कविता बहार

मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ

हिंदी कविता

मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ, मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ,जब आँखों से मोहब्बत देखता हूँ।अब जल्दी नहीं कि सामने आओ मेरे,मैं तो तस्वीर भी दूर कर देखता हूँ।जहां में सब उजाले में देखते हैं तुम्हें,मैं तो अंधेरे में तेरा चेहरा देखता हूँ।सब तुझमें, खुद को देखना चाहते थे,मैं चाहता

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इन गुलमोहरों को देखकर

हिंदी कविता

कविता/निमाई प्रधान’क्षितिज’ इन गुलमोहरों को देखकर दिल के तहखाने में बंद कुछ ख़्वाहिशें…आज क्यों अचानक बुदबुदा रही हैं?महानदी की… इन लहरों को देखकर!! कि ननिहाल याद आता है..इन गुलमोहरों को देखकर!! शाही अपना भी रूतबा थामामाजी के गाँव में!!बचपन में हम भी..हुआ करते थे राजकुमार..सुबहो-शाम घूमा करते थेनाना की पीठ पर होके सवार..हमारे हर तोतले

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चिड़िया पर कविता

हिंदी कविता

थके पंछी थके पंछी आजफिर तूँ उड़ने की धारले,मुक्त गगन है सामनेतूँ अपने पंख पसारले। देख नभ में, नव अरुणोदयहुआ प्रसूनों का भाग्योदय,सृष्टि का नित नूतन वैभवसाथियों का सुन कलरवअब हौंसला संभाल ले । शीतल समीर बह रहासंग-संग चलने की कह रहा,तरु शिखा पर झूमतेफल फूल पल्लव शोभतेत्याग दे आलस्य निद्राअवरुद्ध मग विकास काआज अब

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भ्रूणहत्या-कुण्डलिया छंद

हिंदी कविता

भ्रूणहत्या-कुण्डलिया छंद साधे बेटी मौन को, करती  एक गुहार।जीवन को क्यों छीनते ,मेरे सरजनहार।मेरे सरजनहार,बतायें गलती मेरी।कहँ भू पर गोविंद , करे जो रक्षा  मेरी।“कुसुम”कहे समझाय  , पाप   जीवन भर काँधे। ढोवोगे दिन रैन ,दुःख यह मौनहि  साधे। पुष्पा शर्मा “कुसुम”

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पथ की दीप बनूँगी

हिंदी कविता

पथ की दीप बनूँगी प्रिय तुम न होना उदास तेरे पथ की दीप बनूँगी ।फूल बिछा कर पग पर तेरे काँटे सदा वरण करूँ गी ।।तेरे पथ की दीप बनूँगी। ना  मन  हो  विकल  न उथल पुथल ।मनों भाव अर्पित कर अधर की मुस्कान बनूँगी । तेरे पथ की दीप बनूँगी। जिन्दगी में कभी गम

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भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य

समाज और यथार्थ

भावी पीढ़ी का आगामी भविष्य हमें सोचना तो पड़ेगा।परिवार की परंपरासमाज की संस्कृतिमान्यताओं का दर्शनव्यवहारिक कुशलताआदर्शों की स्थापना।निरुद्देश्य तो नहीं!महती भूमिका है इनकीसुन्दर,संतुलित और सफल जीवन जीने में। जो बढता निरंतरप्रगति की ओरदेता स्वस्थ शरीर ,सफल जीवन और सर्वहितकारी चिन्तन।हम रूढियों के संवाहक न बने।कुरीतियों की हामी भी क्यों भरें। बचें छिछले ,गँदले गड्ढों के

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एक बार लौट कर आ जाते

हिंदी कविता

अगर वह एक बार लौट कर आ जाते तालाब के जल पर एक अस्पष्ट सा,उन तैरते पत्तों के बीचएक प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ा,तभी जाना… मेरा भी तो अस्तित्व है।झुर्रियों ने चेहरे पर पहरा देना शुरू कर दिया था।कुछ गड्ढे थे. जो चेहरे पर अटके पड़े थेंजिस पर आँखों से गिरी कुछ बूंदें अपना बसेरा बनाए हुए

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morning

प्रातःकाल पर कविता

हिंदी कविता

प्रातःकाल पर कविता श्याम जलद की ओढचुनरिया प्राची मुस्काई।ऊषा भी अवगुण्ठन मेंरंगों संग नहीं आ पाई। सोई हुई बालरवि किरणेअर्ध निमीलित अलसाई।छितराये बदरा संग खेलेभुवन भास्कर छवि छाई। नीड़ छोड़  चली अब तोपंछियों की सुरमई पाँत।हर मौसम में  रहें कर्मरतसमझा जाती है यह बात। पुष्पा शर्मा “कुसुम”

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हम हलचल कर देंगे

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

हम हलचल कर देंगे         (प्रॉज शैली में)             तर्क,      कुछ निकलेंगे..कुछ अंधविश्वास टूटेंगे।  ज्ञान ग्रहण जो सार,    हम तुम खोजते,       ग्रहण जो,         करेंगे।             हर,       पक्ष विपक्ष,     हर पहलु का,  कोई न कोई सार,  निकलता है प्यारे,   अनुसंधान जो,         करेंगे।           भावी,        भूत वर्त,      सब कुछ है,विज्ञान के पहिये में,     बस संग जो,     चक्रण

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दिलीप कुमार पाठक सरस का ग़ज़ल

हिंदी कविता

दिलीप कुमार पाठक सरस का ग़ज़ल जिंदादिली जिसकी बदौलत गीत गाना फिर नया |हँसके ग़ज़ल गाते रहो छेड़ो तराना फिर नया || है जिंदगी जी लो अभी फिर वक्त का कोई भरोसा है नहीं |पल भर ख़ुशी का जो मिले किस्सा सुनाना फिर नया || हँसना हँसाना रूठ जाना फिर मनाना आ गया |अच्छा लगे 

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सेवा पर कविता

हिंदी कविता

सेवा पर कविता – मानक छत्तीसगढ़िया ठंडी में गरीब को कपड़े दे दो,गर्मी में प्यासे को पानी।हर मौसम असहाय की सेवा,ऐसे बीते जवानी।। अशिक्षित को शिक्षित बना दो,कमजोर को बलशाली।भटके को सच राह दिखा दो,भीखारी को भी दानी।। दीन दुखियों को खुशियां दे दो,रोते को हंसी सारी।रोगी को आराम दिला दो,हो ऐसा कर्म कहानी।। प्रेम

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भ्रूण हत्या पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

भ्रूण हत्या पर कविता भ्रूण हत्या का मचा एक नीरव रोर है,चोरी छिपे लिंग जाँच हर दिशा हर ओर है।जाने क्यों बेटी की हत्या का शौक ये चढ़ आया,गर्भ में ही भेदभाव का ये कृत्य सबको भाया। अपने ही कोख के अंश का माँ गला घोंट देती है,लिंग जाँच में बेटा हो तो हत्या रोक

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