कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

निषादराज के दोहे

हिंदी कविता

*निषादराज के दोहे (1) संसारकितना प्यारा देख लो,ये अपना संसार।स्वर्ग बराबर हैं लगे,गाँव-शहर वनद्वार।। (2) समयसमय बड़ा अनमोल है,कीमत समझो यार।समय बीत जब जायगा,फँसो नहीं मझधार।। (3) गतिअपनी गति में काम को,करना अच्छा यार।तभी सफलता हैं मिले,उन्नति  घर संसार।। (4) जीवनजीवन की इस राह पर,चलना कदम सम्हाल।आगे   पीछे   देखना, रहे  न  कोई   काल।। (5) मनमन […]

निषादराज के दोहे Read More »

village based Poem

मेरे गांव का बरगद – नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

मेरे गांव का बरगद  मेरे गाँव का बरगदआज भी वैसे ही खड़ा हैजैसे बचपन में देखा करता थाजब से मैंने होश संभाला हैअविचलवैसे ही पाया है हम बचपन में उनकी लटों से झूला करते थेउनकी मोटी-मोटी शाखाओंके इर्द-गिर्द छुप जाया करते थेधूप हो या बारिशउसके नीचेघर-सानिश्चिंत होते थे  तब हम लड़खड़ाते थेअब खड़े हो गएतब हम बच्चे थेअब बड़े हो गएतब हम तुतलाते

मेरे गांव का बरगद – नरेन्द्र कुमार कुलमित्र Read More »

जीवन रुपी रेलगाड़ी – सावित्री मिश्रा

हिंदी कविता

जीवन रुपी रेलगाड़ी कभी लगता है जीवन एक खेल है,कभी लगता है जीवन एक जेल है।पर  मुझे लगता है कि ये जीवनदो पटरियों पर दौड़ती रेल है।भगवान ने जीवन रुपी रेल काजितनी साँसों का टिकट दिया है,उससे आगे किसी ने सफर नहीं कियासुख और दुख जीवन की दो पटरियाँ,शरीर के अंग जीवन रुपी रेल के

जीवन रुपी रेलगाड़ी – सावित्री मिश्रा Read More »

तुम्हारे होने का अहसास

हिंदी कविता

तुम्हारे होने का अहसास तुम आसपास नहीं होतेमगर आसपास होते हैंतम्हारे होने का अहसासमन -मस्तिष्क में संचिततुम्हारी आवाजतुम्हारी छविअक़्सरहूबहूवैसी-हीबाहर सुनाई देती हैदिखाई देती हैतत्क्षणतुम्हारे होने के अहसास से भर जाता हूँधड़क जाता हूँकई बार खिड़की के पर्दे हटाकरबाहर देखने लग जाता हूँयह सच है कि तुम नहीं होतेपरपलभर के लिएतुम्हारे होने जैसा लग जाता हैलोगों ने बतायायह अमूमन सब के

तुम्हारे होने का अहसास Read More »

हाइकु

सुकमोती चौहान के हाइकु

हिंदी कविता

सुकमोती चौहान के हाइकु पितर पाख~पति की तस्वीर मेंफूलों की माला। पूस की रात~भुट्टे भून रही हैअलाव में माँ। श्मशान घाट~कुत्ते के भौंकने सेसहमा रामू। श्रृंगार पेटी~गौरैया नोंचे देखशीशा में छवि। गौरैया झुँड़चुग रहे हैं दाने~धूप सुगंध। पीपल पातखा रही बकरियाँ~वृक ताक में। गौ टीले पर~शेरनी के मुँह मेंबछड़ा ग्रीवा। मयूर नृत्य~मोबाइल देखतेबच्चों की टोली।

सुकमोती चौहान के हाइकु Read More »

बेटी की पुकार

नारी जीवन और संवेदना

      बेटी की पुकार पिता का मैं ख्याल रखूंगीतेरे कहे अनुसार मैं चलूंगीरूखी सूखी ही मैं खा लूंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे धरा पर आने तो दे।।बोझ मैं तुमपर नहीं बनूंगीपढ़ लिख कर बड़ा बनूंगीतेरा मैं नाम रोशन करुंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे  धरा पर आने तो दे।।खिलती हुई नन्ही कली

बेटी की पुकार Read More »

संकल्प कविता

हिंदी कविता

संकल्प मेरी अंजुरी में भरे,जुगनू से चमकते,कुछ अक्षर हैं!जो अकुलाते हैं,छटपटाते हैं!सकुचाते हुए कहते हैं-एकाग्र चित्त होकर,अब ध्यान धरो!भीतर की शांति सेकोलाहल कम करो!अंतर के तम को मिटाकर,दिव्य प्रकाश भरो!झंझोड़ कर जगाओ,सोयी हुई मानवता को,भटकते राहगीरों कोसही दिशा दिखाओ!बुद्धत्व का बोध करोकुछ करो,कुछ तो करो!शब्दों की चुभन से,सचेत,सजग हुई मैं,फिर लिया संकल्प!कुछ करना होगा! कुछ

संकल्प कविता Read More »

हिन्दी हमारी शान – भुवन बिष्ट

हिंदी कविता

हिन्दी हमारी शान हिन्दी न केवल बोली भाषा,                         ये हमारी शान है।मातृभाषा  है  हमारी,                           ये बड़ी महान है।।…….. चमकते तारे आसमां के ,                       

हिन्दी हमारी शान – भुवन बिष्ट Read More »

मुझे अभी नहीं सोना है

मन और भावनाएँ

मुझे अभी नहीं सोना है मुझे अभी नहीं सोना है। जब तक थक कर चूर न हो जाऊँ, भावनाओं का बोझ ढोना है। मुझे अभी नहीं सोना है। ख्वाब जब तक न हों पूरे, मैंने ही बंदिशें लगायीं खुद पेख्वाब देखने पर।। घटाटोप अँधेरा परये झींगुर के शोरकहते हैं कुछ तो । शायद बुझाने को कहतेआँखों के दीये। पर इन कूप्पियों में

मुझे अभी नहीं सोना है Read More »

प्रश्न है अब आन का-प्रवीण त्रिपाठी

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

प्रश्न है अब आन का हर  प्रगति  के  मूल में  स्थान  है  विज्ञान का।खोज करता नित्य जो उपयोग करके ज्ञान का।1 रात दिन वो जूझते भारत कभी पीछे न हो।देश जे हित काम करके ध्यान रखते मान का।2 टोलियाँ वैज्ञानिकों की खोज करतीं नित नयी।राष्ट्र करता है प्रशंसा उनके नए अवदान का।3 भूलकर परिवार जो

प्रश्न है अब आन का-प्रवीण त्रिपाठी Read More »

प्रसन्न रहे मेरी मां भारती -रश्मिअग्निहोत्री

हिंदी कविता

प्रसन्न रहे मेरी मां भारती हे गणपति ! गणराज, गणनायक,विघ्नहर्ता वरदाता, मंगल दायक।अष्ट  सिद्धि, नव  निधि  के दाता, आए शरण, राखो लाज विधाता। हे  शंकर  सु्वन,  भवानी  नंदन,रिद्धि  देना  और  सिद्धि   देना।कोमल बुद्धि देना हर सकू संताप जगत के आप मुझे प्रसिद्धि देना। मोह  माया  से  चित को दूर रखूं ,प्रभु  मुझको  ऐसी  शक्ति  देना।कुटुंबियों पर स्नेह

प्रसन्न रहे मेरी मां भारती -रश्मिअग्निहोत्री Read More »

इतिहास बनाना आदत है -रश्मि अग्निहोत्री

हिंदी कविता

इतिहास बनाना आदत है इतिहास   बनाना  आदत  है,परिश्रम इसरो की इबादत है!संकल्प  और  गहरा  हुआ है,दो कदम पर मंजिल अपनी है! क्योंकि, चंद्रयान 2 सफल है,हर  हिंदुस्तानी  के  दिल  में!बचपन से  चांद  को देखा है,अब पाने की हसरत जागी है! “रश्मि “क्योंकि  चंद्र की  दूरी, चंद्रयान २ से ज्यादा दूर नहीं! फिर हौसलों की उड़ान भरेंगे,जो न

इतिहास बनाना आदत है -रश्मि अग्निहोत्री Read More »

Scroll to Top