KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
Browsing Tag

@भाद्रपद शुक्ल तृतीया हरितालिका तीज पर हिंदी कविता

भाद्रपद शुक्ल तृतीया हरितालिका तीज : भाद्रपद शुक्ल तृतीया भारतीय पंचांग  के अनुसार छठवें माह की तृतीय तिथि है, वर्षान्त में अभी २०७ तिथियाँ अवशिष्ट हैं।

आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न

आगे आगे तीजा तिहार आगे - मनीभाई नवरत्न भाद्रपद शुक्ल तृतीया हरितालिका तीज Bhadrapad Shukla Tritiya Haritalika Teej ऐ भैय्या गा,  ऐ बहिनी ओ।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। सावन भादों सुख के देवय्या।झमाझम बादर चले पुरवय्या।।डारा पाना ह सबो हरियागे।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। झूलेना बने हे सुग्घर पटनी।धरे रहव जी दवरा के गठनी।ठेठरी खुरमी अउ…
Read More...

तीज पर कविता – चौपाई छंद

तीज पर कविता - चौपाई छंद _बाबूलालशर्मा,विज्ञ_ भाद्रपद शुक्ल तृतीया हरितालिका तीज Bhadrapad Shukla Tritiya Haritalika Teej वर्षा ऋतु सावन सुखदाई।रिमझिम मेघ संग पुरवाई।।मेह अमा हरियाली लाए।तीज पर्व झूले हरषाए।।झूले पटली तरुवर डाली।नेह डोर सखियाँ दे ताली।।लगे मेंहदी मने सिँजारा।घेवर संग लहरिया प्यारा।।झूला झूले नारि कुमारी।गाए गीत…
Read More...

भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि

सूत बिहनिया उठके , मय करव अस्नान ।पार्वती ओ मैंइया तोरे हावे मोला धियान ।जइसन पाये तय अपन भोला भगवान।वइसन पावव हरजनम, मय अपन गोसान। लाली चौकी फबेहे, सुग्घर भुइयां भित्ति।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।आसन बिराजे हे, भोलेबाबा पारबती।भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि। सोला सिंगार करव, बरत राखव निरजला।सवनाही गीत गावव, झूलव मय हर झूला।हरियर…
Read More...

हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स

हरितालिका तीज!(घनाक्षरी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष, पावन तृतीया तिथि,पूजन निर्जला ब्रत,रखें नारी देश के! माता रूप मोहनी सी, श्रृँगारित सोहनी सी,उम्र यश लंबी माँगे,अपने प्राणेश के! दृढ़वती धर्मधारी, सुहागिन या कुँवारी,वर लेती यदि मानें, ग्रंथों के आदेश के! मुदित मधुर मन, शिव गौरी आराधना,श्रद्धा लिये वत्स कल, पूजा फिर गणेश के! --राजेश…
Read More...

तीजा तिहार पर आधारित लोकगीत -माधुरी डडसेना

तीजा तिहार पर आधारित लोकगीत  ठेठरी खुरमी धर के दीदी,तीजा मनाये बर आहे जी।गंहू के गुलगुल भजिया धरके,डोकरी दाई बर लाथे जी।।  दाई ददा के मयारू ह, बेटी बनके आहे जी।बालपन के संगी जहूंरिया, डेरउठी म रद्दा निहारे जी।। बारा बजे गिंजर गिंजर के, करुभात झेलावत है जी।होत बिहिनिया सजसंवर के,लुगरा ले बर जावत हे जी।। …
Read More...