नये तराने – माधुरी मुस्कान ग़ज़ल
हिंदी कवितानये तराने – माधुरी मुस्कान ग़ज़ल करीब आओ न दूर जाओ मुझे गले से सनम लगा लो।न जी सकेंगे न मर सकेंगे जहाँ भी हो तुम हमे बुला लो ।। अभी अभी तो बहार देखी नये तराने मचल रहे हैंअभी उजालों ने आँख खोली चलो न खुशियों को भी मना लो । मुझे नज़र से
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