कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

तू ही राम है तू रहीम है (Tu hi Ram hai Tu Rahim Hai)

हिंदी कविता

तू ही राम है तू रहीम है (Tu hi Ram hai Tu Rahim Hai) तू ही राम है तू रहीम है, तू करीम कृष्ण खुदा हुआ। तू ही राम है तू रहीम है, तू करीम कृष्ण खुदा हुआ। तू ही वाहे गुरु तू यीशु मसीह, हर नाम में तू समा रहा। तू ही राम है […]

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मुझे पता है – रामनाथ साहू ” ननकी

हिंदी कविता

मुझे पता है – रामनाथ साहू ” ननकी मुझे पता है ,तू मेरा होकर भी मेरा नहीं है । हृदय पटल पर ज्ञात बसेरा नहीं है ।।ये सिर्फ ढोंग ही है ऐ सनम् मेरे ।तुमसे बेहतर कोई लुटेरा नहीं है ।। मुझे पता है ,कभी मिलन संभव नहीं होगा अपना ।ये रिवायतें तोड़ देंगी हर

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शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि – राकेश सक्सेना

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि – राकेश सक्सेना बापू तुम जब चले गये, पीछे बहुत बवाल हुआ।आजादी के बाद देश में, रह रह कर सवाल हुआ।। हे बापू तुमने क्या किया? हे बापू तुमने क्या किया? सूत काता, चरखा चलाया, खादी पहन देशी अपनाया।नमक आंदोलन, डांडी यात्रा, अनशन कर फिरंगी भगाया।। स्वदेशी का आगाज़ कर, विदेशियों

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Happy Republic day

गणतंत्र दिवस – अकिल खान

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

गणतंत्र दिवस – अकिल खान भारत की शान पर हो जाऊंँ कुर्बान,लब पे सदा रहे भारत का गुणगान।देश के संविधान का एसा हुआ था आरंभ, 26जनवरी1950 को गणतंत्र हुआ प्रारंभ। हिंदुस्तान है वीर पराक्रम योद्धाओं से भरा,देख युद्ध कौशल-साहस दुश्मन हम से डरा।बनो नेक इंसान न करो अनर्गल-बहस,मुबारक हो आप सभी को,गणतंत्र दिवस। इस आजादी

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अमर शहीदों पर कविता – महदीप जँघेल

देशभक्ति, हिंदी कविता

अमर शहीदों पर कविता – महदीप जँघेल जिसके दम पर खड़ा है भारत,जिसे पूरा राष्ट्र करे सलाम।भारत के ऐसे अमर शहीदों को,हमारा शत् शत् है प्रणाम। आजादी के लिए खून बहाकर,देते वीर देशभक्ति का पैगाम।राष्ट्र के लिए मर मिटने वाले,अमर शहीदों को सादर प्रणाम। गुलामी का जंजीर तोड़कर,किया राष्ट्र धर्म का काम।वीर सपूतों को जन्म

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सूरज पर कविता – सुकमोती चौहान “रुचि

समाज और यथार्थ

सूरज पर कविता – सुकमोती चौहान “रुचि रवि की शाश्वत किरण – सीसरिता की अनवरत धार – सीलेखनी मेरी चलती रहनाजन-जन की वाणी बनकरमधुर संगीत घोलती रहनाउजड़े जीवन की नीरसता में।छा जाना मधुमास बनकरपतझड़ की वीरानी में। तुम्हें करनी है यात्राजीवन के अवसान तकसाँसों में समाविश्वपटल की शिला परउकेरनी है तुम्हें यथार्थ का चित्र। दीन

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बाल कविता सुन्दर वन में – पद्ममुख पंडा

हिंदी कविता

बाल कविता सुन्दर वन में – पद्ममुख पंडा सुन्दर वन में, एक अजब सा खेल हो गया,टिमकु भालू और चमकी बंदरिया का मेल हो गया।आपस में, दोनों को इतना प्यार हो गया,कि, हमेशा एक दूसरे का मदद गार हो गया। जंगल में इसकी चर्चा खूब चलने लगी,चंपक शेर को यह बात बहुत खलने लगी।चमकी को

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आधुनिकता की आग – पं. शिवम् शर्मा

हिंदी कविता

आधुनिकता की आग – पं. शिवम् शर्मा जरा सी नई धूप क्या लगी सिनेमा जगत की ,जिस्म की जमी पर !नस्ल की फसल बढ़ भी ना पाई की पक गई !! लिवास छोटे – छोटे और छोटे होते ही चले गए !नंगे जिस्म पर पेटिंग रच गई !! कट गए पेड़ कपास के जमी से

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वीर सपूत की दहाड़ – सन्त राम सलाम

हिंदी कविता

वीर सपूत की दहाड़ – सन्त राम सलाम चलते हुए मेरे कदमों को देखकर,जब मुझे पर्वत ने भी ललकारा था।सीना ताने शान से खड़ा हो गया,मैं भी भारत का वीर राज दुलारा था।। मत बताना मुझे अपनी औकात,मैंने पर्वतों के बीच में दहाड़ा था।तेरे जैसे कई पहाड़ी के ऊपर में,कई जानवरों को भी पछाड़ा था।।

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भारत के वीर – पंडित अमित कुमार शर्मा

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भारत के वीर – पंडित अमित कुमार शर्मा उगा है सूरज जो आज खुशियों कालहर रहा तिरंगा जो भारत काचमक उठी है जो सबके चेहरे परये देन है वीर जवानों का। चलते हैं बर्फ परजब हम अपने बिस्तर में होते हैजब हम गाते हैं खुशियों के गीततब दुश्मन को मौत की नींद सुलाते है। सजता

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चूमता तिरंगा आसमान – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी

हिंदी कविता

चूमता तिरंगा आसमान – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी आन बान शान का ,विधान आज देखिये,हो रहा है देश का ,उत्थान आज देखिये।1। अप्सरा भी स्वर्ग से,उतरने को उतावली,धन्य भरत-भूमि की मुस्कान आज देखिये।2। सप्तरंगी परिधान अम्बर को मोह रहा-चूमता तिरंगा आसमान आज देखिये।3। नित्य नव प्रशस्त पन्थ देश-प्राण बढ़ रहा,जिसके हाथ में सजग कमान आज देखिये।4। ऊॅच-नीच,भेदभाव

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सच्चा ज्यूरी – रामनाथ साहू ” ननकी “

हिंदी कविता

सच्चा ज्यूरी – रामनाथ साहू ” ननकी “ दीदार जरूरी है । जगत नियंता प्रिय प्रतिपालक ,मुझसे क्यों दूरी है ।। परम प्रकाशक कण -कण के ,अति अद्भुत नूरी है ।बस आभास करा दो अपना ,अब क्या मगरूरी है ।। काँटों में भी प्यारा अनुभव ,अपनापन तूरी है ।तम भी आनंद प्रदायक हो ,आत्मसात पूरी

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