समाज और यथार्थ

पिता धर्म निभना अति भारी-बाबू लाल शर्मा

समाज और यथार्थ

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं जिसमे पितृत्व, पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। अनेक देशों में इसे जून के तीसरे रविवार, तथा बाकी देशों में अन्य दिन मनाया जाता है।

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भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन

समाज और यथार्थ

भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन कार्तिक मास शुक्ल सप्तमी को हुआ सहस्त्रबाहु का अवतरण।राजराजेश्वर,कार्तवीर्य,सहस्त्रार्जुन नाम,दशानन आया शरण।महाराज हैहय की दसवीं पीढ़ी में माता पद्मिनी के थे संतान।सुदशेन,चक्रावतार,सप्तद्रवीपाधि,दशग्रीविजयी थे कृतवीर्यनन्दन।1।चंद्रवंशी महाराजा कृतवीर्य के थे परमवीर चक्रवर्ती एकमात्र संतान।दत्तात्रेय से हजार हाथ का वरदान ले मिला सहस्त्रबाहु अर्जुन नाम।विष्णु के 24वें अवतार,है भागवतकथा में इनका वर्णन।लंकापति रावण को हराया,मिला

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लघुकथा कैसे लिखें

समाज और यथार्थ

लघुकथा कैसे लिखें लघुकथा-विधा हिन्दी गद्य साहित्य की ऐसी विधा है, जिसमें कम से कम शब्दों में एक गहरी बात कहना होता है जिसको पढ़ते ही झटके से पाठक मन चिंतन के लिए उद्वेलित हो जाये। राजनैतिक, सामाजिक व पारिवारिक परिवेश में सूक्ष्म से सूक्ष्म विसंगतिपूर्ण मानसिकता को चिंहित कर वास्तविकता के धरातल पर तर्कसंगत

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स्वास्थ्य जीवन है- मनीभाई नवरत्न

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यह कविता 7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना पर विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष ध्यान देकर रचित की गई है।

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जीवन विद्या पर कविता

समाज और यथार्थ

जीवन विद्या पर कविता जीवन रूपी विद्या, होती है सबसे अनमोल ।जानके ये विद्या, तू जीवन के हर भेद खोल।। आया कैसे इस दुनिया में , समझ तू कौन है?इस प्रश्नों के उलझन में, “मनी “क्यों मौन है ?समझ कर इस रहस्य को,जानो अपना रोल।जानके ये विद्या को, तू जीवन के भेद खोल।। स्वयं में

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धनवन्तरि भगवान पर कविता

समाज और यथार्थ

धनवन्तरि भगवान ====================मंथन हुआ समुद्र का, धनवन्तरि भगवान। चौदह रत्नों मे मिले, लिए देव पहचान।। कर मे अमृत कलश था , देव -दनुज मे छोभ। पीने का नहि संवरण, कर पाये वे लोभ।।विश्व मोहिनी हाथ से, अमृत गया परोस। सुर पाये सब भाग्यवश, टूटा असुर भरोस।। अमृत औषधियाँ सभी, धनवन्तरि भगवान। व्याधिनाश हित दे गये,

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शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माण

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डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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प्रशिक्षण लेना हे संगी छत्तीसगढ़ी कविता

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डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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विश्व कविता दिवस – पद्मा साहू

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साहित्य की आत्मा कविता प्रतियोगिता दिवस के लिए हैं। जो 4 से 19 अक्टूबर तक प्रकाशित करने के लिए है साहित्य की आत्मा, कविता होती है निरस कविता साहित्य में स्थान नहीं पा सकता।

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स्वामी विवेकानंद

युवा वर्ग आगे बढ़ें

समाज और यथार्थ

युवा वर्ग आगे बढ़ें छन्द – मनहरण घनाक्षरी  युवा वर्ग आगे बढ़ें, उन्नति की सीढ़ी चढ़ें,       नूतन समाज  गढ़ें,               एकता बनाइये।  नूतन विचार लिए,   कर्तव्यों का भार लिए,         श्रम अंगीकार किए,                    कदम बढ़ाइए। आँधियाँ हैं सीमा

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शिक्षक दीपक बन जले-माधुरी डड़सेना

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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नमन है मेरे गुरुवर -केवरा यदु मीरा

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डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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