लाओ–सू : मार्ग का महागुरु -मनीभाई नवरत्न
समाज और यथार्थलाओ–सू : मार्ग का महागुरु प्राचीन चीन के धूसर बादलोंऔर शांत पर्वतों के बीचएक आत्मा जन्मी—जिसे संसार ने पुकारा—लाओ–सू,अर्थात् “आदरणीय वृद्ध गुरु”। इतिहास धुँधला है,समय की धूल पन्नों पर जमी है—कुछ कहते—वह मिथक था,कुछ कहते—कई महान आत्माओं काएक संयुक्त स्वरूप।पर सत्य यह है—ज्ञान जब जन्म लेता है,तो व्यक्ति नहीं, विचार बनकर जीता है। कहते हैं—वह
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