कुण्डलियाँ छंद [विषम मात्रिक]

कुण्डलियाँ छंद दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येकचरण में 24 मात्राएँ होती है।

स्वार्थी मत बन बावरे काम करो निःस्वार्थ- रामनाथ साहू ननकी के कुंडलियाँ

विविध छंदबद्ध काव्य, हिंदी कविता

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विश्व मलेरिया दिवस पर कविता /राजकिशोर धिरही

दिन विशेष कविता

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