कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

भारत छोडो आन्दोलन

भारत छोड़ो आंदोलन के वीर

हिंदी कविता

भारत की आजादी में भारत छोड़ो आंदोलन का अहम योगदान रहा है, इस आंदोलन का गुणगान कविता के माध्यम से किया गया है।

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सुमन! अल्प मधुर तेरा जीवन

हिंदी कविता

सुमन! अल्प मधुर तेरा जीवन सुमन! अल्प मधुर तेरा जीवन।याद रहेगा      इस जग      को,कण-कण घुलना सौरभ बन-बन। कितने अलियों ने अभिसिक्त किया,मधुर समीरण  सहलाया  दुलराया।देकर मिलता है           जग    में,मरकर   अमरता का ये अभिनन्दन। मुझको ये जग  विस्मृत  कर  देगा,मिट जाएगा                  मेरा नाम।नहीं दे पाई      में       इस जग को,सुमन- सुतन का      तुझसा  दान। देना चाहूं     इस

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बचपन की यादें -साधना मिश्रा

हिंदी कविता

बचपन की यादें -साधना मिश्रा वो वृक्षों के झूले वो अल्हड़ अठखेलियां।वो तालाबों का पानी वो बचपन की नादानियां। वो सखाओं संग मस्ती वो हसीं वादियां।वो कंचा कंकड़ खेलना वो लड़ना झगड़ना। वो छोटा सा आंगन वो बारिश का पानी।वो कागज की नाव वो दादी की कहानी। याद आती मुझे वो मीठी शरारतें।वो खुशदिल तबस्सुम

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पिरामिड रचना (शबरी ) -साधना मिश्रा

हिंदी कविता

पिरामिड रचना (शबरी ) हैं,बेर,नहीं ये;स्नेह नीर,अश्रु- बिंदु हैं;समर्पित तुम्हें,हे श्री रघुनन्दन! दी,ज्ञान,गुरु ने,परिचय,पाया पावन;तृषित पिपासा,पाऊं तेरा दर्शन!यूं,झुकी,कमर,विरहिणी;अंतर तम,आतुर मिलन,हे श्यामल बदन! ये,देखो,थकित,विगलित,अविचलित;चिर प्रतिक्षित,अपलक नयन! की,मैंने,करुण,प्रतीक्षा है;अब तो आओ,निष्ठुर बनो न,हे, स्नेह सदन! दो,रज,चरण,सुचि कणकृपा सुमन;मेरे मस्तक हो,हे, पतित पावन! साधना मिश्रा, रायगढ़- छत्तीसगढ़

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भगत सिंह की याद में

हिंदी कविता

भगत सिंह की याद में टपक टपक के आंसुओं का दरिया बन गयासितम गम का, समा भी गमगीन हो गया। खामोशी बिखरी ,मुर्दों पर ढकी कफ़न लिएपर कदम ना थके ना हिम्मत हारी वतन के लिए। बढ़ते चले ,इंकलाब कहते चले ,अंग्रेजो की बर्बादी लिएभारत भूमि में जन्मे, भगत सिंह दुश्मनों से हमें बचाने के

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उसे रूह में समाया है

हिंदी कविता

रूह में समाया है माना के उसके जिस्म को भी मैंने चाहा हैमगर उस से ज्यादा उसे रूह में समाया है l ये सावन उसको भुलाने नहीं देता मुझकोबारिश में उसकी यादों के लम्हे ले आया है l जब चाँद की चांदनी में निकलता हूँ घर सेमेरा साया भी लगता मुझे उसका साया है l

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छत्तीसगढ़ दर्शन

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ दर्शन टिकली अस बलरामपुर ,जिंहा सुग्घर ताता पानी।सूरजपुर म कुदरगढ़ी हे,कोरिया ले हसदो पानी। नागलोक जशपुर कुनकुरी,सीताबेंगरा सजे सरगुजा।जामवंत पेंड्रा मरवाही ,कोरबा म कोईला दूजा। कबरा गूफा रायगढ़ वाला,जांजगीर म दमउदहरा।बिलासा माई के बिलासपुर,मुंगेली मदकु दीप हे गहरा। कूशियार अस मीठ कवर्धा,गिधवा ह उड़थे बेमेतरा,चलौ बलौदा गुरु धाम ए,महासमुंद नदी के धारा। राजधानी हे

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भगत सिंह का पुकार

हिंदी कविता

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह जी का कार्य व देश के लिए योगदान का उल्लेख कविता के माध्यम से किया गया है।

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NATURE

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन- विभा श्रीवास्तव

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन किलकारियाँ, खिलखिलाहट, अठखेलियाँ हवा के संग ….हमे बहुत याद आता है।बादलो का गर्जना ,बिजलियों का कड़कना ,और इन्द्रधनुष के रंग….हमे भी डराता और हसाता है। तितलियों का उड़ना ,भौरो का गुनगुनाना ,ये सब …..तुम्हे भी तो भाता है।सब कुछ था,है ,पर…..रहेगा या नही ,ये नही पता…, बरसो से खड़े रहकर

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क्यों जाति की बात करें

हिंदी कविता,

क्यों जाति की बात करें(१६,१६) जब जगत तरक्की करता हो,देश तभी उन्नति करता है।जब मानव सहज विकास करे,क्यों जाति द्वेष की बात करें। जाति धर्म मे पैदा होना,मनुजों की वश की बात नहीं,फिर जाति वर्ग की बात करेंयह सच्ची अच्छी बात नहीं। माना जो पहले बीत गया,कुछ कर्मी वर्ग अवस्था थी,नवयुग मे नया प्रभात करें,क्यों

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