हिंदी कविता – सौन्दर्य की देवी
नारी जीवन और संवेदनानारी सौंदर्य – एक काव्य दृष्टि में
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नारी सौंदर्य – एक काव्य दृष्टि में
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बाबा साहिब सा सूरमा -राकेश राज़ भाटिया बदलती रहेगी यह दुनिया, बदलेगा यह दौर ए जहाँ .न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सूरमा .. वो जिसने कक्षा के बाहर बैठकर ज्ञान का दीया जला लिया .वो जिसने अपनी मेहनत से, विद्या का सागर पा लिया .वो जिसने संविधान बनाकर बदल दिया
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श्रावण मास में आराध्य महाशिव विषधारी, भोले भंडारी की स्तुति तांटक छन्दगीत में….
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पनघट मरते प्यास {सरसी छंद 16+11=27 मात्रा,चरणांत गाल, 2 1}.नीर धीर दोनोे मिलते थे,सखी-कान्ह परिहास।था समय वही,,अब कथा बने,रीत गये उल्लास।तन मन आशा चुहल वार्ता,वे सब दौर उदास।मन की प्यास शमन करते वे,पनघट मरते प्यास।। वे नारी वार्ता स्थल थे,रमणी अरु गोपाल।पथिकों का श्रम हरने वाले,प्रेमी बतरस ग्वाल।पंछी जल की बूंद आस के,थोथे हुए दिलास।मन
धर्मपत्नी पर कविता ( विधाता छंद, २८ मात्रिक ) हमारे देश में साथी,सदा रिश्ते मचलते है।सहे रिश्ते कभी जाते,कभी रिश्ते छलकते हैं। बहुत मजबूत ये रिश्ते,मगर मजबूर भी देखे।कभी मिल जान देते थे,गमों से चूर भी देखे। करें सम्मान नारी का,करो लोगों न अय्यारी।ठगी जाती हमेशा से,वहीं संसार भर नारी। हमारी धर्म पत्नी को,कहीं गृहिणी
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मात पिता पूजन दिवस दोहे सीमा पर रक्षा करे, अपने वीर जवान।मरते मान शहीद से, जीते उज्ज्वल शान।। प्रेम दिवस पर है विनय , सुनिये सभी सुजान।मात पिता को नेह दें, मन विश्वासी मान।। न्यौछावर हैं देश पर , मातृभूमि के पूत।त्याग और बलिदान हित, क्षमता लिए अकूत।। मातृ शक्ति को कर नमन, नारी का
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मणिकर्णिका-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर कविता अंग्रेजों को याद दिला दी, जिसने उनकी नानी।मर्दानी, हिंदुस्तानी थी, वो झांसी की रानी।। अट्ठारह सौ अट्ठाइस में, उन्नीस नवंबर दिन था।वाराणसी हुई वारे न्यारे, हर सपना मुमकिन था।।नन्हीं कोंपल आज खिली थी, लिखने नई कहानी… “मोरोपंत” घर बेटी जन्मी, मात “भगीरथी बाई”।“मणिकर्णिका” नामकरण, “मनु” लाड कहलाई।।घुड़सवारी, रणक्रीडा, कौशल,
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03 जून विश्व साइकिल दिवस पर दोहे पाँवगाड़ी साइकिल साधन एक है,सस्ता और आसान।जिसकी मर्जी वो चले, चल दे सीना तान।। बचपन साथी संग चढ़, बैठे मौज उड़ाय।धक्का दें साथी गिरे त, उसको खूब चिड़ाय।। आगे पीछे बीच में, तीन पीढ़ी बिठाय।हँसते गाते बढ़े चलें, देख लोग हरसाय।। खुद ढोती व बोझ संग, खर्चे भी
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मतदान विषय पर दोहे- बाबू लाल शर्मा सोच समझ मतदान (दोहा-छंद)1.मत अयोग्य को दें नहीं, चाहे हो वह खास।वोट देय हम योग्य को, सब जन करते आस।। 2.समझे क्यों जागीर वे, जनमत के मत भूल।उनको मत देना नहीं, जिनके नहीं उसूल।। 3.एक वोट शमशीर है, करे जीत या हार।इसीलिए मतदान कर, एक वोट सरकार।। 4.मतदाता
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वट सावित्री पूजा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा वट सावित्री पूज कर, जो रखती उपवास।धन्य धन्य है भारती, प्राकत नारी आस।। ढूँढे पूजन के लिए, बरगद दुर्लभ पेड़।पथ भी दुर्गम हो रहे, हुई कँटीली मेड़।। पेड़ सभी है काम के, रखना इनका ध्यान।दीर्घ आयु होता सखे, वट का पेड़ महान।। पुत्र सरीखे पालिए, सादर तात
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नाम – शशांक गर्ग
पता – आर्दश कॉलोनी किशनगढ़-बास अलवर राजस्थान …
तंबाकू निषेध दिवस पर लेख – शशांक गर्ग Read More »
(चौपइया छंद) यह प्रति चरण 30 मात्राओं का सममात्रिक छंद है। 10, 8,12 मात्राओं पर यति। प्रथम व द्वितीय यति में अन्त्यानुप्रास तथा छंद के चारों चरण समतुकांत। प्रत्येक चरणान्त में गुरु (2) आवश्यक है, चरणान्त में दो गुरु होने पर यह छंद मनोहारी हो जाता है।इस छंद का प्रत्येक यति में मात्रा बाँट निम्न प्रकार है।प्रथम
राखी पर कविता (चौपइया छंद ) बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ Read More »