August 2019

धारा तीन सौ सत्तर पैतींस ए -डाँ. आदेश कुमार पंकज

हिंदी कविता

 धारा तीन सौ सत्तर पैतींस ए  सत्तर सालों में अब कोई नया उजाला लाया है । छप्पन इंची के सीने ने ही साहस दिखलाया है ।। बच्चों को बंदूकें देकर जहर घोलते फिरते थे । केसर की क्यारी जो जन आग लगाते फिरते थे ।। ऐसे सब गद्दारों को उनके घर में दफनाया है । […]

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अटल जी की स्मृति में कविता – बाके बिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

अटल जी की स्मृति में कविता  नाम अटल था, काम अटल था,,जीवन भर विश्वास अटल था, साथ अटल सामर्थ्य अटल था,,,जीवन का सिद्धांत अटल था,,याद करे उस महामानव को,,आज हुई नम आँख हमारी,,नाम था जिनका अटल बिहारी ।।नाम था जिनका,,,,,,,,,,,समर अटल श्मशान अटल था ,,उनका हल अरमान अटल था,,भेष अटल था,द्वेष अटल था,,शांति का संदेश अटल

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भारत वतन मिले -केवरा यदु”मीरा”

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भारत वतन मिले हे प्रभू धरा पर  जब जब जनम मिले।भारत वतन मिले भारत वतन मिले। राम कृष्ण गौतम गांधी का है देश।घर घर में हो रामायण गीता का  हो संदेश।सूर मीरा तुलसी  कबीरा   मिले।       भारत वतन—— गूँजे वेद की   श्रृचाएं मंदिर  की घंटियाँ।उतुंग  हिमालय   की  है ऊँची  चोटियाँ।गंगा यमुना  गोदावरी की संगम

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मिट्टी से प्यार करो अनुच्छेद370 – केतन साहू खेतिहर

हिंदी कविता

मिट्टी से प्यार करो अनुच्छेद370 देखो जरा उन चेहरों को जो,दुश्मन की बोली बोल रहे हैं…अलगाव-वाद फैलाने वाले,*क्यूँ जहर फिजा में घोल रहे हैं.. जब देश समूचा झूम रहा है,फिर ये क्यूँ बौखलाए हुए हैं…भोली जनता को डसने वाले,*वे फन अपना फैलाए हुए हैं.. एक देश और एक ही झंडा,लहराएगें हर जगह तिरंगा…जो अमन चैन

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जीवन तेरा बस नाम है-नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’

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जीवन तेरा बस नाम है युद्ध है संग्राम है जीवन तेरा बस नाम हैदेख मैं हैरान हूँ , तू फ़िर भी क्यों बदनाम हैतूने धारा त्याग को ,तेरी कामना निष्काम हैदेख मैं हैरान हूँ , तू फ़िर भी क्यों बदनाम हैयुद्ध है संग्राम है…… बनके बेटी जन्मीं थी तू , तू थी खुशियाँ तू बहारपर

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गोली एल्बेंडाजॉल – (मधु गुप्ता “महक”)

हिंदी कविता

   गोली एल्बेंडाजॉल आओ बच्चों तुम्हें सुनाए,            एक कहानी काम की।ध्यान पूर्वक सुनना इसको,             बात छिपी है राज की। स्वाति नाम की लड़की थी इक,         पंचम मे वह पढ़ती थी।नंगे पाँव खेलती हरदम,           शौच खुले में करती थी।

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समर शेष है रुको नहीं

हिंदी कविता

समर शेष है रुको नहीं समर शेष है रुको नहींअब करो जीत की तैयारीआने वाले भारत कीबाधाएँ होंगी खंडित सारी, राजद्रोह की बात करे जोउसे मसल कर रख देनादेश भक्ति का हो मशाल जोउसे शीश पर धर लेना, रुको नहीं तुम झुको नहींअब मानवता की है बारीसुस्त पड़े थे शीर्ष पहरुएजन मानस दण्डित सारी, कालचक्र

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भारत सब से न्यारा दुलारा

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भारत सब से न्यारा दुलारा भारत तु जग से न्यारा, सब से तु है दुलारा,मस्तक तुझे झुकाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।। सन सैंतालिस मास अगस्त था, तारिख पन्द्रह प्यारी,आज़ादी जब हमें मिली थी, भोर अज़ब वो न्यारी।चारों तरफ खुशी थी, छायी हुई हँसी थी,ये पर्व हम मनाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।। आज़ादी के नभ का

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दहेज दानव

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दहेज दानव ये दहेज दानव हजारों कन्याएं खा गया।ये बदलता माहौल भी रंग दिखा  गया।। हर  रोज  अखबारों  में  ये   समाचार  है,ससुराल  जाने  से  कन्या  का इंकार  है,क्यों नवविवाहितों को स्टोव जला गया।। बिकने  को  तैयार  लड़के हर  तरह  से,मांगें  मोटर  कार   अड़के  हर  तरह  से,हर  नौजवान अपना  मोल लिखा  गया।। चाहिए  माल  साथ  में 

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पुलिस मेरे शहर की

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पुलिस मेरे शहर की अपनी पर  आ  जाए तोमुर्दों से भी उगलवाती हैजटिल से जटिल मामलायूं मिनटों में  निपटाती हैपुलिस मेरे शहर की|| सुस्ती और लापरवाही मेंकितने  मामले  दबाती हैचाय – पानी  के  बगैर  येमहीनों  भर  लटकाती  हैपुलिस मेरे शहर की|| मामला   कुछ   और  होएउसे और कुछ ही बनाती हैसीधे -साधे मामलों को भीबे वजह

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नहीं लेता सीख इंसान इनसे जाने क्‍यों?

हिंदी कविता

नहीं लेता सीख इंसान इनसे जाने क्‍यों? एक क्‍यारी मेंअनेक हैं पेड़-पौधेअलग-अलग हैंजिनकी नस्‍लअलग-अलग हैं गुणअलग-अलग हैं रंग-रूपफिर भीनहीं करते नफरतएक-दूसरे सेनहीं है इनमेंभेदभाव की भावनानहीं मानते किसी कोछोटा या बड़ानहीं है इनमें रंग-भेद हवा की धुन परथिरकते हैं सबएक लय मेंएक ताल मेंखिल जाते हैंसबके चेहरेबरसात मेंकितना है सदभावनहीं लेता सीखइंसान इनसेजाने क्‍यों? -विनोद

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कमाल का हुनर- विनोद सिल्ला

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कमाल का हुनर कमाल का हुनररखती हैं पूरे परिवार का ख्याल सभी परिजनों की पसंद-नापसंदका ख्याल सबकी इच्छा-अनिच्छा का ख्याल इतना सुनियोजित प्रबन्धन कमाल का हुनररखती हैं गृहिणियाँइनके हुनर कासमूचा मूल्यांकन अभी बाकी है   -विनोद सिल्ला© विनोद सिल्‍ला 771/14, गीता कॉलोनी, नज. धर्मशालाडांगरा रोड़, टोहानाजिला फतेहाबाद  (हरियाणा)पिन कोड 125120संपर्क +919728398500  इस पोस्ट को like करें (function(d,e,s){if(d.getElementById(“likebtn_wjs”))return;a=d.createElement(e);m=d.getElementsByTagName(e)[0];a.async=1;a.id=”likebtn_wjs”;a.src=s;m.parentNode.insertBefore(a, m)})(document,”script”,”//w.likebtn.com/js/w/widget.js”);कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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