हिंदी कविता

goverdhan shri krishna

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव – बाबूराम सिंह

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गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव                      जन्म  उत्सव मोहन का,  देखन देव महान।भेष  बदल  यादव  बनें  ,यशोदा के मकान ।। सब  देवों  की नारियाँ ,ले मन  पावन  प्रीत। बनी  रूप  तज  गोपियाँ ,गाती  मंगल गीत।। रमे   मुरारी   प्रेम   में , बैठे   शम्भु   उदास।चलो नाथ गोकुल चलें,कहीं सती आ पास।। शम्भु  मदारी  बन  गये , डमरू लेकर  हाथ।गोकुल  […]

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नटखट नंद किशोर- नीरामणी श्रीवास

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नटखट नंद किशोर चोरी करके छुप गया , नटखट नंद किशोर ।सभी गोपियाँ ढूँढती , प्यारा माखन चोर ।।प्यारा माखन चोर , शिकायत माँ से करते ।दधि की मटकी फोड़ , चैन हम सबकी हरते ।।नियति कहे कर जोड़ , अनूठी लीला तोरी ।प्रेम भक्ति की मान , बचाने करते चोरी ।। चोरी करते देखकर

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राधा और श्याम की प्रेम कविता

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राधा और श्याम की प्रेम कविता तू मेरी राधा मैं तेरा श्याम हूं।तुमसे प्रेम करके मैं बदनाम हूं। तुझे देखें बिन ,मेरी जीवन की बांसुरी में सूर कहां? तू है मेरे साथ तो सुंदर लगता है,यह सारा जहां। बस तेरी ही धुन में रमे रहूं बस दिन रात तेरा नाम लूं। तू मेरी राधा मैं

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कृष्ण पर आधारित कविता -मनीभाई नवरत्न

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कृष्ण पर आधारित कविता -मनीभाई नवरत्न हे कृष्ण !आप सर्वत्र।फिर भी खोजता हूँ;अगर कहूं आप पूर्ण हो ।तो सत्य भी हो जायेगा असत्य।चूंकि मैं अपूर्ण जो ठहरा । हे द्वारकाधीश !संसार रूपी कुरुक्षेत्र के नायक !संघर्ष में जन्मे ,खतरों में पलेतथापि बाल लीलाएँ,बताती जीवन के मायने।पर्वत उठाना,कालिया मर्दनकंस रूपी काल को पछाड़नाउसी की नगरी में

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कृष्ण रासलीला

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रासलीला लीला राधे कृष्ण सम,आँख उठा के देख।लाख कोटि महा शंख में,लख लीला है एक।। सब देवों की नारियाँ,कर नित साज सिंगार।गमन करें शुचि रास में ,बन ठन हो तैयार।। कृष्णप्रेम विह्वल शम्भु,निज मन कियो विचार।राधे कृष्ण प्रेम परम ,जा देखूँ इक बार।। शिव गौरा से जा तभी,कहने लगे सकुचाय।रास लखन मै भी चलूँ

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गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी

नारी जीवन और संवेदना

गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी नटवर नागर प्यारे कान्हा, गोवर्धन कर धरते हो।इंद्र देव का माधव मोहन, सर्व दर्प तुम हरते हो। ब्रज मंडल के सब नर-नारी, इंद्र पूजते सदियों से।लीलाधारी कृष्ण चन्द्र को, कभी न भाया अँखियों से।उनके कहने पर ब्रजवासी, लगे पूजने गोवर्धन।देवराज का दम्भ तोडने, लीलाएँ नव करते हो।1 गोवर्धन का

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कृष्ण रंग रंगी मीरा /अर्चना पाठक

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रंग रंगी मीरा/ अर्चना पाठक तज महल अटारी ,कर सितार लिये गली गली श्याम संग घूमी मीरा । वीणा के तार कृष्ण दास हुये भक्ति के रंग में रंगी मीरा । पराधीनता की गहरी टीस लिये। विरक्ति के गीत में रमी मीरा। परिजनों के क्रोध और विद्रोह सहे। सदा कृष्ण भक्ति में लीन मीरा।

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गिरिराज गोवर्धन की महिमा

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गिरिराज गोवर्धन की महिमा संसार में भक्ति प्रेम अनुरक्ति से मिलता छप्पर फाड़।ब्रज वासियों की रक्षा में उठाये कृष्ण गोवर्धन पहाड़। द्वापर युग की बात,क्यों पूजन करें हम इंद्र देवता को।जब गिरि गोवर्धन चारा दें,सिचिंत करें धरती मात को।जिनसे हम ब्रज वासियों को,मिलता है लाभ साक्षात।पूजन करें गिरि गोवर्धन की,सह लेंगें इंद्र के ताप को।जब

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श्रीकृष्ण पर कविता – रेखराम साहू

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श्रीकृष्ण पर कविता – रेखराम साहू महाव्याधि है मानवता पर, धरा-धेनु गुहराते हैं।आरत भारत के जन-गण,हे कान्हा! टेरते लगाते हैं।। चित्त भ्रमित संकीर्ण हुआ है,हृदय हताहत जीर्ण हुआ है।धर्मभूमि च्युतधर्म-कर्म क्यों,अघ अधर्म अवतीर्ण हुआ है ।।संस्कृति के शुभ सुमन सुगंधित शोकाकुल झर जताते हैं।महाव्याधि मानवता पर है,धरा- धेनु गुहराते हैं।। काल,काल-कटु कंस हुआ है,तम-त्रिशूल विध्वंस

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श्रीकृष्ण पर कवितायें- जन्माष्टमी पर्व विशेष

नारी जीवन और संवेदना

श्रीकृष्ण पर कवितायें हठ कर बैठे श्याम, एक दिन मईया से बोले।ला के दे-दे चंद्र खिलौना चाहे तो सब ले-ले।हाथी ले-ले, घोड़ा ले-ले, तब मईया बोली।कैसे ला दूं चंद्र खिलौना, वो तो है बहुत दूरी। दूर गगन में ऐसे चमके, जैसे राधा का मुखड़ा।देख के ऐसा रूप सलोना कान्हा का मन डोला।राधा रानी को आज

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सम्पूर्ण श्री कृष्ण गाथा पर कविता

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सम्पूर्ण श्री कृष्ण गाथा कृष्ण लीलाकाली अँधेरी रात थी ,होने वाली कुछ बात थी ,कैद में थे वासुदेव,देवकी भी साथ थीं। कृष्ण का जन्म हुआ,हर्षित मन हुआ,बंधन मुक्त हो गए,द्वारपाल सो गए। एक टोकरी में डाल ,सर पर गोपाल बाल,कहीं हो न जाए भोर,चल दिए गोकुल की और। रास्ते में यमुना रानी,छूने को आतुर बड़ीं

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