सूनी सूनी संध्या भोर
हिंदी कवितासूनी सूनी संध्या भोर काली काली लगे चाँदनीचातक करता नवल प्रयोग।बदले बदले मानस लगतेरिश्तों का रीता उपयोग।। हवा चुभे कंटक पथ चलतेनीड़ों मे दम घुटता आजकाँप रहा पीला रथ रवि कासिंहासन देता आवाजझोंपड़ियाँ हैं गीली गीलीइमारतों में सिमटे लोग।बदले…………………।। गगन पथों को भूले नभचर,सागर में स्थिर है जलयानरेलों की सीटी सुनने कोवृद्ध जनों के तरसे […]
सूनी सूनी संध्या भोर Read More »


