प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति की सुंदरता, ऋतुओं के परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सृष्टि के विविध रूपों को दर्शाने वाली कविताएँ इस वर्ग में संकलित हैं।

JALATI DHARATI

जलती धरती/ रितु झा वत्स

प्रकृति और पर्यावरण

जलती धरती/ रितु झा वत्स विशुद्ध वातावारण हर ओरमची त्रास जलती धरती धूमिल आकाश पेड़ पौधे की क्षति होरही दिन रात धरती की तपिश कर रही पुकार ना जानेकब बरसेगी शीतल बयार प्लास्टिक की उपयोग हो रही लगातार दूषित हो रही हर कोना बदहाल जलती धरती सह रही प्रहारसूख रही कुंवा पोखर तालाब बूंद भर पानी […]

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JALATI DHARATI

धरती पर कविता/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे

प्रकृति और पर्यावरण

धरती पर कविता/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे जलती धरती तपन ज्वलनक्रोधाग्नि सा ज्वाला।नशा पान में चुर हो बनते पाखंडी है मतवाला।। काट वृक्ष धरा किन्ह नगनधरती जलती , तु हो मगनवाह रे मानव,खो मानवताक्या सृष्टि का है यही लगन।। जरा सोचो,कुछ कर रहमना कीजिए प्रकृति दमनतेरा प्राण बसा है वहींधरती पवन और गगन।। कैसा मानव

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बसंत ऋतु

बसंत ऋतु / राजकुमार मसखरे

प्रकृति और पर्यावरण

राजा बसंत / राजकुमार मसखरे आ…जा आ…जाओ,हे ! ऋतुराज बसन्त,अभिनंदन करते हैं तेरा, अनन्त अनन्त ! मचलते,इतराते,बड़ी खूबसूरत हो आगाज़,आओ जलवा बिखेरो,मेरे मितवा,हमराज़ ! देखो अब ये सर्दियाँ, ठिठुरन तो जाने लगी,यह सुहाना मौसम, सभी को है भाने लगी ! पेड़- पौधों में नव- नव कोपलें आने को हैं,अमियाँ में तो बौर ही बौर ,लद

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विकलांग नहीं दिव्यांग है हम

प्रकृति और पर्यावरण

3 दिसम्बर दिव्यांग दिवस :- पर सभी दिव्यांग जनों को सादर समर्पित विकलांग नहीं दिव्यांग है हम आँखे अँधी है, कान है बहरे ,हाथ पांव भी भले विकल ।वाणी-बुद्धि में बनी दुर्बलता ,विश्वास-हौसला सदा अटल । अक्षमताओं से क्षमता पैदा कर ,विकलांग से हम दिव्यांग कहाए ।परिस्थितियों से लोहा लेकर ही ,काँटो-पथ पर फूल खिलाए

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Jai Sri Ram kavitabahar

राम को माने राम का नही/राजकुमार ‘मसखरे’

प्रकृति और पर्यावरण

राम को माने,राम का नही (राम की प्रकृति पूजा) ओ मेरे प्रभु वनवासी रामआ जाओ अपनी धराधाम,चौदह वर्ष तक पितृवचन मेंवन-वन विचरे बिना विराम! निषाद राज गंगा पार करायेकंदमूल खाकर सरिता नहाए,असुरों को राम ख़ूब संहारेऋषिमुनियों को जो थे सताए ! भूमि कन्या थी सीतामाईशेष अवतारी लक्ष्मण भाई ,पर्ण कुटी सङ्ग,घास बिछौनाभील राज सङ्ग करे

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tree

रूख राई हे खास/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे

प्रकृति और पर्यावरण

रूख राई हे खास/ डॉ विजय कुमार कन्नौजे जंगल झाड़ी अउ रूख राईप्राणी जगत के संगवारी हे।काटथे‌ फिटथे जउन संगीओ अंधरा मुरूख अज्ञानी हे। अपने हाथ अउ अपने गोड़मारत हवय जी टंगिया।अपन हाथ मा घाव करयबेबस हवय बनरझिया।। पेट ब्याकुल बनी करत हेठेकेदार के पेट भरत हे।नेता मन के कोठी भरत हेजीव जंतु जंगल के

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Vegetable Vegan Fruit

सर्वोत्तम आहार/ जागृति शर्मा

प्रकृति और पर्यावरण

सर्वोत्तम आहार/ जागृति शर्मा शाकाहार -सर्वोत्तम आहारहैं प्रकृति का अनुपम उपहार ।। न करों हिंसाअपनाओं शाकाहारपाओं सात्विक आहार।। जैसा खाओंगें अन्नवैसा होगा मनकह गये गुणीजन ।। शाकाहार की ओर बढो़न प्राणियों से तुम दुरव्यवहार करों,प्रकृति संरक्षण करोपारिस्थितिक संतुलन बनाये रखों।। हे मानव ! तुम क्यों दानवबन सर्वाहारी बन जाते,क्यों जीवों की जान लेते..। हे मानव

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सर्वोत्तम शाकाहार/ सोनाली भारती

प्रकृति और पर्यावरण

सर्वोत्तम शाकाहार/ सोनाली भारती मानव को पता है क्या अपना आहार –जीव चेतना से ही क्यों अब भी इतना प्यार!नियति विधि से नियंत्रण हेतु संयत होते शिकार,संतुलित है इससे पशु पक्षी का संसार।रसना के वशीभूत मूक जीवों का संहार?क्रूर आस्वादन का हिंसक ये व्यापार।मानवता हो मौन;हो जाए शर्मसार!भोजन का भाव से जुड़ता है तार,जैसा हो

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शाकाहार है सर्वोत्तम आहार/चंद्रकला भरतिया

प्रकृति और पर्यावरण

शाकाहार है सर्वोत्तम आहार। जैसा खाते अन्न, वैसा होता मन। भरा रहता मन शुद्ध, पवित्र विचारों से। फटक न पाते कुविचार मन में ।। दूध सर्वश्रेष्ठ आहार कहलाता। बिन माँ के बच्चे, पाले जाते गोदुग्ध पर ही। स्वाभाविक रूप से बाढ़़ होती बच्चों की। बाधा कोई कभी न आती।। नाना प्रकार के फल- सब्जियाँ, दी

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शाकाहार सर्वोत्तम आहार है / सौदागर सिंह

प्रकृति और पर्यावरण

शाकाहार सर्वोत्तम आहार है / सौदागर सिंह———————————शाकाहार सर्वोत्तम आहार है,इसको आप अपनायें।मांसाहार को मन-मस्तिष्क से,सर्वथा दूर भगायें।। मानवीय दृश्टिकोण यही है,इसपर गौर फरमाएं।अभिवृद्धि बल-विद्या की कर,सत्य कामार्ग दिखाएं।। सात्विक भोजन से ही मन में,सदाचार आयेगा।धर्म के प्रति आकर्षित होंगे, सुकर्म की राह दिखाएगा।। जैसा भोजन वेसा मन,ब्यवहार भी वैसा ही होगा।देखा गया है वैसी करनी,

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शाकाहार ही है सर्वोत्तम आहार/प्रियंका मिश्रा” कुमुद”

प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति द्वारा दिया अनुपम उपहारकह गए हमारे ऋषि मुनिशाकाहार ही है सर्वोत्तम आहार।पेट की क्षुधा मिटाने कोना करो क्रूर व्यवहारचीखों और आहों से भरानिकृष्ट है ये आहार।कह गए हमारे ऋषि मुनिशाकाहार ही है सर्वोत्तम आहार।हिंसा से भरा हुआ भोजनकैसे मन को शांति देगाकैसे पुष्ट करेगा तन कोकैसे शुद्ध होंगे विचार।कह गए हमारे ऋषि मुनिशाकाहार ही

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शाकाहार सर्वोत्तम आहार/इंद्रराज मोटवानी

प्रकृति और पर्यावरण

शाकाहार सर्वोत्तम आहार शाकाहार सर्वोत्तम आहारफिर क्यों इन जीवों में मचा है ये हाहाकार? इसको खाया उसको खाया यह कैसा जीवन अपनाया चलो सुनें प्रकृति की पुकार खत्म करें अब ये विकार। जैसा अन्न वैसा मनशाकाहार सर्वोत्तम आहार,जिएं और जीने देंबहने दें अब शीतल बयार। इंद्रराज मोटवानी

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