नागपंचमी पर हिन्दी कविता

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नागपंचमी पर हिन्दी कविता गीत- उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट नाग पंचमी के अवसर पर, नागों का पूजन कर आएँआस्तीन में नाग छिपे जो, उनसे तो भगवान बचाएँ। मानवता का ओढ़ लबादा, सेवा का जो ढोंग कर रहेजिसको चाहें डस लेते वे, पीड़ित कितना कष्ट अब सहे इच्छाधारी बने आज जो, वे तो हैं सब से टकराएँ

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नाग पंचमी पर कविता – अमृता प्रीतम

हिंदी कविता

नाग पंचमी पर कविता – अमृता प्रीतम मेरा बदन एक पुराना पेड़ है…और तेरा इश्क़ नागवंशी –युगों से मेरे पेड़ कीएक खोह में रहता है। नागों का बसेरा ही पेड़ों का सच हैनहीं तो ये टहनियाँ और बौर-पत्ते –देह का बिखराव होता है… यूँ तो बिखराव भी प्याराअगर पीले दिन झड़ते हैंतो हरे दिन उगते

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संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर कविता जन्म जनवरी दस को इक दिन,राष्ट्र संघ बन जाता है।शांति राह में चलने को ही,अपना कदम बढाता है।। विश्वयुद्ध भड़काने वाले,लालच रख कर डोले थे।साम्राज्य बढ़ाने उत्साहित,दुनिया से भी बोले थे।। गुप्त संधि करके रखते थे,झगड़े खूब बढ़ाने को।मित्र राष्ट्र सब के सब साथी,लड़ने और लड़ाने को।। विश्वयुद्ध दुनिया

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मोर दंता ओ शिरी – तोषण चुरेन्द्र

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मोर दंता ओ शिरी – तोषण चुरेन्द्र मोर दंता ओ शिरी… आरती तोर उतारँवगंगा के पानी धरके ओ दाई तोर चरन ला पखारँवमोर दंता ओ शिरी….. दंतेवाड़ा मा बइठे ओ दाई दंताशिरी सुहायेबड़ सिधवा हम तोरे लइका महतारी तिही कहायेनरिहर बंदन फूल दसमत संग तुहिला मँयहा मनावँवमोर दंता ओ शिरी…… महिमा तोरे बरनी न जाये

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किसान खेत जोतते हुए

किसान पर कविता

हिंदी कविता

किसान पर कविता खेती किसानी पर कविता नांगर बइला पागा खुमरी संगहावय हमरो मितानीहोवत बिहनिया सूरूज जोत संगकरथंन खेती किसानी धरती दाई के सेवा बजाथंवचरण मा मांथ नवावंवरुख राई मोर डोंगरी पहाड़ीबनके मँय इतरावंवकलकल छलकत गंगा जइसनधार हे अरपा के पानीहोवत बिहनिया सूरूज जोत संगकरथंन खेती किसानी हरियर हरियर खेती अउ डोलीलहर लहर लहरावयपड़की परेवना

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मालविका अरुण की कवितायेँ

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मालविका अरुण की कवितायेँ गुरु की महिमा गुरु प्राचीन हैं पर विकास हैंगुरु चेतना हैं, प्रकाश हैंएक महान पद्धति का प्रमाणगुरु, भारतीय संस्कृति का मान हैं। गुरु श्रम हैं, प्रोत्साहन हैंगुरु तप हैं, गुरु त्याग हैंगुरु निष्ठा हैं, विश्वास हैंगुरु हर चेष्टा का परिणाम हैं। गुरु जिज्ञासा हैं, ज्ञान हैंगुरु अनुभव हैं, आदेश हैंगुरु कल्याण,

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शिव – मनहरण घनाक्षरी

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शिव – मनहरण घनाक्षरी उमा कंत शिव भोले, डमरू की तान डोले, भंग संग  भस्म धारी, नाग कंठ हार है। शीश जटा चंद्रछवि, लेख रचे ब्रह्म कवि, गंग का विहार शीश, पुण्य प्राण धार है। नील कंठ  महादेव, शिव शिवा एकमेव, शुभ्र वेष  मृग छाल, शैल ही विहार है। किए काम नाश देह, सृष्टि सार 

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भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि सूत बिहनिया उठके , मय करव अस्नान ।पार्वती ओ मैंइया तोरे हावे मोला धियान ।जइसन पाये तय अपन भोला भगवान।वइसन पावव हरजनम, मय अपन गोसान। लाली चौकी फबेहे, सुग्घर भुइयां भित्ति।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।आसन बिराजे हे, भोलेबाबा पारबती।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि। सोला

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मुहम्मद आसिफ अली के नज़्म

हिंदी कविता

मुहम्मद आसिफ अली के नज़्म अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी हैदिया है हुस्न मौला ने दिखाना भी ज़रूरी है इशारा तो करो मुझको कभी अपनी निगाहों सेअगर है इश्क़ मुझसे तो जताना भी ज़रूरी है अगर कर ले सभी ये काम झगड़ा हो

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आगे हरेली तिहार – रविन्द्र दुबे बाबू

प्रकृति और पर्यावरण

आगे हरेली तिहार झूम झूम के सावन आगे, बादर करिया अमावस ममजा उडाबो,माटी मतियाबो, हरेली पहली तिहारी हे ।। बिहन ले गाँव के टुरा जुड़ गे , नरियर फेकेन जम के, गेड़ी खपायेन टेंग टेंग रेंगेन, झूमत संग संगवारी हे ।। नागर फांद के चीला खवाइश, भूति करे बनिहारिनछत्तीसगढ़ म हरियाली छाए, खेत खार आउ

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रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला रोटी तू भी गजब है, कर दे काला चाम।देश छोड़ के हैं गए, छूटे आँगन धाम।। रोटी तूने कर दिए, घर से बेघर लोग।रोटी ही ईलाज है, रोटी ही है रोग।। रोटी तेरे ही लिए, बेलें पापड़ रोज।मोहताज तेरे सभी , तेरी ही नित खोज।। रोटी सबसे है बड़ी, इससे

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कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता

नारी जीवन और संवेदना

कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता वतन के हिफाजत के लिए त्याग दिये अपने प्राण। तुमनें आह तक नहीं किये त्यागते समय अपने प्राण।। सीने में गोली खा के हो गये देश के लिए शहीद। मुख में था मुस्कान गोली खा के भी बोले जय हिंद।। मेरे वतन के जांबाज सिपाहियों तुमको शत्

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