समाज और यथार्थ

पोरा तिहार

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पोरा तिहार छत्तीसगढ़ के परब आगे,हिरदे मा ख़ुशी छा गे गा।माटी के बइला ला भरले,पोरा तिहार मना ले गा।काठा भर पिसान सान ले,ठेठरी खुरमी बना ले गा।पोरा तिहार के परम्परा ला,संगे- संग निभाले गा।मोटरा बांध के ठेठरी खुरमी,बहिनी घर अमराबे गा,किसिम किसिम लम्हरी बोदकु,ठेठरी सबला खवाबे गा।सगा सोदर गांव समाज मा,सुनता ल् बगराबे गा,छत्तीसगढ़िया के

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सृष्टि कुमारी की कवितायेँ

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सृष्टि कुमारी की कवितायेँ आज की नारी मैं आज की नारी हूं, इतिहास रचाने वाली हूं,पढ़ जिसे गर्व महसूस करे वो इतिहास बनाने वाली हूं।नारी हूं आज की, खुले आसमान में उड़ना चाहती हूं मैं,बांध अपने जिम्मेदारियों का जुड़ा, अपने सपनों को पूरा करना चाहती हूं मैं।अब अपने जुल्मों का शिकार नहीं बना सकता कोई

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doha sangrah

गुरु पूर्णिमा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा बौहरा विज्ञ

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महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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गुरुवर – सुकमोती चौहान रुचि

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महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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अटल कश्यप की हिन्दी कवितायेँ

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अटल कश्यप की हिन्दी कवितायेँ सैक्स-वर्कर चश्मा इंसानियत का चढ़ाकरएक सैक्स-वर्कर को टटोला था,छल्ले धुँए के उड़ाते और हलक से शराब के घूँट उतारते अपने दर्द को मेरे सामने उड़ेला था,पसीजा था मेरा कलेजा भीउसकी कहानी सुनकरमजबूरियों ने उसेदलदल में धकेला था,थे उसे भी जिदंगी से शिकवे-शिकायतेंपर चेहरें परफीकी हँसी को ओढ़ा था,पूँछा जब मैने

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संस्कारों का आधुनिकीकरण- पद्ममुख पंडा महापल्ली

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“संस्कारों का आधुनिकीकरण” बचपन से ही है मेरी नजरसमाज के रहन सहन परखान पान;जीवन शैलीसंस्कारों की है जो धरोहर अपनी संस्कृति है ऐसीसुंदर और मनोहरजो यह कहती हैसंपूर्ण विश्व है अपना घर भारतीय परंपरा मेंसुबह चरण स्पर्श करबच्चे पाठशाला जातेमात पिता के आशीष लेकर पर पाश्चात्य सभ्यता काअब हो रहा है असरजिसका पड़ रहा दुष्प्रभावहमारे

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विश्व रिकार्ड के मायने –राजकुमार मसखरे

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विश्व रिकार्ड के मायने कोई गीत गा करकोई साज बजा करकोई नृत्य करा करकोई लाखो दीप सजा करकोई ऊँचा रावण जला करकोई कुछ कविता बना करकोई गाड़ी फर्राटे चला कर !अरे मुझे ये तो बताओये विश्व रिकार्ड बना करसमाज को क्या संदेश दिएकिस ग़रीब का भला कियेकिस बेटी का हाथ पीला कियेकिस बीमार का इलाज

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मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ-उपमेंद्र सक्सेना

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मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ जिससे अपना मतलब निकला, क्यों मैं उसके लात लगाऊँदुनिया का सिद्धांत अनोखा, मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ। मगरमच्छ के आँसू गिरते, जब वह सुख से भोजन करताबगुला भगत यहाँ पर देखो,अपनों पर यों कभी न मरता जिस थाली में भोज खिलाया, क्यों मैं उसमें छेद बनाऊँदुनिया का सिद्धांत अनोखा, मेरी बिल्ली मुझसे

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अहिल्या (खण्डकाव्य)- सुकमोती चौहान रुचि

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इंद्र के गलती की वजह ऋषि गौतम ने माता अहिल्या शाप देकर पत्थर बना दिया। कालांतर में प्रभु श्रीराम के चरणस्पर्श द्वारा वे पुन: स्त्री बनी।

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हाँ मैं भारत हूँ -रामनाथ साहू”ननकी”

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हाँ मैं भारत हूँ -रामनाथ साहू”ननकी” आधार — *थेथी छंद* ( मात्रिक ) आदि त्रिकल (14/10 ) , पदांत – 112 मृत्यु तथा जीवन का सुख ,सर्व सदाकत हूँ ।अरब वर्ष से शुभचिंतक , हाँ मैं भारत हूँ ।।सभी उपनिषद् विश्लेषक , सद्गुरु ईश्वर के ।प्रश्न अनूठी जिज्ञासा , शंकास्पद स्वर के ।। लोक और

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अनिल कुमार गुप्ता अंजुम की कवितायेँ

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यहाँ पर अनिल कुमार गुप्ता अंजुम की कवितायेँ दिए जा रहे हैं :- मैंने उसे – कविता मैंने उसेकिसी का सहारा बनते देखामुझे अच्छा लगा शायद आपको भी ………. मैंने उसे किसी की भूखमिटाते देखामुझे अच्छा लगा शायद आपको भी ………. मैंने उसे किसी की राह केकांटे उठाते देखामुझे अच्छा लगा शायद आपको भी ……….

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सामाजिक विषमता पर कविता- पद्म मुख पंडा

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सामाजिक विषमता पर कविता- बही बयार कुछ ऐसी जूझ रहे जीने के खातिर,पल पल की आहट सुनकर,घोर यंत्रणा नित्य झेलते,मृत्यु देवता की धुन पर।सुख हो स्वप्न, हंसी पागलपन,और सड़क पर जिसका घर,किस हेतु वह भय पाले,जब मृत्यु बोध हो जीवन भर? जो कंगाल वही भिक्षुक हो,ऐसा नियम नहीं कोई,जो धनवान, वही दाता हो,होता नहीं, सही

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