में; इंटरनेट पर पहली पीढ़ी सवार थी, फिर कहते हो पीढ़ी खराब थी। बाहें चढ़ाई, दुपहिया दौड़ाया, दुर्घटना घटी बीच बाजार में; पी रखी शराब थी फिर कहते हो सड़क खराब थी। बातें बनाई, दिन बिताया, बेरोजगार हुआ इंतजार में; नशे चिटे

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संस्कार नही मिलता दुकानों में-परमानंद निषाद “प्रिय”

समाज और यथार्थ

संस्कार नही मिलता दुकानों में – परमानंद निषाद “प्रिय” माता-पिता से मिले उपहार।हिंद देश का है यह संस्कार।बुजुर्गो का दर्द समझते नहींनहीं जानते संस्कृति- संस्कार। संस्कार दिये नहीं जाते है।समाज के भ्रष्टाचारों से।संस्कार हमको मिलता है।माता-पिता,घर-परिवार से। बुजुर्गो का सम्मान धर्म हमारा।उनकी सेवा करना कर्म हमारा।संस्कार नही मिलता दुकानों मेंयह मिलता अच्छे संस्कारों में। बुजुर्गो

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एक अकेले मदन मोहन

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एक अकेले मदन मोहन कुछ  लोग होते हैं, जो महान होते हैं, महात्मा कहलाते हैं, कुछ लोग होते हैं, जो पवित्र होते हैं, शुद्धात्मा कहलाते हैं  कुछ लोग होते हैं देवतुल्य, जो देवात्मा कहलाते हैं  पर महामना हैं केवल एक, जहां अनेक में एक पुण्यात्मा हम पाते हैं  न पहले ना बाद में किसी का,

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10 दिसम्बर विश्व मानवाधिकार दिवस पर विशेष लेख

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10 दिसम्बर विश्व मानवाधिकार दिवस रहे सब धर्मों की बस यही पुकार। भेदभाव अंत हो, मिले मानवाधिकार। – मनीभाई नवरत्न प्रत्येक मानव , चाहे वह किसी भी धर्म, लिंग, जाति स्तर या फिर किसी भी देश का हो वह जन्म से बराबर एवं स्वतंत्र है । एक मनुष्य का जीवन तभी सफल है, जब उसे

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विश्व विकलांगता दिवस पर लेख

समाज और यथार्थ,

विकलांगता कोई अभिशाप नहीं है बल्कि विकलांग जिसे अब दिव्यांग कहा जाता है हमारी तरह मनुष्य हैं।

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2 दिसम्बर दासता उन्मूलन दिवस पर लेख

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2 December Slavery Abolition Day

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गुरु नानक-मैथिलीशरण गुप्त

समाज और यथार्थ

गुरु नानक-मैथिलीशरण गुप्त मिल सकता है किसी जाति कोआत्मबोध से ही चैतन्य ;नानक-सा उद्बोधक पाकरहुआ पंचनद पुनरपि धन्य ।साधे सिख गुरुओं ने अपनेदोनों लोक सहज-सज्ञान;वर्त्तमान के साथ सुधी जनकरते हैं भावी का ध्यान ।हुआ उचित ही वेदीकुल मेंप्रथम प्रतिष्टित गुरु का वंश;निश्चय नानक में विशेष थाउसी अकाल पुरुष का अंश;सार्थक था ‘कल्याण’ जनक वह,हुआ तभी

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