कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

पहले से समृद्ध — बस भूल गए

हिंदी कविता

पहले से समृद्ध — बस भूल गए तुम्हेंयह सिखाया गया हैकि संपन्नताकुछ पाने से आती है। दौड़ो।जोड़ो।दिखाओ।थामे रहो। धन,संपत्ति,डिग्रियाँ,रिश्ते,प्रतिष्ठा,अनुभव—सबदुनिया से उधार। औरजो दुनिया देती है,वहछीन भी सकती है। जिस प्रतिष्ठा परतुम टिके हो,वहकिसी और कीमान्यता है। आज मिली,कल बदल गई। तुम्हारी छविदूसरों के मन में है—औरमनरातों-रातपलट जाते हैं। धीरे-धीरेतुमजो जोड़ते हो,उसी परनिर्भर होने लगते हो।

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स्वतंत्रता की कीमत से मत डरो

हिंदी कविता

स्वतंत्रता की कीमत से मत डरो स्वतंत्रतासंभव है। जीवन कोउदासी काएकरस गीतबने रहने कीकोई मजबूरी नहीं। वहआनंद कीएक सजीवसिंफ़नी बन सकता है—यदितुम यह मानने कासाहस रखो। अपने भीतर उठने वालीछोटी आवाज़ों के आगेइतनी जल्दीसमर्पण मत करो। वे फुसफुसाएँगी—तुम कौन होस्वतंत्रता चाहने वाले?तुम तोएक साधारण,छोटे से प्राणी हो। मत सुनो। सिर्फ़ इस कारण सेकि तुमसचेत हो—तुम्हेंस्वतंत्र

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नया रास्ता नहीं, नई आँखें

हिंदी कविता

नया रास्ता नहीं, नई आँखें यदि जीवन एक यात्रा है,तो हम सब चल रहे हैं। पर अधिकतरअँधेरे में चल रहे हैं—आँखों परपट्टी बाँधकर। दुनिया नेचलना सिखा दिया,पर यह नहीं बतायाकिकिधर चलना है,औरक्यों चलना है। विडंबना तो यह है—हम रास्ता ढूँढने की बात करते हैं,जबकिहमें यह भी स्पष्ट नहींकियात्री कौन है। बुद्धिकोई नया मार्ग नहीं बनाती।वहतुम्हारे

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दुनिया उसी को हिलाती है, जो हिलने योग्य होता है

हिंदी कविता

दुनिया उसी को हिलाती है, जो हिलने योग्य होता है यदि तुम स्वयं कोहिलने योग्य मानते हो,तोसब कुछतुम्हें हिला देगा। एक छोटी-सी टिप्पणी,एक मामूली बदलाव,एक तुच्छ घटना—हर चीज़तुम्हारे केंद्र तकपहुंच जाएगी। पर यदि तुमस्वयं कोअडिग मान लो,तो देखो—दुनिया वही रहती है,लोग वही रहते हैं,परउनकी शक्तिखत्म हो जाती है। यदि तुमखुद को छोटा समझते हो,तोसब कुछविशाल

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जंजीर नहीं, पंख दो

हिंदी कविता

जंजीर नहीं, पंख दो यदि प्रेम है,तो बाँधो मत।यदि प्रेम है,तो हल्का करो। जो रिश्तातुम्हारे जीवन मेंनई बेड़ियाँ जोड़ दे,वह प्रेम नहीं—एक जाल है।फूलों और इत्र मेंलिपटा हुआ पिंजरा। ईमानदारी से देखो—इस संबंध कासार क्या है? अपने आप से पूछो—यह व्यक्तितुम्हें क्या देता है? गुलाबयापुस्तकें? भोगयादृष्टि? आनंदयासमझ? उत्तरइतना भीछुपा हुआ नहीं। चेतना कामूल अभिशाप है—देह

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पिंजरा खिलाता है, आकाश मुक्त करता है

हिंदी कविता

पिंजरा खिलाता है, आकाश मुक्त करता है हमस्वतंत्रता के गीत गाते हैं।उसकी पूजा करते हैं।उसके सपने देखते हैं। लेकिनजब स्वतंत्रतावास्तव मेंदरवाज़ा खटखटाती है—तोहमदरवाज़ा बंद कर लेते हैं। क्यों? क्योंकिपिंजराखिलाता है। वहरोटी देता है।सुरक्षा देता है।आश्वासन देता है। वह कहता है—यहीं रहो।छोटे बने रहो।मैं सब सँभाल लूँगा। और स्वतंत्रता? स्वतंत्रताकोई वादा नहीं करती। वह कहती है—अब

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तुम अकेले जन्मे नहीं हो

हिंदी कविता

तुम अकेले जन्मे नहीं हो तुम अकेले पैदा नहीं हुए।देहतुम्हारे साथ ही आई। एक ही क्षण,एक ही जन्म—फिर भीदोनों का स्वभावएक नहीं। चेतनामुक्ति चाहती है।देहपुरानी आदतों मेंसुरक्षा खोजती है। दोनोंएक ही पते पररहने को विवश हैं। देह के बिनाचेतना काकोई मंच नहीं।चेतना के बिनादेहसिर्फ़एक निर्जीव ढांचा है। परएक छत के नीचे रहनासमानता नहीं होता। किसी

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छोटे को नज़रअंदाज़ करो

हिंदी कविता

छोटे को नज़रअंदाज़ करो मैं उसे सबक सिखाऊँगा।मैं उसे तोड़ दूँगी।उसने अपमान किया—सुना तुमने?वह व्यंग्य था या नहीं?इशारा था या दुर्घटना?मैं गलत ठहराई गई—या नहीं? रुको। अपने ऊपरथोड़ी दया करो। इन छोटे युद्धों सेखुद को बचाओ।ये लड़ाइयाँतुम्हारी ऊर्जा खा जाती हैं,तुम्हारे घंटे निगल जाती हैं,तुम्हारी चेतना कोटुकड़ों में बाँट देती हैं—और बदले मेंकुछ भी नहीं

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मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है

हिंदी कविता

मिट्टी खोदो, हीरा वहीं है तुम जहाँ हो,वहीं सेरास्ता खुलेगा। किसी नए स्थान,किसी नए व्यक्ति,किसी नई परिस्थिति कीज़रूरत नहीं। जो सामने है—उसी सेशुरुआत करो। यदि ऊब है,तो ऊब से भागो मत।उसे देखो।उसी मेंप्रवेश-द्वार छुपा है। यदि आसक्ति है,तो उसे न ढको,न उचित ठहराओ।वह तुम्हें दिखाएगीतुम्हारी निर्भरता,तुम्हारा भ्रम। यदि क्रोध हैया भय—तो वहीमार्ग है। उन्हें दबाने

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ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो

हिंदी कविता

ध्यान नहीं बदला, तो टीवी ही देख लो जो ध्यानजीवन को न बदले,वह ध्यान नहीं—मन को सुलाने कीएक आदत भर है। आँखें बंद करनाध्यान नहीं है।यदि आँखें खुलने परज़िंदगी वैसी ही रहे,तो भीतरकुछ भी नहीं जागा। सच्चा ध्यानजीवन के केंद्र तकपहुँचता है—और वहाँहस्तक्षेप करता है। वहतोड़ता हैपुरानी सुविधाओं को,उधेड़ता हैझूठी पहचान को,औरनए ढंग सेजीने की

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शोर नहीं, सत्य को याद रखो

हिंदी कविता

शोर नहीं, सत्य को याद रखो सब कुछजो याद है,याद रखने योग्य नहीं। अतीत का बड़ा हिस्साज्ञान नहीं—शोर है। उसे छोड़ दो।शांतिअपने आपउभर आएगी। जो कुछतुम जानते हो,वह भीसब जानने योग्य नहीं। काफी कुछउधार है,अप्रासंगिक है,मृत बोझ है। उसे गिरने दो—और देखोतुमकितने हल्के हो जाते हो। जो कुछतुम्हारे पास है,उसकामालिक मत बनो—उसेसेवक रहने दो। तबविनम्रतास्वाभाविक

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बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार

हिंदी कविता

Outer Knowledge, Inner Darkness(बाहरी ज्ञान, भीतरी अंधकार)(एक लम्बी, विचारप्रद, सत्यनिष्ठ अतुकांत कविता) अठारह साल,या पच्चीस साल—तुमने पढ़ा क्या? भाषाएँ,इतिहास,राजनीति,भूगोल,अर्थशास्त्र। सूत्र, समीकरण,मानचित्र, तिथियाँ—जानकारियों की बाढ़। पर एक असहज प्रश्न है—क्या तुमअंग्रेज़ी भाषा हो?या फ्रेंच व्याकरण? क्या तुमरासायनिक समीकरण हो?या त्रिकोणमिति का सिद्धांत? क्या तुमपाठ्यपुस्तक में छपीनदियाँ और हिमनद हो?क्या तुमअलेक्ज़ेंडर हो,या अशोक? क्या तुमहार्डवेयर हो?या कोड?

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