मुझे पता है कविता
हिंदी कवितामुझे पता है कविता खौफ़ में क्या बोलेगा मुझे पता है। रात को दिन बोलेगा मुझे पता है।1। वक़्त आने पर मेरे पक्ष में कोई नहीं बोलेगा मुझे पता है।2। साजिशें हैं उनकी गवाह भी उनके जज क्या बोलेगा मुझे पता है।3। ज़ुल्म के ख़िलाफ़ इस जंग में आखिर ईमान बोलेगा मुझे पता है।4। मेरी


