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जन-जन करोड़ों की मधुर मुसकान चाचा नेहरू /सुनील श्रीवास्तव ‘श्री’
बाल मजदूरी निषेध पर कविताएँ
बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक)
आँख खुलने लगी / नीलम
मानवता के दीप /भुवन बिष्ट
चांदनी रात / क्रान्ति
धूप की ओट में बैठा क्षितिज / निमाई प्रधान’क्षितिज’
दैव व दानवों की वृत्तियां /पुष्पा शर्मा “कुसुम”
कहां गए हो छोड़कर आती हर पल याद / पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’
पर्यावरण दिवस पर चौपाई/ बलबीर सिंह वर्मा ‘वागीश’
5 जून अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस छत्तीसगढ़ी गीत
पर्यावरण संकट-माधवी गणवीर
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