कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

yog

योग पर दोहे /डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

हिंदी कविता

योग पर दोहे में डिजेंद्र कुर्रे योग के महत्व को बयां करते हैं, कि योग हमें शांति और सजावट प्रदान करता है, योग पर दोहे /डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” योग क्रिया तन को करें, अतुल परम बलवान।इसके पुण्य प्रभाव से, मिटते छल अभिमान।। चरक पतंजलि ने दिया, हमको अनुपम योग।दूर करें तन से सदा, सरल सहज […]

योग पर दोहे /डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” Read More »

yogasan

हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है योग

समय और जीवन दर्शन

 योग, हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। शारीरिक व्यायाम ,मुद्रा (आसन) को ध्यान (मन) से जोड़ना है इस हेतु सांस लेने की तकनीक को सीखना होता है. शरीर को आत्मा से जोड़ना है और फिर परमात्मा या प्रकृति या ईश्वर से जुड़ना होता है . हिंदू

हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है योग Read More »

तांका काव्य विधा पर रचनायें

प्रकृति और पर्यावरण

तांका एक प्राचीन जापानी काव्य विधा है जो संक्षिप्त और संरचित रूप में गहन भावनाओं और विचारों को व्यक्त करती है। यह विधा पाँच पंक्तियों में लिखी जाती है, और प्रत्येक पंक्ति में निर्धारित मात्रा होती है। तांका का शाब्दिक अर्थ “लघु गीत” या “छोटा गीत” होता है। इसे “वाका” के रूप में भी जाना

तांका काव्य विधा पर रचनायें Read More »

प्यार का जोड़ा

प्यार करते हो उनको बता दीजिए/ कवि बृजमोहन श्रीवास्तव

हिंदी कविता

इस कविता में कवि बृजमोहन श्रीवास्तव ने प्रेम के इज़हार की खूबसूरती और आवश्यकता को वर्णित किया है। उन्होंने कहा है कि दिल में छुपे प्यार को साफ़ और सच्चे तरीके से व्यक्त करना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी न रहे और प्रेम की राहें सजीव और उज्ज्वल बनें। प्यार करते हो उनको

प्यार करते हो उनको बता दीजिए/ कवि बृजमोहन श्रीवास्तव Read More »

नव दीप

नव दीप / जानसी पटेल

समाज और यथार्थ

यहाँ पर “नव दीप जले हर मन में” शीर्षक से जानसी पटेल की एक कविता प्रस्तुत की जा रही है: नव दीप / जानसी पटेल रचयिता: जानसी पटेल नव दीप जले हर मन में,नव ज्योति बहे हर जीवन में। अंधकार हटे हर कोने से,प्रकाश फैले इस सृष्टि में। सपने संजोए आँखों में,संकल्प हो सजीव मन

नव दीप / जानसी पटेल Read More »

नव दीप

नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट

समाज और यथार्थ

इस कविता में भुवन बिष्ट ने आशा, प्रेम, और भाईचारे का संदेश दिया है। हर व्यक्ति के मन में नई उम्मीदों और सकारात्मकता के दीप जलाने का आह्वान किया है, जिससे समाज में शांति, प्रेम, और सद्भावना का वातावरण बने। नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट नव दीप जले हर मन में,          अब

नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट Read More »

kavi aur kavita

कवि और कविता/ पुष्पा शर्मा”कुसुम”

समाज और यथार्थ

कवि: कवि वह व्यक्ति होता है जो शब्दों के माध्यम से भावनाओं, विचारों, और अनुभवों को व्यक्त करता है। कवि अपनी रचनाओं में कल्पना, संवेदना, और आत्मा का मिश्रण करते हुए पाठकों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है। कवि का कार्य केवल शब्दों का संग्रह करना नहीं होता, बल्कि वह अपनी रचनाओं के माध्यम

कवि और कविता/ पुष्पा शर्मा”कुसुम” Read More »

गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड में दर्ज छन्दबद्ध भारत का संविधान पुस्तक का हिस्सा बने मनीभाई पटेल “नवरत्न”

हिंदी कविता

गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड में दर्ज छन्दबद्ध भारत का संविधान पुस्तक का हिस्सा बने मनीभाई पटेल “नवरत्न” बसना -भारत के 18 राज्यों के अलावा चार देशों के साहित्यकार द्वारा सृजित विश्व के प्रथम छंदबद्ध भारत का संविधान का हिंदी भवन, नई दिल्ली में विमोचन हुआ। मूल संविधान के 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित

गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड में दर्ज छन्दबद्ध भारत का संविधान पुस्तक का हिस्सा बने मनीभाई पटेल “नवरत्न” Read More »

save tree save earth

धरती हमको रही पुकार-आदेश कुमार पंकज

हिंदी कविता

धरती हमको रही पुकार धरती हम को रही पुकार ।समझाती हमको हर बार ।। काहे जंगल काट रहे हो ।मानवता को बाँट रहे हो ।इससे ही हम सबका जीवन,करें सदा हम इससे प्यार ।।धरती हमको रही पुकार ।। बढ़ा प्रदूषण नगर नगर में ।जाम लगा है डगर डगर में ।दुर्लभ हुआ आज चलना है ,लगा

धरती हमको रही पुकार-आदेश कुमार पंकज Read More »

हाइकु

गीता द्विवेदी की हाइकु

हिंदी कविता

गीता द्विवेदी की हाइकु 1  –  पकते फल       फुदके गिलहरी       कोई न हल 2  –  बीज धरा में        झर – झर बरखा        नवअंकूर 3  –  कठपुतली       मनोरंजन कड़ी       दुनिया भूली 4  –  एक आंगन       संयुक्त परिवार        लुभाए मन 5  –  ठण्डा है पानी       काँपती है सयानी        नहाए कैसे गीता द्विवेदीअम्बिकापुरजिला – सरगुजा

गीता द्विवेदी की हाइकु Read More »

हाइकु

हाइकु मंजूषा-पद्म मुख पंडा स्वार्थी

हिंदी कविता

हाइकु मंजूषा 1चल रही हैचुनावी हलचलप्रजा से छल 2 भरोसा टूटाकिसे करें भरोसासबने लूटा 3 शासन तंत्रबदलेगी जनताहक बनता 4 धन लोलूपनेता हो गए सबअब विद्रूप 5 मंडरा रहाभविष्य का खतराचुनौती भरा 6 खल चरित्रजीवन रंगमंचन रहे मित्र 7 प्यासी वसुधाजो शान्त करती हैसबकी क्षुधा 8 नदी बनाओजल संरक्षण कावादा निभाओ 9 गरीब लोगनिहारते गगननोट

हाइकु मंजूषा-पद्म मुख पंडा स्वार्थी Read More »

Scroll to Top