जलती धरती/ रितु झा वत्स

JALATI DHARATI

जलती धरती/ रितु झा वत्स विशुद्ध वातावारण हर ओरमची त्रास जलती धरती धूमिल आकाश पेड़ पौधे की क्षति होरही दिन रात धरती की तपिश कर रही पुकार ना जानेकब बरसेगी शीतल बयार प्लास्टिक की उपयोग हो रही लगातार दूषित हो रही हर कोना बदहाल जलती धरती सह रही प्रहारसूख रही कुंवा पोखर तालाब बूंद भर पानी … Read more

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार

JALATI DHARATI

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार ईश्वर की दी हुई धरोहर हम जला रहे हैंलगा के आग पर्यावरण दूषित कर रहे हैंकाटे जा रहे हैं पेड़ जंगलों के,सुखा के इन्सान खुश हो रहा हैआते – जाते मौसम बिगाड़ रहा है हरी- भरी भूमि में निरंतर रसायन मिला रहा हैअपने ही उपजाऊ भूमि … Read more

दिवस पर्यावरण मना रहे हैं/मंजूषा दुग्गल

जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

दिवस पर्यावरण मना रहे हैं/मंजूषा दुग्गल जलाकर पेड़-पौधे वीरान धरती को बना रहे हैंइतनी सुंदर सृष्टि का भयावह मंजर बना रहे हैंकाटकर जंगल पशु-पक्षियों को बेघर बना रहे हैंकर बेइंतहा अत्याचार हम दिवस पर्यावरण मना रहे हैं । वैज्ञानिक उन्नति की राह पर हम कदम बढ़ा रहे हैंचाँद पर भी अब देखो वर्चस्व अपना जमा … Read more

धरती पर कविता/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे

JALATI DHARATI

धरती पर कविता/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे जलती धरती तपन ज्वलनक्रोधाग्नि सा ज्वाला।नशा पान में चुर हो बनते पाखंडी है मतवाला।। काट वृक्ष धरा किन्ह नगनधरती जलती , तु हो मगनवाह रे मानव,खो मानवताक्या सृष्टि का है यही लगन।। जरा सोचो,कुछ कर रहमना कीजिए प्रकृति दमनतेरा प्राण बसा है वहींधरती पवन और गगन।। कैसा मानव … Read more

एक आईएसबीएन नंबर प्राप्त करें

kavita bahar

एक आईएसबीएन नंबर प्राप्त करें यदि आप कोई किताब लिखने की योजना बना रहे हैं या पहले ही लिख चुके हैं, तो आपको उसके लिए आईएसबीएन की आवश्यकता होगी। दो परिदृश्य हैं- यदि आप चाहते हैं कि आपका प्रकाशन कविता बहार से करे, तो हम इसे उचित कीमत पर करवा सकते है, लेकिन यदि आप … Read more