समाज और यथार्थ

दीपावली पर कविता (Diwali kavita in hindi)

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का के राजा रावण का वध कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा रही थी. भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या आगमन पर दिवाली मनाई गई थी. हर नगर हर गांव में दीपक जलाए गए थे. तब से लेकर […]

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लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर कविता

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लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर कविता जयप्रकाश नारायण सिन्हा जी को हम तो,अपने जीवन के सपनों में सचमुच लाएँबने लोकनायक वे ऐसा ज्ञान दे गए,जिससे हम मानवता को फिर से पनपाएँ। छपरा जो बिहार में गाँव सिताब दियारा,अब उत्तर प्रदेश के बलिया में है न्याराग्यारह अक्टूबर को सन् उन्नीस सौ दो में,वहीं जन्म ले जो सबका

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शिक्षा ज्ञान का दीपक है कविता -बाबूराम सिंह

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शिक्षा ज्ञान का दीपक है कविता सौभाग्यसे मिलाहै नरतन इसे सुफल बनाओ।शिक्षा ज्ञान का दीपकहै सरस सदा अपनाओ।। बिनविद्या नर पशु समहै कहती दुनियां सारीछाया रहता जीवन है में चहुँदिश अँधियारी।ज्ञान ध्यान भगवान बिना माया रहती है घेरे-सबकुछ होता ज्ञान बिना मति जाति है मारी। अतः ज्ञानालोक हेतु शिक्षा को सेतु बनाओ।शिक्षा ज्ञान का दीपक

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हिन्दी का गुणगान – अकिल खान

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हिन्दी का गुणगान संस्कृत भाषा से,अवतरित हुआ है हिन्दी,भारत की माथे की है ये अनमोल बिन्दी।‘राष्ट्रीय भाषा’का जिसे मिला है देश मे सम्मान,प्यारे देशवासियों किजीए,हिन्दी का गुणगान। हिन्दी की है प्यारी-प्यारी,मिठी-मिठी बोली,दोस्ती-व्यवहार में,हिन्दी भाषा है हमजोली।विद्वान-ज्ञानीयों ने,जिसका किया है बखान,प्यारे देशवासियों,किजीए हिन्दी का गुणगान। हम हैं हिन्दवासी,हमें नित हिन्दी है प्यारा,हिन्दी को सभी-जन ने प्यार

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शबा राव की कवितायेँ

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शबा राव की कवितायेँ आज की बात मैं घर से निकली पढ़ाई के लिए,बस अड्डे पर बस का इंतजार करते रहे,कुछ देर बाद बस आ गई,मैं और बाकी के लोग बस में बैठ गए। बस में बैठी महिला मेरे से बात करने लगी,मैंने उनसे पूछा तुम क्या करती हो?महिला ने जवाब दिया बड़े बड़े घरों

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आखिर क्यों? – सृष्टि कुमारी

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आखिर क्यों? क्यों बना दिया मुझे पराया? क्यों कर दिया आपने मेरा दान?एक बेटी पूछ रही पिता से,क्या मेरी नहीं कोई अपनी पहचान? बेटों के आने पर खुशियां मनाते हो,फिर बेटी के आने पर हम क्यों?एक बेटी पूछ रही पिता से,हम भी तो आपके ही अंश हैं, क्यों मुझे पराया कहते हो? कभी मां, कभी

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शिक्षक की अभिलाषा – अखिल खान

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5 अक्टूबर 1994 को यूनेस्को ने घोषणा की थी कि हमारे जीवन में शिक्षकों के योगदान का जश्न मनाने और सम्मान करने के लिए इस दिन को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र

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शाला और शिक्षक को समर्पित कविता

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डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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तीजा पोरा के दिन आगे

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तीजा पोरा के दिन आगे तीजा पोरा के दिन आगे चलो मइके दुआरी माउहाँ दाई डहर देखे अपन चढ़के अटारी मा । गुड़ी मा बैठ के रद्दा निहारत हे बिहनिया लेलगे होही मया मारे सियनहा संग चारी मा । मया सुतरी ह लामे हे बिताए जम्मो घर डेराखुशी के दिन जहुँरिया के लेहे आही सवारी

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पोरा तिहार

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पोरा तिहार छत्तीसगढ़ के परब आगे,हिरदे मा ख़ुशी छा गे गा।माटी के बइला ला भरले,पोरा तिहार मना ले गा।काठा भर पिसान सान ले,ठेठरी खुरमी बना ले गा।पोरा तिहार के परम्परा ला,संगे- संग निभाले गा।मोटरा बांध के ठेठरी खुरमी,बहिनी घर अमराबे गा,किसिम किसिम लम्हरी बोदकु,ठेठरी सबला खवाबे गा।सगा सोदर गांव समाज मा,सुनता ल् बगराबे गा,छत्तीसगढ़िया के

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सृष्टि कुमारी की कवितायेँ

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सृष्टि कुमारी की कवितायेँ आज की नारी मैं आज की नारी हूं, इतिहास रचाने वाली हूं,पढ़ जिसे गर्व महसूस करे वो इतिहास बनाने वाली हूं।नारी हूं आज की, खुले आसमान में उड़ना चाहती हूं मैं,बांध अपने जिम्मेदारियों का जुड़ा, अपने सपनों को पूरा करना चाहती हूं मैं।अब अपने जुल्मों का शिकार नहीं बना सकता कोई

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doha sangrah

गुरु पूर्णिमा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा बौहरा विज्ञ

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महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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