कविता बहार

निर्भया न्याय दिवस पर कविता

समाज और यथार्थ

निर्भया न्याय दिवस पर कविता सन् दो हजार बीस,बीस मार्च रहा अनुपम।स्वर्णिम दिन है आज,शांत मन तन है शुद्धम।हुई न्याय की जीत,निर्भया तेरी जय हो।दुराचार का अंत,सजा देना अब तय हो।सात साल के बाद में,फाँसी में झूले सभी।अब हो नहीं समाज में, फिर ऐसी घटना कभी। सुकमोती चौहान रुचिबिछिया ,महासमुन्द,छ.ग.

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फेसबुक प्यार पर कहानी

हिंदी कविता

फेसबुक प्यार पर कहानी सॉफ्टवेयर डेवलपर इंडिया निवासी नीलकमल फेसबुक चला रहा था,एक खूबसूरत युवती “हनी में”जो थाईलैंड में लोहा प्लास्टिक कम्पनी में मशीन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थी,को फ्रेंडरिक्वेस्ट भेज दिया।जवाब भी कन्फर्म हो गया,नीलकमल बहुत खुश था,सॉफ्टवेयर डेवलप करने का यूट्यूब वीडियो नीलकमल कमल ने शेयर किया हनी में ने लाइक किया।और

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विश्व कविता दिवस – सुन्दर लाल डडसेना

समाज और यथार्थ

विश्व कविता दिवस (अंग्रेजी: World Poetry Day) प्रतिवर्ष २१ मार्च[1] को मनाया जाता है। यूनेस्को ने इस दिन को विश्व कविता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा वर्ष 1999[2] में की थी जिसका उद्देश्य को कवियों और कविता की सृजनात्मक महिमा को सम्मान देने के लिए था। कविता क्या है? हे प्रिये! कविता क्या है?कविता मधुर की मुस्कान है।भावों

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खादीधारी पर कविता

हिंदी कविता

खादीधारी पर कविता समय-समय परपनप जाते हैंनए-नए नाम सेनए-नए वायरसजो करते हैं संक्रमितइंसानों कोबिना जाति-धर्म काभेदभाव किएढूंढ़ा जाता है उपचारइन वायरस का संसद-विधानसभाओं मेंचौकड़ी मारे बैठे वायरसजाति-धर्म के नाम परकरते हैं संक्रमितमानवता कोनहीं हुआ आज तककोई अनुसंधानइनके उपचार के लिएसर्वाधिक खतरनाक हैंये खादीधारी वायरसदिन प्रतिदिन इनका प्रकोपबढ़ता ही जा रहा है -विनोद सिल्ला©

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कर्ज पर कविता

हिंदी कविता

कर्ज पर कविता कर्ज था कर्ज थाकर्ज हीउस किसान कामर्ज थाकह गया अलविदाजहान को कर्ज थाकर्ज हीउस पूंजीपति कामर्ज थाकह गया अलविदाभारत को कर्ज थाकर्ज हीउस बैंक कामर्ज थाकह गया अलविदाअस्तित्व को -विनोद सिल्ला©

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याराना पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

याराना पर कविता साहिल पर आना मेरे यार मुझे तेरी याद सताती हैतेरी बातें मुझे बीते कल की याद दिलाती हैंसाहिल पर आना मेरे यार मुझे तेरी याद सताती है।1)जब तू मुझे कभी बुलाता हैयादों की सेज पर सुलाता हैवो प्रेम भरी शय्या मुझको जल्दी सुलाती हैसाहिल पर आना———————-॥ 2)जब तू मुझे कभी भी मिलता

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मेरा परिचय पर कविता-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

मेरा परिचय पर कविता -विनोद सिल्ला चौबीस मई तारीख भई,उन्नीस सौ सत्ततर सन।सन्तरो देवी की कोख सेविनोद सिल्ला हुआ उत्पन्न।। माणक राम दादा का लाडला,उमेद सिंह सिल्ला का पूत।भाटोल जाटान में पैदा हुआ,क्रियाकलाप नाम अनुरूप।। सन् उन्नीस सौ बानवे में ,हो गया दसवीं पास।सादा भोला स्वभाव है,उन्नति करने की आस।। कक्षा बारहवीं पास कर,जे०बी०टी० में

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मुलाकात पर कविता

हिंदी कविता

मुलाकात पर कविता मैं जब भीफरोलता हूँअलमारी में रखेअपने जरूरी कागजाततो सामने आ ही जाती हैएक चिट्ठीजो भेजी थीवर्षों पहलेमेरे दिल केमहरम नेभले ही उससेमुलाकात हुएहो गए वर्षोंपर चिट्ठीकरा देती है अहसासएक नई मुलाकात का -विनोद सिल्ला©

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जन अदालत लघु कथा

हिंदी कविता

जन अदालत लघु कथा बचाओ बचाओ बचाओ की आवाज सुन दद्दू झोपडी से बाहर झाँका तो सन्न रह गया।गाँव के पटवारी को वर्दीधारी नक्सली घसीटते हुए ले जा रहे थे।दद्दू को समझते देर न लगी आज फिर हत्या कर दी जाएगी।फिर कानो में आवाज सुनाई दी,”गाँव वालो घर से बाहर निकलो जनअदालत है।”छत्तीसगढ़ के घूर

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चटनी पर कविता

हिंदी कविता

चटनी पर कविता चटनी लहसुन पीसना,लेना इसका स्वाद।डाल टमाटर मिर्च को,धनिया रखना याद।। अदरक चटनी रोज ले,भागे दूर जुकाम।खाँसी सत्यानाश हो,करते रहना काम।। चटनी खाना आम की,मिलकर के परिवार।उँगली अपनी चाट ले,मुँह में आवे लार।। चंद करेला पीसकर,खाना इसको शूर।गुणकारी यह पेट का,रोग रहे सब दूर।। इमली चटनी भात में,खाते मानव लोग।दूर करे यह कब्ज

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कोरोना पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

कोरोना पर दोहे विद्यालय सब बंद है,कोरोना का घात।नर नारी सब मास्क पर,कहते डर की बात।। हाथ विचारे देख के,रहते हैं चुपचाप।नहीं बताते कुछ हमें,कोरोना पर आप।। कोरोना के काट का,खोज करो सब आज।मरे नहीं कोई यहाँ,होवे खूब इलाज।। आवत रोगी देख के,काँपे सबके हाथ।डॉक्टर परिजन सब डरे,असली रिश्ते साथ।। धोते रहना हाथ को,मास्क रहे

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कवि पर कविता

हिंदी कविता

कवि पर कविता साहित्य के चूल्हे परशब्दों का तवा चढ़ावैचारिकता की लकड़ी मेंभावनाओं की आग जलाकरकलम की चिमटी सेमैं कविताओं की रोटियां सेंकता हूँहाँ! मैं कवि हूँ। ©तिलसमानी_KYS

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