वही डूबना तैरना है / मनीभाई नवरत्न
हिंदी कवितावही डूबना तैरना है जो सच में सार्थक है,उसमें जब तुम डूबते हो,तो फालतू बातेंदरवाज़े पर आकर भीअंदर नहीं आ पातीं। वे दस्तक देती हैं,पर भीतर कोई खाली नहीं मिलता—मन किसी सच्ची उपस्थिति सेभरा हुआ होता है। पर सावधान।हर डूबना मुक्ति नहीं होता। कुछ डूबनाबेहोशी की तरह होता है—जहाँ चिंता इसलिए नहीं मिटतीकि हल मिल
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