कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

आती है खुशियां थोक में

हिंदी कविता

आती है खुशियां थोक में आती है खुशी थोक में,तेरे आने से ।झरती है मोती लब में, मुस्कुराने से ।यह असर है तेरी दोस्ती काजो दी है तुमने मुझे, तुमसे दिल लगाने से ।।इंतजार रहता है तेरा, मुझे सांसो से ज्यादा ।भूलूं कैसे तुमसे की हुई हर वादा ।कब छुपी है यह प्यार लाख छुपाने […]

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फिर कहते हो ये खराब थी

समाज और यथार्थ

फिर कहते हो ये खराब थी मोबाइल दिया, आया बनाया, खाना खिलाया होटल में; इंटरनेट पर पहली पीढ़ी सवार थी, फिर कहते हो पीढ़ी खराब थी। बाहें चढ़ाई, दुपहिया दौड़ाया, दुर्घटना घटी बीच बाजार में; पी रखी शराब थी फिर कहते हो सड़क खराब थी। बातें बनाई, दिन बिताया, बेरोजगार हुआ इंतजार में; नशे चिटे

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हाइकु

शीत/ठंड पर हाइकु

हिंदी कविता

शीत/ठंड पर हाइकु [1]शीत प्रदेशबरस रही चाँदीधूप बीमार । [2]शीत लहरकँपकपाते होंठहँसे धुनियाँ । [3]बैरन शीतप्रीतम परदेशखुशियाँ सुन्न । [4]मुस्काती धुँधसूरज असहायजीवन ठप्प । [5]ठण्ड में धूपदेती गरमाहटज्यों माँ की गोद । अशोक दीप✍️जयपुर

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महामारी से भी मिला उपहार-समय के सदुपयोग की कला और जीवन शैली में सुधार।

समय और जीवन दर्शन

महामारी से भी मिला उपहार-समय के सदुपयोग की कला और जीवन शैली में सुधार। कोरोना जैसी महामारी फैली,बदल गई, जीवन की शैली।।समय का इसने सदुपयोग सिखाया,जीने का नया ढंग समसाझा। आज मैं नौरा छतवाल,आई हूँ,इस मंच पर कुछ विचारों का आदान-प्रदान करने, इस वैषविक महामारी का कुछ बखान करनें। काफी कुछ इस महामारी ने हमसे

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कैसे कहदूँ प्यार नहीं है ?

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कैसे कहदूँ प्यार नहीं है ? कैसे कहदूँ प्यार नहीं है ?वह मेरी झंकार नहीं है ? बिन बाती क्या दीप जला है ?कहीं रेत बिन बीज फला है ?कैसा सागर नदी नहीं तोजलद कहाँ जो धार नहीं है ? कैसे कहदूँ ……………… देखा विधु को बिना जुन्हाई ?प्रीत बिना खिलती तरुणाई ?शुष्क मरुस्थल-सा है

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जाने कैसी बात चली है

हिंदी कविता

जाने कैसी बात चली है जाने कैसी बात चली है।सहमी-सहमी बाग़ कली है।। जिन्दा होती तो आ जातीशायद बुलबुल आग जली है। दुख का सूरज पीड़ा तोड़ेसुख की मीठी रात ढली है।। नींद कहाँ बसती आँखों मेंजब से घर बुनियाद हिली है।। महक उठा आँगन खुशियों सेजब-जब माँ की बात चली है ।। अशोक दीप

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घर के कितने मालिक -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

घर के कितने मालिक वाह भाई !मैंने ईंटें लाई ।सीमेंट ,बालू , कांक्रीट, छड़और पसीने के पानी सेखड़ा कर लियाअपना खुद का घर।बता रहा हूँ सबकोमैं असल मालिक। ये “मैं और मेरा “मेरे होते हैं सोने के पहले।जैसे ही आयेगी झपकी।आयेंगे इस घर केऔर भी मालिकबिखेरेंगे कुतरेंगे सामान ।वही जिसे मैं कहता थाएन्टीक पीस।बताता था

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जय जवान जय किसान

हे मेहनतकशों इन्हें पहचान /राजकुमार मसखरे

हिंदी कविता

हे मेहनतकशों इन्हें पहचान /राजकुमार मसखरे कितने राजनेताओं के सुपुत्रसरहद में जाने बना जवान !कितने नेता हैं करते किसानीये सुन तुम न होना हैरान !बस फेकने, हाँकने में माहिरजनता को भिड़ाने में महान ! भाषण में राशन देने वालेयही तो है असली शैतान !किसान के ही अधिकतर बेटेसुरक्षा में लगे हैं बंदूक तान !और खेतों

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सपना हुआ न अपना

हिंदी कविता

सपना हुआ न अपना बचपन में जो सपने देखे, हो न सके वो पूरे,मन को समझाया, देखा कि, सबके रहे अधूरे!उडूं गगन में पंछी बनकर, चहकूं वन कानन में,गीत सुरीले गा गा   कर, आनन्द मनाऊं मन में!मां ने कहा, सुनो, बेटा, तुम, चाहो अगर पनपनानहीं, व्यर्थ के सपने देखो, सपना हुआ न अपना सुना पिताजी

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प्रेम में पागल हो गया

हिंदी कविता

प्रेम में पागल हो गया रूप देख मन हुआ प्रभावित,हृदय घायल हो गया।सुंदरी क्या कहूं मैं,तेरे प्रेम में पागल हो गया। भूल गया स्वयं को,नयनों में बसी छवि तेरी।हृदयाकांक्षा एक रह गई,बाहों में तू हो मेरी। नर शरीर मैंने त्याग दिया,जीवन की आशा है तू ही तू।तेरे प्रेम की कविता,तेरे प्रेम की ग़ज़ल लिखूं। कवि

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Jai Sri Ram kavitabahar

मेरा मन लगा रामराज पाने को /मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। मेरा मन लगा रामराज पाने को / मनीभाई नवरत्न मेरा मन लागा रामराज पाने को । मेरा

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मैं उड़ता पतंग मुझे खींचे कोई डोर

हिंदी कविता

मैं उड़ता पतंग मुझे खींचे कोई डोर मैं उड़ता पतंग ….मुझे खींचे कोई डोर।तेरी ही ओर।।मेरा टूट न जाए धागा।भागा ….भागा…भागा ….मैं खुद से भागा।जागा.. जागा….जागा.. कभी सोया कभी जागा ।कुछ ख्वाहिशें हैं ,कुछ बंदिशें हैं।पग-पग में देखो साजिशें है ।जिसने जो चाहा है कब वो पाया है ।पल पल में तो मुश्किलें है ।यह

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