शाकाहार/प्रकाश कुमार यादव
प्रकृति और पर्यावरणयहां पर कवि प्रकाश कुमार यादव जी ने शाकाहार के महत्व पर कविता लिखी है।
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यहां पर कवि प्रकाश कुमार यादव जी ने शाकाहार के महत्व पर कविता लिखी है।
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शाकाहारी पर दोहे / डिजेन्द्र कुर्रे========================श्रेष्ठ मनन चिंतन रहें, विनयशील व्यवहार।जिसने अपने जन्म में, चुन ली शाकाहार।। शाकाहारी को मिले, चिंतन में अध्यात्म।भोज तामसिक से मिले, मानवता को घात।। हरि-हरि भाजी शाक में, भरा ब्रम्ह का तत्व।जीव वधन में है नहीं, मानवता सुख सत्व।। गोभी पालक मेथियाँ, और टमाटर लाल।जिसने खाया स्वास्थ से, वे है
शाकाहारी पर दोहे / डिजेन्द्र कुर्रे Read More »
यहां पर कवि ओमकार साहू जी ने शाकाहार को श्रेष्ठ मानते हुए कविता लिखी है।
श्रेष्ठ शाकाहार है/ डॉ ओमकार साहू Read More »
छन्न-पकैया छन्न-पकैया छन्न-पकैया छन्न-पकैया, सुन लो बात हमारी।अच्छी सेहत चाहो जो तुम, बनना शाकाहारी।। छन्न-पकैया छन्न-पकैया, जो हो शाकाहारी।रक्तचाप में संयम रहता, होती नहीं बिमारी।। छन्न-पकैया छन्न-पकैया, सादा भोजन करना।लंबा जीवन मिलता जोगी, पड़े न पीड़ा सहना।। छन्न-पकैया छन्न-पकैया, बनो न माँसाहारी।मोटापा बढ़ता है उससे, बढ़ती है लाचारी।। छन्न-पकैया छन्न-पकैया, मुख मण्डल है निखरे।माँसाहार करें
शाकाहारी जीवन/ विनोद कुमार चौहान जोगी Read More »
अपनाओ सब शाकाहार हृष्ट-पुष्ट तन रखे निरोगी, दे यह सात्विक शुद्ध विचार।सर्वोत्तम आहार यही है, अपनाओ सब शाकाहार।। मार निरर्थक मूक जीव को, देना उन्हें नहीं संत्रास।ऐसे निर्मम पाप कर्म का, व्यर्थ बनो मत तुम तो ग्रास।दास बनो मत तुम जिह्वा के, करो तामसिक भोजन त्याग।कंद-मूल फल फूल-सब्जियाँ, रखो अन्न से ही अनुराग।शाकाहारी खाद्य वस्तु
अपनाओ सब शाकाहार/ डाॅ इन्द्राणी साहू Read More »
यहां दोहे के माध्यम से शाकाहार के महत्व के बारे में बताया गया है
शाकाहार पर दोहे/ नीरामणी श्रीवास नियति Read More »
इस कविता में शाकाहार ना अपनाने पर आई विपत्तियों के बारे में बताया गया है।
ऐसा भी कल आयेगा/ अनिता तिवारी Read More »
इस कविता में शाकाहार अपनाने पर जोर दिया जा रहा है
शाकाहारी जीवन / विजय मिश्र दानिश Read More »
यहां शाकाहार पर आधारित कुछ दोहे दिए गए हैं
शाकाहार पर दोहे/ डॉ सुकमोती चौहान रुचि Read More »
शाकाहारी जीवन करें व्यतीत जन्म हुआ मानव का लेकर ,सौम्य प्रकृति आधार।तृण- तृण इसके रग- रग में है,रचता रहता सार।अंग सभी प्रत्यंग सजे हैं,सात्विक शक्ति शरीर,मन का मनका प्रस्तुत करता ,मन ही मन आभार। है विकास के पथ पर चलता,रज कण लिए शरीर।मज्जा रक्त अस्थियां पोषण,पाने हेतु अधीर।हारमोन है घ्रेलिन नामक, बढे़ भूख आहार,सम्यक नींद
शाकाहारी जीवन / देवेंद्र चरण खरे आलोक Read More »
शाकाहारी भोजन अपनाइए भोजन अपनी अपनी पसंद का सभी का होता है।कोई मांसाहारी तो कोई शाकाहारी होता है ।।कुछ कहते मांसाहारी अच्छा होता है।कोई शाकाहारी को अच्छा कहता है ।।अपनी अलग-अलग सोच पर सभी कुछ निर्भर करता है।कहते हैं और सुना जंगली जानवरमांसाहारी होते हैं।फिर इंसान शाकाहारी छोड़क्यों मांसाहारी होते हैं।।शाकाहारी भोजन कर जीव जंतु
शाकाहारी भोजन/ हरि प्रकाश गुप्ता Read More »
जीवन की नैया धीरे-धीरे खेना (छंद मुक्त रचना)“ओ खेवइया।जीवन की नैया,है बहुत ख़ूबसूरत,कमसिन है,भरी हुई है नज़ाकत से।देख,लहरें आ रहीं है दौड़कर,डुबोने को तत्पर।सम्हाल पतवार,ख़ीज लहरों की,तूफ़ान साथ ला सकती हैं।जीवन की नैया को,धीरे-धीरे खेना।रुकना नहीं ।पलटना नहीं।जो छुट गया ,जो मिल न सका,ग़म उसका नहीं करना।खेता जा।जो मिल जाए ,साथ ले आगे ही आगे
जीवन की नैया धीरे-धीरे खेना Read More »