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स्वर्ण की सीढ़ी चढी है – बाबू लाल शर्मा
गुलमोहर है गुनगुुनाता – बाबू लाल शर्मा
इक शिखण्डी चाहिए – बाबू लाल शर्मा
प्रीत शेष है मीत धरा पर
किसान की पहचान
आज पंछी मौन सारे
भगत सिंह हों घर घर में
विद्यार्थी की व्यथा
हिन्दी वर्णमाला पर कविता
साक्षरता का अर्थ बताती कविता
मैं गुलाब हूँ
धरा की आह पर कविता
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