प्यासा पंछी पर कविता-प्रेमचन्द साव
प्रकृति और पर्यावरणप्यासा पंछी पर कविता मन है उदास भटकता फिरे ।जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे ।मन को ना कोई बांध सके। तो खुले आकाश की खोज करे ।मन की उड़ान खुशियों की पुकार करे ।जैसे प्यासा पंछी उड़ता फिरे । फूलों में भौंरे जैसे गुंजन करे ।मन की इच्छा वैसे ही हिलोरे करे ।जैसे प्यासा पंछी
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