एक दिन में अनंत समय है
जो जानता है
कि घड़ी चल रही है,
वह
क्षण को
खाली लौटने नहीं देता।
जीवन का सम्मान
समय के सम्मान से
शुरू होता है।
तुम कहते हो—
एक दिन में
सिर्फ़ चौबीस घंटे होते हैं।
पर यह
सिर्फ़
तुम्हारी परिभाषा है।
ज़रा रुको।
गिनती बदलो।
एक दिन में
कितने मिनट होते हैं?
देखो—
समय
अचानक
फैलने लगा।
अब
सेकंड गिनो।
समय
और फैल गया।
और एक सेकंड?
उसमें
अरबों अंश हैं।
अब बताओ—
समय
कहाँ सीमित रहा?
यह
शब्दों का खेल नहीं है।
यह
दृष्टि का परिवर्तन है।
यदि
एक सेकंड
तुम्हारे लिए
एक घंटे जितना
महत्त्वपूर्ण हो जाए—
तो
क्या तुम्हारी
समय-संपदा
क्षण भर में
कई गुना नहीं बढ़ जाएगी?
एक दिन
असंख्य संभावनाएँ
लिए होता है।
और तुम?
तुम
इस अनंत धन को
तुच्छ बातों पर
खर्च कर देते हो—
और फिर
कहते हो
समय नहीं है।
समय नहीं है
या
दृष्टि नहीं है?
निर्दय रूप से
सजग बनो।
देखो—
तुम्हारा समय
कहाँ जा रहा है।
क्योंकि
एक सेकंड का
अरबवाँ हिस्सा भी
जीवन ही है।
और तुम
उसे
ऐसे फेंक देते हो
जैसे
वह
कुछ भी नहीं हो।
सेकंड
कोई छोटी इकाई नहीं है।
तुम्हारे लिए
वह
पूरा समय है।
पूरा जीवन है।
यदि तुम
जीवन का सम्मान
करना चाहते हो—
तो
शुरुआत
सेकंड से करो।
क्योंकि
जो एक सेकंड को
व्यर्थ करता है,
वह
पूरे जीवन को
अनदेखा करता है।
और जो
एक सेकंड को
सचेत जी लेता है—
उसके लिए
एक दिन
अनंत हो जाता है।





