जनचेतना दिवश पर कविता
समाज और यथार्थकरोना काल में लोग किस तरह से परेशान हुए जनता की वेदना को महसूस किया गया और उसको कविता के रूप में लिखा गया है यह मौलिक अप्रक्षित रचना मेरे द्वारा लिखी गयी है |
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करोना काल में लोग किस तरह से परेशान हुए जनता की वेदना को महसूस किया गया और उसको कविता के रूप में लिखा गया है यह मौलिक अप्रक्षित रचना मेरे द्वारा लिखी गयी है |
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आज भी बिखरे पड़े हैं – गंगाधर मनबोध गांगुली गंगाधर मनबोध गांगुली ” सुलेख “ समाज सुधारक ” युवा कवि “ कल तक बिखरे पड़े थे , आज भी बिखरे पड़े हैं ।अपने आप को देखो , हम कहाँ पर खड़े हैं ।।01।। बट गये हैं लोग , जाति और धर्म पर ।गर्व करते रहो , मूर्खतापूर्ण
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परिवर्तन पर कविता – पुष्पा शर्मा परिवर्तन अवश्यंभावी है, क्योंकि यह सृष्टि का नियम है।नित नये अनुसंधान का क्रम है।सतत श्रम शील मानव का श्रम है। परिवर्तन ज्ञान, विज्ञान मेंपरिवर्तन मौसम के बदलाव मेंसंसाधनों की उपलब्धियों की होड़ में।परिवर्तन परिवार मेंसमाज राज्य देश में। हर रीति और रिवाज में खान पान पहनावे मेंनित नया उत्साह देता,जीवन
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सुविचारित पग आगे बढ़ें मातृभूमि की सेवा करें,दलित शोषित समाज की पीड़ा हरें,निजी स्वार्थों से, ऊपर उठकर,पर हित में भी, ध्यान धरें,नव भारत के लिए, पथ गढ़ें,सुविचारित पग आगे बढ़ें! निर्धनता अभाव से जूझ रहे हैं लोग,अज्ञानता का व्याप्त है, महा रोग!अंध विश्वास, अंध श्रद्धा, सर्वत्र व्याप्त है,आगे बढ़ने के लिए, सब कुछ पर्याप्त है,फ़िर
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गाँधी की जरूरत -पद्मा साहू “पर्वणी” पदमा साहू “पर्वणी” के दोहेखैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़ गाँधी की जरूरत -पद्मा साहू “पर्वणी” “पुनः जरूरत देश को, गाँधी तेरी आज।”* सत्य अहिंसा सादगी, ब्रम्हचर्य विश्वास।आत्म शुद्धि व्यवहार है, गाँधी जीवन खास।। गाँधी के सिद्धांत यह, परम धर्म हो धेय।जीवन शाकाहार हो,ध्यान धरो अस्तेय।। महा प्रणेता देश के, गाँधी
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सूरज पर कविता – सुकमोती चौहान “रुचि रवि की शाश्वत किरण – सीसरिता की अनवरत धार – सीलेखनी मेरी चलती रहनाजन-जन की वाणी बनकरमधुर संगीत घोलती रहनाउजड़े जीवन की नीरसता में।छा जाना मधुमास बनकरपतझड़ की वीरानी में। तुम्हें करनी है यात्राजीवन के अवसान तकसाँसों में समाविश्वपटल की शिला परउकेरनी है तुम्हें यथार्थ का चित्र। दीन
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पोस्टर ब्वाय लगते हैं -अनिल कुमार वर्मा बैनर छाप लोग नेता नहीं, पोस्टर ब्वाय लगते हैं -अनिल कुमार वर्मा जब से प्लास्टिक फ्लेक्स का चलन हुआ है तब से इसका उपयोग बहुत ज्यादा हो गया है। जन्मदिन, उत्सव, त्यौहार, स्वागत और नववर्ष की बधाई के बहाने आज तथाकथित नेता अपने बड़े बड़े फोटो लगे हुए
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परोपकार पर हिंदी में कविता परोपकार पर कविता-सुधीर श्रीवास्तव संवेदनशील भावसंवेदनाओं के स्वर परोपकार की निःस्वार्थ भावनागैरों की चिंता से जोड़करस्वेच्छा से सामने वाले की पीड़ा से/मर्म सेखुद को जोड़ने की कोशिश हीपरोपकार है।बिना लोभ मोह अपने पराये के भेद किये बिनाकिसी का सहयोग/सहायता हीतो परोपकार है,हमारे द्वारा किया गयापरोपकार ही तो हमारी खुशियों का
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बाबूलाल शर्मा के लावणी छंद काव्य रंगोली- लावणी छंद पूजा की थाली सजती हैअक्षत पुष्प रखें रोली।काव्यजगत में ध्रुव सी चमके,कवि प्रिया,काव्य रंगोली। हिन्दी साहित सृजन साधना,साध करे भाषा बोली।कविता गीत गजल चौपाई,लिखे कवि काव्य रंगोली। दोहा छंदबद्ध कविताई,मुक्तछंद,प्रीत ठिठोली।प्रेम रीति शृंगार सलौने,पढ़ि देख काव्य रंगोली। लिखे सभी पर्व की बातें,ईद दीवाली व होली।गंगा जमनी
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बाबूलाल बौहरा के कुण्डलियाँ छंद संवेदना -कुण्डलिया छंद होती है संवेदना, कवि पशु पंछी वृक्ष।मानव मानस हो रहे, स्वार्थ पक्ष विपक्ष।स्वार्थ पक्ष विपक्ष, शून्य संवेदन बनते।जाति धर्म के वाद,बंधु आपस में तनते।भूल रहे संस्कार,खो रहे संस्कृति मोती।हो खुशहाल समाज,जब संवेदना होती। बढ़ती है संवेदना, राज धर्म संग साथ।व्यक्ति वर्ग समाज भी,रखें मनुजता माथ।रखें मनुजता माथ,
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इस वर्ष नववर्ष पर कविता बहार द्वारा निम्न हिंदी कविता संकलित की गयी हैं आपको कौन सा अच्छा लगा कमेंट कर जरुर बताएं नववर्ष पर हिंदी कविता : महदीप जँघेल निशिदिन सुख शांति की उषा हो,न शत्रुता, न ही हो लड़ाई।प्रेम दया करुणा का सदभाव रहे,सबको नववर्ष की हार्दिक बधाई। विश्व बंधुत्व की भावना हो
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