कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

mahapurush

पंजाब धरा का सिंह शूर

हिंदी कविता

पंजाब धरा का सिंह शूर विधा-पदपादाकुलक राधेश्यामी छंद पर आधारित गीत। पंजाब धरा का सिंह शूर, फाँसी पर हंसकर झूल गया।बस याद उसे निज वतन रहा,दुनियादारी सब भूल गया। माँ की गोदी का लाल अमर,था गौरव पितु के मस्तक का।उस आँगन देहरी द्वार गली,है नमन तीर्थ के दस्तक का। था सृष्टा का वह अमर दीप, […]

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mahatma gandhi

महात्मा गांधी जी पर कविता

हिंदी कविता

महात्मा गांधी जी पर कविता निडरता थी शान उनकी, निडरता थी पहचान ।ब्रम्हचर्य का जीवन जीयो ,करना है सम्मान ।। सत्य बोलना ,चोरी न करना, यही है उनका मान। एकता ही है नाम उनका, एकता ही है पहचान ।। अहिंसा के पथ पर चलें, और लड़े अंग्रेजो से।देश की आजादी के लिए, न डरे किसी

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dr bhimrao ambedkar

बाबा साहिब सा सूरमा–राकेश राज़ भाटिया

नारी जीवन और संवेदना

बाबा साहिब सा सूरमा -राकेश राज़ भाटिया बदलती रहेगी यह दुनिया, बदलेगा यह दौर ए जहाँ .न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सूरमा .. वो जिसने कक्षा के बाहर बैठकर ज्ञान का दीया जला लिया .वो जिसने अपनी मेहनत से, विद्या का सागर पा लिया .वो जिसने संविधान बनाकर बदल दिया

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भगत सिंह पर कविता

हिंदी कविता

भगत सिंह पर कविता 28 सितंबर सन् 1907 को भारत की धरती पर, एक लाल ने जन्म लिया । माता विद्यापति की आंखों का तारा , पिता का अरमान था । दादी ने उसका ‘भागो’ रखा नाम था, फौलादी थी बाहें उसकी । जिसके सिर पर केसरिया बाना था , दूर फिरंगी को करने का

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प्राकृतिक आपदा पर कविता

हिंदी कविता

प्राकृतिक आपदा अति मानव वाचालता के कारण आती है और क्या क्या मानव पर प्रभाव डालती है? इस रचना में जानिए।

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mahatma gandhi

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर कविता

हिंदी कविता

“बापू” ( राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर कविता ) सत्य अहिंसा के तुम ही पहरेदार हो बापू,आजादी दिलाने वाले बड़े सरदार हो बापू। हर बच्चा तुम्हें दिन रात याद करता है,हर इंसा तुम्हारा ही गुणगान करता है।सच्ची श्रद्धा से ही मिलती है सफलता,हर इस कामयाबी का बखान करता है।आजादी दिलाने के सही हकदार हो बापू। देश

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छीन लिए सब गड़े दफीने

हिंदी कविता

छीन लिए सब गड़े दफीने धरा गाल हँसते हम देखे,जल कूपों मय चूनर धानी।घाव धरा तन फटी बिवाईमानस अधम सोच क्यूँ ठानी।। शस्य श्यामला कहते जिसकोपैंड पैंड पर पेड़ तलाईशेर दहाड़ें, चीतल हाथीजंगल थी मंगल तरुणाई ग्रहण लगा या नजर किसी की,नूर गये माँ लगे रुहानीधरा गाल हँसते ……….।। वसुधा को माता कह कह करछीन

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संस्कारों की करते खेती

समाज और यथार्थ

संस्कारों की करते खेती बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नहीं खोता।जन्म जात बातें जन सीखे,वस्त्र कुल्हाड़ी से कब धोता। संस्कृति अपनी गौरवशाली,संस्कारों की करते खेती।क्यों हम उनकी नकल उतारें,जिनकी संस्कृति अभी पिछेती।जब जब अपने फसल पकी थी,पश्चिम रहा खेत ही बोता।बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नही खोता। देश हमारा

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एक खनकता गीत मेरा

हिंदी कविता

एक खनकता गीत मेरा पास बैठो और सुनो बसएक खनकता गीत मेरा।। जीवन समर बहुत है मुश्किल,बाधाओं की हाट लगी है।दुनिया रंग बिरंगी लेकिन,होती देखी नहीं सगी है।इसीलिए गाता अफसाने,रूठ गया क्यों मीत मेरा।एक खनकता गीत मेरा।। मैं तो सच्चे मन का सेवक,खूब समझता पीर पराई।लेकिन दुनिया, दुनिया वाले,सबने मेरी पीर बढ़ाई।मैं भी भूलूँ इस

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मुझको गीत सिखा देना

हिंदी कविता

मुझको गीत सिखा देना कोयल जैसी बोली वाले,मुझको गीत सिखा देना। शब्द शब्द को कैसे ढूँढू,कैसे भाव सँजोने हैं।कैसे बोल अंतरा रखना,मुखड़े सभी सलोने हैं।शब्द मात्रिका भाव तान लय,आशय मीत सिखा देना।कोयल जैसी बोली वाले,मुझको गीत सिखा देना। मन के भाव मलीन रहे तब,किसे छंद में रस आए।राग बिगड़ते देश धर्म पथ,कहाँ गीत में लय

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तब मैं भी चाहूँ प्यार करूँ

हिंदी कविता

तब मैं भी चाहूँ प्यार करूँ मन में शुभ भाव उमड़ते हों,तब मैं भी चाहूँ,प्यार करूँ। जब रिमझिम वर्षा आती हों,ज्यों गीता ज्ञान सुनाती हो।खिड़की से तान मिलाती हो,मुझको मानो उकसाती हो।श्वेद संग वर्षा में गाऊं,मै,भी जब कुछ श्रम साध्य करूं।मात का उज्जवल भाल सजे,तब मैं भी चाहूँ प्यार करूँ।। भाती है दिल आलिंगन सी,स्वर

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