कल का दौर भी देखा -अक्षय भंडारी
हिंदी कविताकोरोना संक्रमण में देखा वह हाल उस दौर के जो शब्द मन से आए मेने उसे लिखने का प्रयास किया
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कोरोना संक्रमण में देखा वह हाल उस दौर के जो शब्द मन से आए मेने उसे लिखने का प्रयास किया
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इस रचना में एक “विक्षिप्त व्यक्ति” को चरित्र के रूप में पेश किया गया है जिन्हें हम पागल कह मरने के लिए छोड़ देते हैं | उसके पागल होने की वजह शायद हम जानना नहीं चाहते |
बेख़याल – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना में जिन्दगी की भागमदौड़ को चित्रित किया गया है साथ ही जिन्दगी किस मोड़ पर आ खड़ी हुई है इसे भी इस रचना की विषयवस्तु बनाय गया है |
वक़्त बेवक्त जिन्दगी- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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जब हिन्दी के जाने माने रचनाकार एवं टेलीविजन कलाकार आर्यन को किसी लड़की से एकतरफा प्यार हुआ मगर उस लड़की को मालूम नहीं था तब उन तक कविता के माध्यम से संदेश भेजने के लिए आर्यन सिंह कृष्णवंशी ने छोटी कविता लिखी-
मुश्किल राहें प्यार की -आर्यन सिंह यादव Read More »
बेखुदी की जिंदगी… बेखुदी की जिंदगी हम जिया करते हैं। शायद इसलिए हम पिया करते हैं । रही सही उम्मीदें तुझ पर अब जाती रही।ना समझ बन गए हैं कोई सोच आती नहीं ।मिली तुझसे जख्मों को हम सीया करते हैं । बेखुदी की जिंदगी… बेशुमार दौलत क्या? हमको पता नहीं ।बेपनाह मोहब्बत क्या ?तुमको
बेखुदी की जिंदगी- मनीभाई नवरत्न Read More »
मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं।तुमसे हुए हर मुलाकातें सताते हैं ।क्यों उस दिन अनजान रहा ,तेरे चाहत का ना भान रहा ।अब जब पता है तू ही लापता है , कैसे मिलू तुझे?सोचकर हम घबराते हैं।मुझे तेरी हर बातें …. बीते कल में चेहरा तेरा खोजू,आजकल
मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं- मनीभाई नवरत्न Read More »
हे दीन दयालु हे दीनानाथहे दीन दयालु, हे दीनानाथ !दीन की रक्षा करलें मांगे वरदान। हे कृपालु ,हे भोलेनाथ! हे कृपालु , हे भोलेनाथ!हीन की रक्षा कर ले मांगे वरदान । ऊंची चोटी पर तेरा वास है ।हर तरफ शांति, उल्लास है। छायी रहे ऐसे सदा, अमन से ये जहान। मांगे वरदान। हे दीन दयालु….
हे दीन दयालु हे दीनानाथ- मनीभाई नवरत्न Read More »
मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है- मनीभाई नवरत्न मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है ।जैसे तेरी पहचान वैसे मेरी पहचान है। जो तू सोचता है वह मेरी सोच है ।जो तू खोजता है वह मेरी खोज है।इस बात पर भला क्यों अनजान है ? मैं इंसान हूं….जब मैं राहों से गुजरता हूं तु
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इस कविता में मानव के अनैतिक व्यवहार का वर्णन मिलता है जिसने उसे मानव से दानव की श्रेणी में ला खड़ा किया है |
यह कैसा लोकतंत्र – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार “अंजुम”
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इस रचना में वर्तमान सामाजिक परिवेश में मानव की स्थिति को दर्शाया गया है वह स्वयं को असहाय सा महसूस कर रहा है |
किस राह – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता में मैंने मातृभूमि की वंदना करने की कोशिश की है साथ ही महान व्यक्तित्व जिन्होंने देश की कीर्ति पताका फह्रराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है उन्हें भी इस कविता में स्थान दिया है |
मातृभूमि को नमन- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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