हिंदी कविता

Save environment

पर्यावरण बचाव पर कविता

हिंदी कविता

पर्यावरण बचाव पर कविता 1-पर्यावरण बचाइए, कहता पूरा देश |एक लगाओ पेंड़ जो, बदलेगा परिवेश||2-हरे भरे रखना सदा ,हरियाली के केश|महके तन मन गंध से,पर्यावरण विशेष||3-पर्यावरण पुकारता, ले लो प्रेम अपार|मेरे अन्तस् पैठ के, लेना मुझे निहार||4-सबका खुशियों से सजे,सुन्दर जीवन धाम|पर्यावरण सुधारना, सबसे उत्तम काम||5-दोष युक्त पर्यावरण, किसे सुहाता मीत|दोषों के परिहार से, उपजे […]

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save nature

पर्यावरण हमारा /आचार्य मायाराम ‘पतंग’

प्रकृति और पर्यावरण

पर्यावरण हमारा /आचार्य मायाराम ‘पतंग’ हमको जीवन देता है यह पर्यावरण हमारा । इसे नष्ट करने से होगा जीवन नष्ट हमारा ॥ अज्ञानी हम ज्ञान राशि, औरों को बाँट रहे हैं। उसी डाल पर बैठ उसे ही, जड़ से काट रहे हैं। माँ प्रकृति ने हमको पाला, अपना दूध पिलाकर । हम उसको ही पीड़ित

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save tree save earth

पेड़ की पुकार / सुनहरी लाल वर्मा ‘तुरंत’

हिंदी कविता

पेड़ की पुकार / सुनहरी लाल वर्मा ‘तुरंत’ रो-रोकर एक पेड़ लकड़हारे से एक दिन बोला क्यों काटता मुझको भैया तू है कितना भोला ! सोच समझ फिर बता मुझे मैं तेरा क्या लेता हूँ? मैं तो पगले! तुझको, जग को बहुत कुछ देता ही देता हूँ। सूरज से प्रकाश लेकर मैं खाना स्वयं पकाता

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doha sangrah

दान पर दोहे / डॉ एनके सेठी

हिंदी कविता

दान पर दोहे देवें दान सुपात्र को,यही न्याय अरु धर्म।तज दें मन से मोह को,सत्य यही है कर्म।।1।। न्याय दानऔर धर्म का,अब हो रहाअभाव।आज जगत से मिट रहा,आपस का सद्भाव।।2।। सत् का जीवन में कभी, होता नहींअभाव।होता है जो भी असत,रहे न उसका भाव।।3।। करता जो भी दान है, वह पाता सम्मान।अनासक्ति के भाव का,

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फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा/ रेखराम साहू

हिंदी कविता

— फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा— फ़ैसले से फ़ासला इंसाफ़ का होने लगा।यह तमाशा देखकर फ़रियाद है रोने लगा।। पाप दामन में बहुत हैं,पर उसे परवाह कब?गंग वह उल्टी बहाकर दाग़ है धोने लगा।। इस क़दर उसकी हवस है आसमां को छू रही।पाँव में पर लग गए जब वह ज़मीं खोने लगा।। वक़्त

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परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह "दिनकर"

परशुराम की प्रतीक्षा / रामधारी सिंह “दिनकर”

समाज और यथार्थ

परशुराम की प्रतीक्षा ChatGPT said: ChatGPT “परशुराम की प्रतीक्षा” कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें कवि ने समाज में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नए परशुराम के अवतरण की प्रतीक्षा का वर्णन किया है। इस कविता में परशुराम का प्रतीक उन सभी शोषित और पीड़ित लोगों की आशाओं

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किसान खेत जोतते हुए

सपनों का दाना /मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

सपनों का दाना /मनीभाई नवरत्न जमीन में दफन होकरपसीने से सिंचितकड़ी देखभाल मेंउगता है ,सपनों का दाना बनके। लाता है खुशियां;जगाता है उम्मीद,कर्ज चुकता करने की।पर रह नहीं पाताअपने जन्मदाता के घर। खेत खलिहान से करता हैमंडे तक की सवारी।और अपने ही भीड़ मेंखो जाती है अनाथ होकर। डरता है ,बारदाने की घुटन से।जाने कब

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किसान खेत जोतते हुए

कृषक मेरा भगवान / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

कृषक मेरा भगवान / मनीभाई नवरत्न मैंने अब तकजब से भगवान के बारे में सुना ।न उसे देखा,न जाना ,लेकिन क्यों मुझे लगता हैकि कहीं वो किसान तो नहीं।। उस ईश्वर के पसीने सेबीज बने पौधे,पोषित हुये लाखों जीव।फसल पकने तकचींटी,चूहे,पतंगों कावही एकमात्र शिव।।किसान तो दाता हैइसीलिए वो विधाता है।पर वो आज अभागा है।कुछ नीतियों

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struggle

बाधाओं से भय न हमें हम तूफानों में चलते हैं

हिंदी कविता

बाधाओं से भय न हमें हम तूफानों में चलते हैं बाधाओं से भय न हमें, हम तूफानों में चलते हैं ।। पथ चाहे घोर अँधेरा हो, दु:ख द्वंद्वों ने जब घेरा हो।हो महा वृष्टि भीषण गर्जन, करता हो महाकाल नर्तन।पर कब किससे डरने वाले, हम संघर्षों में पलते हैं।हम तूफानों में चलते हैं। बाधाओं से

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Hindi Poem ( KAVITA BAHAR)

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू

हिंदी कविता

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू क्या ख़ुदा की बात,अपने आप को जाना नहींं।साँच है महदूद,मेरी सोच तक माना नहीं ।। ज़िंदगी हँसकर,रुलाकर मौत यह समझा गईं।दुश्मनी है ना किसी से और याराना नहीं।। यह हवस की राह राहत से रही अंजान है।दौड़ना-चलना मग़र मंज़िल कभी पाना नहीं।। हाय होती है ग़रीबों की हमेशा आतिशी।राख़

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goverdhan shri krishna

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी/गीता द्विवेदी

हिंदी कविता

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी (1) आकर देख जरा अब हालत मैं दुखिया बन बाट निहारी।श्यामल रूप रिझा मन मीत बना कर लो रख हे गिरधारी।काजल नैन नहीं टिकता गजरा बिखरे कब कौन सँवारी।चाह घनेर भयो विधि लेखन टारन को अड़ते बनवारी।। (2) कातर भाव पुकार रही हिरणी प्रभु आकर प्राण बचाओ।नाहर घेर

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goverdhan shri krishna

मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी / रचयिता:-डी कुमार–अजस्र

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प्रस्तुत गीत या गेय कविता/भजन —- मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी —डी कुमार–अजस्र द्वारा स्वरचित गीत या भजन के रूप में सृजित है ।

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