सरस्वती -वन्दना
Uncategorizedसरस्वती -वन्दना जनप्रिय माँ जनोपकारणीजग जननी, जल जीवधारणी।स्वर्णिम ,श्वेत, धवल साडी़ मेंचंचल, चपल,चकोर चक्षुचारणी। ज्ञानवान सारा जग करती माँअंधकार, अज्ञान सदैव हारणीविद्या से करती,जग जगमगगुह्यज्ञान,गेय,गीत, गायनी। सर्व सुसज्जित श्रेष्ठ साधना सुन्दरहर्षित, हंस-वाहिनी,वीणा वादिनीकर कृपा,करूणा, कृपाल,कब कैसे,पल में हीरक—रूप– प्रदायिनी। मूर्त ममतामय,ममगात मालती,जब भटके,तम में माँ तुम्ही संवारिणी,कितने कठिन, कष्ट कलुषित झेले माँ,मार्ग प्रकाशित करदे माँ,मोक्षदायिनी।


