#राजेश पाण्डेय अब्र

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर0 राजेश पाण्डेय अब्र के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

ख़यालों पर कविता

ख़यालों पर कविता तुम मेरे ख़यालों में होते होमैं ख़ुशनसीब होता हूँबात चलती है तुम्हारी जहाँमैं ज़िक्र में होता हूँ . पलकें बंद होती नहीं रातों कोयादों को तुम्हारी आदत हैरातों की सियाही कटती नहींमैं फ़िक़्र में होता हूँ. क़तरा – क़तरा सुकूँ ज़िन्दगी मेंजमा होता है, यक-ब-यक नहींलुट जाता है ये सब अचानकमैं हिज़्र …

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भोर गीत-राजेश पाण्डेय वत्स

भोर गीत ये सुबह की सुहानी हवाये प्रभात का परचम।प्रकृति देती है ये पलरोज रोज हरदम।। आहट रवि किरणों कीसजा भोर का गुलशन।कर हवाओं संग सैरभर ले अपना दामन।। उठ साधक जाग अभीदिन मिले थे चार।बीते न ये कीमती पलखो न जाये बहार।। कदम बढ़ा न ठहर अभीमंजिल आसमान में।स्वर्ग बना धरा को औरराम नाम …

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HINDI KAVITA || हिंदी कविता

कलयुग के पापी -राजेश पान्डेय वत्स

कलयुग के पापी भूखी नजर कलयुग के पापीअसंख्य आँखों में आँसू ले आई! लालची नजर *सूर्पनखा* कीइतिहास में नाक कटा आई!! मैली नजर *जयंत काग* केनयन एक ही बच पाई!!! बिना नजर के *सूरदास* को*कृष्ण-लीला* पड़ी दिखाई!! नजर में श्रद्धा *मीरा* भरकरतभी गले विष उतार पाई!! तीसरी नजर *शिवशंम्भु* की*कामदेव* को पड़ी न दिखाई!! तकती …

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मोर मया के माटी-राजेश पान्डेय वत्स

मोर मया के माटी छत्तीसगढ़ के माटीअऊ ओकर धुर्रा। तीन करोड़ मनखेसब्बौ ओकर टुरी टुरा।।  धान के बटकी कहाय,छत्तीसगढ़ महतारी। अड़बड़ भाग हमर संगीजन्में येकरेच दुआरी।।  एकर तरपांव धोवय बरआइन पैरी अरपा। महानदी गंगा जईसनखेत म भरथे करपा।।  मया के बोली सुनबे सुघ्घरछत्तीसगढ़ म जब आबे। अही म जनमबे वत्स तैं, मनखे तन जब पाबे।।  —-राजेश …

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सहज योग तुम कर लेना-राजेश पाण्डेय *अब्र*

सहज योग तुम कर लेना तम की एक अरूप शिला परतुमको कुछ गढ़ते जाना हैभाग्य नहीं अब कर्म से अपनेराह में कुछ मढ़ते जाना है, चरण चूमते जाएँगे सबतुम कर्म की राह पकड़ लेनाभाग्य प्रबल होता है अक्सरइस बात को तुम झुठला देना, संकट काट मिटाकर पीड़ालक्ष्य विजय तुम कर लेनाभाग्य नहीं वीरों की कुंजीसबल …

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घर वापसी- राजेश पाण्डेय वत्स

घर वापसी नित नित शाम को, सूरज पश्चिम जाता है। श्रम पथ का जातक फिर अपने घर आता है।  भूल जाते हैं बातें थकान और तनाव की ,अपने को जब जबपरिवार के बीच पाता है।  पंछियों की तरह चहकतेघर का हर सदस्य,घर का छत भी तब अम्बर नजर आता है।  कल्प-वृक्ष की ठंडकता भी फीकी सी लगने लगे शीतल पानी का गिलासजब …

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भक्ति पर कविता

भक्ति पर कविता तोरन पुष्प सजाय केउत्सव माँ के द्वार!!! गीत सुरीले गूँजते,लटके बन्दनवार!!!! नाम अनेको दे दिए,माई जग में एक!!! नामित ब्रम्हाचारिणी,कर लेंना अभिषेक!! परम सुखी परिवार होमाँग भक्ति के भीख!!! चरण धूलि माथे लगावत्स भजन ले सीख!!! –राजेश पान्डेय वत्सकविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

प्रीत के रंग में-राजेश पाण्डेय *अब्र*

प्रीत के रंग में गुनगुनाती हैं हवाएँमहमहाती हैं फ़िजाएँझूम उठता है गगन फिरखुश हुई हैं हर दिशाएँ                  प्रीत के रंग में                  मीत के संग में, रुत बदलती है यहाँ फिरफूल खिल उठते अचानकगीत बसते हैं लबों परमीत मिल जाते …

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है नमन देश की माटी को -राजेश पाण्डेय अब्र

है नमन देश की माटी को विश्वजीत है स्वंत तिरंगा तीन रंगों की अमृत गंगासरफ़रोश होता हर जन मन मत लेना तुम इससे पंगा, ऊर्ज समाहित सैन्य बलों में जन,  धन लेकर खड़े पलों मेंऊर्जा  का  संचार  देश  मेंप्रश्न खड़े अनुत्तरित हलों में, सबल करे नेतृत्व देश का अभिमानी हो नहीं द्वेष कावक़्त पड़े सर कलम …

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जीवन के दोहों का संकलन

जीवन के दोहों का संकलन 1- है मलीन चादर चढ़ी, अंतः चेतन अंग। समझे तब कैसे भला, हूँ मैं कौन मलंग।। 2- प्रतिसंवेदक कॄष्ण हैं, लिया पार्थ संज्ञान। साध्य विषय समझे तभी, हुआ विजय अभियान।। 3- मैं अनुनादी उम्र भर, अविचारी थे काज। जिस दिन प्रज्ञा लौ जली, समझे तब यह राज।। (मैं – अहंकार) …

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