फिर क्या दूर किनारा
हिंदी कविताफिर क्या दूर किनारा त्याग प्रेम के पथ पर चलकरमूल न कोई हारा।हिम्मत से पतवार सम्भालोफिर क्या दूर किनारा। हो जो नहीं अनुकूल हवा तोपरवा उसकी मत कर।मौजों से टकराता बढ़ चलउठ माँझी साहस धर।धुन्ध पड़े या आँधी आयेउमड़ पड़े जल धारा॥१॥ हाथ बढ़ा पतवार को पकड़ोखोल खेवय्या लंगर।मदद मल्लाहों की करता हैबाबा भोले संकर।जान […]
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