कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

गणेश चतुर्थी पर कविता

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक […]

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रमजान प्रेम-मुहब्बत का महीना

हिंदी कविता

मुस्लिम भाइयों का रमजान पवित्र मास है। इन दिनों वे एक महीने का रोजा अर्थात् उपवास रखते हैं। फरिश्ता जिब्रील के द्वारा भगवान ने जो संदेश तेईस वर्षों में पैगम्बर मोहम्मद साहब के पास भेजा था, वही पैगाम उन्होंने जगत् को दिया। हजरत जिब्रील जिस संदेश को लाए थे उसका नाम कुरान शरीफ है। रमजान

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किसान दिवस पर कविता (23 दिसम्बर)

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

तुझे कुछ और भी दूँ ! रामअवतार त्यागी तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ, देश की धरती तुझे कुछ और भी दूँ! माँ! तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन किंतु इतना कर रहा फिर भी निवेदन, थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब स्वीकार कर लेना दयाकर वह समर्पण! गान अर्पित, प्राण

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atal bihari bajpei

कारगिल विजय दिवस पर कविता (16 दिसम्बर)

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

आज सिंधु में ज्वार उठा है आज सिंधु में ज्वार उठा है, नगपति फिर ललकार उठा है, कुरुक्षेत्र के कण-कण से फिर, पांचजन्य हुंकार उठा है। शत-शत आघातों को सहकर, जीवित हिंदुस्तान हमारा, जग के मस्तक पर रोली-सा, शोभित हिंदुस्तान हमारा । दुनिया का इतिहास पूछता, रोम कहाँ, यूनान कहाँ है ? घर-घर में शुभ

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राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता (19 नवम्बर)

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

हम सब भारतवासी हैं निरंकारदेव ‘सेवक’ हम पंजाबी, हम गुजराती, बंगाली, मदरासी हैं, लेकिन हम इन सबसे पहले केवल भारतवासी हैं। हम सब भारतवासी है ! हमें प्यार आपस में करना, पुरखों ने सिखलाया है, हमें देश-हित, जीना मरना पुरखों ने सिखलाया है। हम उनके बतलाये पथ पर, चलने के अभ्यासी हैं। हम बच्चे अपने

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जवाहरलाल नेहरू

बाल-दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, समाज और यथार्थ,

बाल-दिवस पर कविता आ गया बच्चों का त्योहार/ विनोदचंद्र पांडेय ‘विनोद’ सभी में छाई नयी उमंग, खुशी की उठने लगी तरंग, हो रहे हम आनन्द-विभोर, समाया मन में हर्ष अपार ! आ गया बच्चों का त्योहार ! करें चाचा नेहरू की याद, जिन्होंने किया देश आजाद, बढ़ाया हम सबका, सम्मान, शांति की देकर नयी पुकार

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गरीबी उन्मूलन दिवस पर कविता (17 अक्टूबर)

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

गरीबी उन्मूलन दिवस पर कविता गरीबी से संग्राम आचार्य मायाराम ‘पतंग’ चलो साथियों! हम सेवा के काम करें। आज गरीबी से जमकर संग्राम करें। यह न समझना हमें गरीबी थोड़ी दूर हटानी है। अपने आँगन से बुहारकर नहीं पराए लानी है। एक शहर से नहीं उठाकर दूजे गाँव बसानी है। करें इरादा भारतभर से इसकी

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cycle

चालान- धनेश्वर पटेल

हिंदी कविता

चालान एक दिन निकले हम सैर परतो हेलमेट लगाना भूल गएहुआ हादसा कुछ ऐसा किफटफटिया चलाना भूल गए!स्पीड बढ़ी कांटा लटका दूसरी छोरहम समझ थे अपने बाप की रोड़बुलेट घुमाई और मुड़े घर की ओरट्रैफिक पुलिस खड़ी थी दूसरी ओरउनकी नजरों ने हमें देखाइन सहमी नजरों ने उन्हें देखादेख भागते जोर की सीटी बजाईपकड़े तो

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मुस्कुराकर चल मुसाफिर / गोपालदास “नीरज”

हिंदी कविता

मुस्कुराकर चल मुसाफिर / गोपालदास “नीरज” पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर! वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें?हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें?वह प्रगति भी क्या जिसे कुछ रंगिनी कलियाँ तितलियाँ,मुस्कुराकर गुनगुनाकर ध्येय-पथ, मंजिल भुला दें?जिन्दगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है,आँधियों में,

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खुदा ने अता की जिन्दगी -अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

हिंदी कविता

खुदा ने अता की जिन्दगी खुदा ने अता की जिन्दगी तुझेमुहब्बत के लिए क्यूं कर बैठा तू दूसरों से नफरतअपने अहम् के लिए खुदा ने अता की जिन्दगी तुझेएक अदद इंसानियत के लिए ऊंच – नीच के बवंडर में उलझ गया तूताउम्र भर के लिए खुदा ने अता की जिन्दगीआशिक़ी के लिए तू मुहब्बत का

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पहला सुख निरोगी काया

नारी जीवन और संवेदना

पहला सुख निरोगी काया पहला सुख निरोगी काया,दूजा सुख घर में हो माया। तीजा सुख कुलवंती नारी,चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी। पंचम सुख स्वदेश में वासा,छठवा सुख राज हो पासा। सातवा सुख संतोषी जीवन ,ऐसा हो तो धन्य हो जीवन।

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गुस्से पर कविता

हिंदी कविता

गुस्से पर कविता कौन है जिसको गुस्सा आता नहीं,कौन है जो गुस्से को दबाता नहीं! जिंदगी में जिसने ना गुस्सा किया,देवता है पर खुद को बताता नहीं! जो स्वयं गुस्सा अपनी दबा लेता है,वो सच में किसी को सताता नहीं! गुस्से से हानि-हानि केवल हानि है,बिन विकारों के ये फिर जाता नहीं! जीवन में हंसना

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