हिंदी कविता

नज़्म – मुझे समझा रही थी वो

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मुझे समझा रही थी वो बहुत मासूम लहजे में, बड़े नाज़ुक तरीके सेमेरे गालों पे रखके हाथ समझाया था उसने येसुनो इक बात मानोगे,अगर मुझसे है तुमको प्यार,तो इक एहसान कर देनाजो मुश्किल है,मेरी ख़ातिर उसे आसान कर देना…अब इसके बाद दोबारा मुझे न याद आना तुमअगर ये हो सके तो जान मुझको भूल जाना

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नारी पर दोहे- डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी पर दोहे ★★★★नारी की यशगान हो ,नारी की ही रूप ।नारी के सहयोग से,मिलते लक्ष्य अनुप।। नारी बिन कब पूर्ण है?एक सुखी परिवार।नारी जो सुरभित रहे, सुखी रहे संसार।। जग में जो करता नहीं , नारी का सम्मान।कहलाये वह क्यो मनुज ,वह है पशु समान।।★★★★★★★★★★★★★रचनाकार – डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

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मर गया कवि सम्मान के चक्कर में – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

वर्तमान परिस्थितियों में कवियों की सम्मान के प्रति अति मोह पर व्यंग्य करती कविता

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अंजलि और प्रताप की लव स्टोरी- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता,

प्रेम आधारित छोटी सी कहानी

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मनीभाई की अद्वितीय चर्चा – साक्षात्कार विधा

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की अपने मित्र अंकित भोई अद्वितीय से साक्षात्कार

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अल्हड़ बचपन -मनीभाई नवरत्न (तांका विधा)

हिंदी कविता, ,

बचपन को आधार मानकर लिखी गई मनीभाई नवरत्न की तांका आप के समक्ष प्रस्तुत

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हाइकु

तांका विधा के बारे में जानकारी

हिंदी कविता

तांका विधा के बारे में जानकारी तांका जापानी काव्य की कई सौ साल पुरानी काव्य विधा है। इस विधा को नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के दौरान काफी प्रसिद्धि मिली। उस समय इसके विषय धार्मिक या दरबारी हुआ करते थे। हाइकु का उद्भव इसी से हुआ। तांका की वर्ण योजना इसकी संरचना ५+७+५+७+७=३१ वर्णों की

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आत्म व्यंग्य पर कविता करती कविता- रेखराम साहू

हिंदी कविता

आत्म व्यंग्य पर कविता आत्म विज्ञापन अधिक तो,लेखनी कमजोर है,गीत गूँगे हो रहे हैं,बक रहा बस शोर है ।। टिमटिमाते बुझ रहे हैं, नेह के दीपक यहाँ।और नफरत का अँधेरा, छा रहा घनघोर है ।। रात रोती, चाँद तारे हैं सिसकते भूख में ।हो गया खामोश चिड़ियों के बिना अब भोर है।। दंभ का झटका

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